भारत है क्या..एक गणराज्य या कंपनी, कॉरपोरेशन..?


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भारत आखिर क्या है..?

1.) एक देश है…..?
2.) एक गणराज्य है….?

आखिर क्या है………..?





मेरी नजर में हमारे केंद्रीय प्रशासन की निर्लिप्तता,और मतलबीपन की राजनीति और मूल नागरिकों के प्रति वैचारिक निर्विकारिता ने हमारे भारत गणराज्य को यानि Republic of India / Union of india को एक खुली धर्मशाला बना दिया है।

जिसमें सदियों से श्रीलंका में ही रहते आये श्रीलंकाई लोग तमिल,आदि होनें के नाम से हमारे यहां शरणाथी बन जातें हैं,नेपाली का तो कह ही नहीं सकते,बर्मीज लाखों,तिब्बती लाखों,बंगलादेशी करोडों,अब पाकिस्तानी भी लाखों की संख्या में भारतीय नागरिकों के मूल अधिकारों और हक का हनन करते आ रहें हैं सिर्फ कुप्रबंधन और प्रशासनिक निष्क्रियता से…!!

लेकिन वही प्रशासन और उन्ही जागृत नागरिकों की संवेदनाएं कश्मीर के ‘वास्तविक विस्थापितों ‘ के मामले में संवेदनहीनता की मिसाल है।
झूठे और बनावटी ‘विस्थापितों’ के लिये हमारी विचारों,संवेदनशीलता और धन की थैली का मुंह खुल जाता है जोकि अवैध और पूर्णता से घुसपैठिये हैं हमारे मूल नागरिक अधिकारों के डाकू हैं।

मैं नहीं कहता कि यह सब ही गलत है, आओ मिलकर प्रतिरोध करें,, आज के हालात अब आगे कायम नहीं रहने वाले, किसी को तो इस प्रशासनिक और राजनैतिक धाँधली के विरोध में आगे आना ही होगा..सो मैं क्यों किसी अबूझ,अनदेखे मसीहा का, नेता का इंतजार करूं?

मेरे संवैधानिक अधिकारों का, संविधान प्रदत्त नागरिक शक्तियों का कानूनन इस्तेमाल देश के शत्रुओं और छिपे कुप्रशासन,कुप्रबंधन के विरूद्ध सशक्त और पुरजोर तरीके से करूँगा,,,,!

जय हिंद
वन्दे मातरम्

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