भारत में भारतीय हिंदू मरते, तडपतें रहें पर हिंदू तो सिर्फ पाकिस्तानी हिंदू ही है ,,क्यों..? “घर का जोगी जोगणा, और आन गाँव का सिद्ध “


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धर्म हर व्यक्ति की निजता और उसका व्यक्तिगत अधिकार है,राजनीति करने और Publicity पानें का जरिया नहीं

मेरी पाकिस्तानी विरोध और विशेषकर पाकिस्तानी हिंदूओं के छद्मवेशी कूटरचित (Charlatans)  Forged ‘बेचारों’ के भरपूर विरोध के चलते कई सुबुद्धि प्रदत्त जन मुझको शायद जन्मजात उन सबका ही विरोधी समझने लगे हैं और मेरे पास ऐसे पत्र और लिटरेचर्स आने लगे हैं जिनमें समझाया जा रहा है कि जैन,बौद्ध ,मुस्लिमों की वजह से हिंदूत्व पूर्णता से खतरें में हैं।

यह कुछ कुछ मुझे यह याद दिला रहा है कि “30-35″ साल पहले इस्लाम खतरें में है,और 100-80 साल पहले से अब तक ईसाईयत खतरे में है।

अरे भाई मैं तो सिर्फ यह ही कहना चाहता हूँ अपनी सभी पोस्टों और कमेंट्स के माध्यम से कि – ” भारत,भारतीयता और भारतीय संप्रभुता खतरें में है,स्थानीय और स्थानीयता अर्थात् मूल निवासी भारतीयों के Bonafide , Domicile अधिकार खतरें में है, हमारी पल पल बदलती कथित संवेदनशीलता और सही मानसिकताऐं खतरें में है”

धर्म हर व्यक्ति की निजता और उसका व्यक्तिगत अधिकार है,राजनीति करने और Publicity पानें का जरिया नहीं,धार्मिक आधार पर हम 66 साल पहले ही देश बांट चुके, क्या हासिल हो गया…?
कथित संवेदनशीलता और निरपेक्षता के चलते समस्या तो जस की तस ही रही…तो अब फिर से नये बंटवारों की तैय्यारियां किस कारण की जा रही हैं..?

पाकिस्तान के ही हिंदू,हिंदुत्व का प्रचार करने वाले सिर्फ यह बतला दें कि ‘तिलक, तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार’ का नारा पाकिस्तान, बंगलादेश या अफगानीस्तान से आयात हुआ था क्या..?

हिंदूओं को एक करने का नारा लगाने वाले और प्रचार करने वाले यह बतला दें कि हिंदूओं को ही क्यों बांट दिया है आरक्षित और अनारक्षित वर्गों में..?
क्या आरक्षण वालों के भगवान, दीपावली,होली अलग या विशेष हैं अनारक्षित वर्ग की तुलना में..??
Once Enemy, Ever Enemy

यह कहने वालों नें गलत नहीं कहा,बिच्छू अपनी प्रकृति और काटना नहीं बदलता, भले ही गंगाजल से नहा कर पूजास्थान में ही रहे।
सो दुश्मनों में भाई ढूँढना बंद करो और ढूंढ कर बंगलादेशी, पाकिस्तानी आदि को लतिया कर इस मातृदेश ,भारत देश से भगाना शुरू करो, बंटवारा बिलकुल भगवन के वरदान की तरह था शायद ,एक ही और एकबार ही…!!
अब उस बंटवारे के समर्थक गद्दारों और उनके वंशजों को धार्मिक या मानवीयता के आधार पर इस 125 करोड जनसंख्या के साथ 15-20 करोड अवैध विदेशियों,परदेशियों के उपदेशक बोझ से लदे हमारे गरीब देश में विकास को अवरूद्ध करके हमारे मूल अधिकारों के हनन को संवेदनशीलता ,मानवता के नाम पर छूट देना और सहन करना वो बेवकूफी है जिसका खामियाज़ा हम नहीं अपितु 15-25 साल बाद हमारे वंशज़, हमारे बच्चे भरेंगें और भुगत कर हमारा ही विरोध करेंगे!

पाकिस्तानियों में भाईचारा ढूंढने वाले बस यही जवाब दें कि भारतीय हिंदू कहाँ जायेंगे, सिर्फ भारतीय ही बने रहने को भारत कहाँ है….?

मेरा अपना निष्कर्ष तो यही है कि –
” पाकिस्तानी हिंदूओं को पाकिस्तान की अपनी सरजमीं से बहुत प्यार है, बस वो भारत में रहने बस जानें को ज्यादा सुविधाजनक और आरामदायक मानतें हैं,बकौल जोधपुर के ही एक पाकिस्तानी हिंदू ‘कि यहाँ मौके बहुत हैं। ”

बाकी यह आप ही जानों कि किस प्रकार के मौके उनको यहाँ ज्यादा लगते हैं..?

बाकी थोथी, और बेकार की कचरा भरो,कचरारूपी गद्दार बसाने को तत्पर हिंदुत्ववादी भावनाओं को मैं नहीं समझ पाता हूँ क्योंकि अपने भारतीय हिंदू बीमारी, भूख और बेकारी,लाचारी से तडप तडप कर भी मर रहे हों तो इनकी पोस्ट पर या पेज पर एक लाईन काली नहीं हो पाती,भारतीय हिंदू तो सिर्फ कांग्रेस,सपा,बसपा आदि पार्टियों और मुसलमानों को गरियाने के लिये ही चारा हैं,,जैसे इन जैसों के बगैर तो हिंदुत्व खत्म ही होने को तैयार था या खत्म ही हो जायेगा, भारतीय हिंदुत्व में शायद ऐसे लोग कश्मीरी हिंदुओं, कश्मीरी पंडितों को हिंदू ही नहीं मानते और ना ही अपने ही देशमें विस्थापित हो रहे इन लोगों के दर्द या कहानियों, सच्ची घटित घटनाओं से इनको कोई मतलब या सहानुभूतियाँ ही हैं,, लेकिन, हिंदुत्व बचा लो,जागो हिंदु,बेचारे पाकिस्तानी हिंदू, कुत्ते सी शक्ल का पाकिस्तान जहाँ हिंदू है परेशान, प्रकार की बेमानी पोस्ट से, शेयर, कमेंट,लाईक से भरे रहतें हैं।

अरे भाई ये कैसी दोगली मानसिकता और दोगला हिंदुत्व है तथाकथित हिंदुत्ववादीयों का, कि जिसमे “घर का जोगी जोगणा, और आन गाँव का सिद्ध ” माना जाये..???

क्या किसी के पास  किसी तरह का जवाब है…..?

समय है चेत जाओ,मेरा विरोध या समर्थन करने से भी कुछ हासिल नहीं होगा बल्कि खुद समूचा समझकर ही साथ आने से हासिल होगा.

वंदे मातरम्

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