मेरा भारत … ‘महान’..?


भारत देश महान है…

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भारत देश में बस भुलक्कडों की संख्या कुछ ज्यादा है और बाकी सब भूतकाल ,वर्तमान को भूलकर हवाई भविष्य के हवाई सपनों में डूबे रहते हैं..!

सवाल किसी पर है ही नहीं बस बजरबट्टू की तरह टुकुर टुकुर रह कर उत्तरों तथा राहत के नाम पर टुकडाखोरी भीख की ही लालसा पाले हैं..!!

यही ऐसा महान व अनोखा देश है जिसके पढे लिखे महान निवासी, परिवर्तन हेतु कोई योजना,नीति पर नहीं अपितु नेता-पार्टी परिवर्तन पर निर्वाचन करते हैं..!

मजेदार बात यह है कि भारत की जनता में कोई भी भारतीय नहीं है, ,बस राष्ट्रवादिता की बासी कढी में उबाल भी पाकिस्तान की हिंसक दया पर निर्भर करता है..!

किंतु फिर भी भारत देश स्वयंभू महान है..!

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कमजोर देश अपने नागरिकों और सम्मान की सीमाओं के बाहर रक्षा करने में लगभग असमर्थ होता है पर हमारा स्वयंभू महान भारत देश सीमाओ के भीतर ही हमेशा से असमर्थ रहा है किंतु फिर भी हम जनतांत्रिक रूप से महान हैं..!

इस महान अविष्कारक देश के सभी महान राजनैतिक दल हम भारतीयो को खोजी व विशेषज्ञ मानते हुए सोशल इंजीनियरिंग के तहत संतुष्ट करते हैं, गोया कि भारत में 36 भारत हैं…!

भारत में तीन चरणों की नागरिकताऐं हैं-

1.) शरिया आधारित पर्सनल लॉ बोर्ड और प्राथमिक नागरिकता व्यवस्था, जिसमें सरकार के प्रधान व राजनैतिक विचारधाराओं अनुसार उन प्राथमिक नागरिकों का देश व संसाधनों पर पहला आधिकारिक अधिकार है..!

2.) आरक्षित वर्ग नागरिक व्यवस्था जिसमें चमत्कारिक रूप से संवैधानिक नागरिक अधिकार और निर्वाचन, प्रतियोगता तक में साधारण नागरिक अधिकार का उल्लंघन कर अयोग्यता को योग्यता पर प्राथमिकता है ..!

3.) सबसे दोयम दर्जे के नागरिक जो मानवजनित गलती से सवर्ण भारतीय पैदा हो कर निम्नस्तरीय अधिकारों के साथ हर सरकारी सुविधा समेत अधिकारों तक में सबसे निचले स्तर पर है क्योंकि उनके किन्ही तथाकथित पूर्वजों ने हजारों वर्षों तक अत्याचार किये थे इसी कारण वह संविधान के संरक्षण में उन पूर्वजों के पापों की सजा भोगने को विवश है, ,,!

किंतु यही संवैधानिक व राजनैतिक प्रावधान देश के शरिया अंतर्गत आते प्राथमिक नागरिकों पर लागू करने में पूरे देश,राजनीति को दस्तें लग जाती हैं ..मुंह से बोल तक नहीं फूटते..विचार उत्पन्न होने ही बंद हो गये हैं..!

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भारत में सुप्रसिद्ध और स्वीकार्यता के नाम पर थोपी गई ‘दो ‘ संवैधानिक नागरिक धर्म कानून व्यवस्थाएँ हैं..-

1) धर्म आधारित शरियत वाली पर्सनल लॉ बोर्ड नागरिक कानून व्यवस्था

2) सांसदो द्वारा व मानव निर्मित अन्य सभी के लिये समान धार्मिक कानून व्यवस्था जिसमें हिंदू,जैन,बौद्ध, ईसाई,पारसी सभी सम्मिलित हैं।

पर फिर भी हम धर्मनिरपेक्ष हैं…?

भारत देश महान है …

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पूरी राजनीति और सारे समर्थक मिलकर विरोध कर लें मैं फिर भी बडे पुरजोर तरीके से हमेशा कहता रहूंगा कि भारत देश कोई सेक्यूलर यानि धर्मनिरपेक्ष मूल्यों वाला देश सिरे से ही नहीं है और ना ही इस पूरे भारत में या भारत को छोड़ो पूरी फानी दुनिया में ही कोई सेक्यूलर , धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति है ही नहीं क्योंकि पैदाईश से या पसंद से हर व्यक्ति किसी ना किसी दीन,धर्म अथवा पंथ से जुड़ा ही होता है जो उसके लिये प्रमुख रहता है तो कोई भी सजीव व्यक्ति धर्मनिरपेक्ष, सेक्यूलर हो ही नहीं सकता..!!

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धर्मनिरपेक्ष तो देश , राज्य , कानून,  संविधान,  व्यवस्था, प्रशासन, पद,  नियम,  निर्देश, घोषणा जैसे निर्जीव मात्र हो सकते हैं कोई सजीव मानव कहीं भी, किसी तरह सेक्यूलर या धर्मनिरपेक्ष हो ही नहीं सकता और जो यह कहता है वह सिवाय झूठ बोलकर टुकड़ाखोरी नौटंकी करता है और वहीं दुष्ट “टुकड़ाखोर सेक्यूलर भिखारी” होता है जो सिर्फ एकता में अनेकता लाने का सरल शकुनि कर्म कर के ही टुकड़ा पाता है जिसकी मिसाल आज की सेक्यूलर राजनीति और सेक्यूूलर राजनीतिज्ञ हैं…जिसके दुष्कर्म का प्रतिरूप 1947 में धार्मिक आधार पर विभाजित हिंदू भारत का यह सड़ा हुआ सेक्यूलरिज्म के बुरके में पर्सनल लॉ बोर्डों,  वक्फ व मदरसा बोर्डों का सम्मिलित शरिया रूप है जहां हिंदू और हिंदुत्व दोयम दर्जे का ही नाम है…!!

धर्मो रक्षति रक्षित:

वन्दे मातरम्    

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और हम भारतवासी ….??

चमन के गधे मात्र हम.

जय हिंद मित्रों

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