यह स्वतंत्रता, जनतंत्रता है या कोई घिनौना राजतंत्रीय मजाक ..?


भारत में, यह कैसी स्वतन्त्रता है जिसमें सभी प्रकार के अधिकारों पर अलगाववादियों, देशद्रोहियों, मजहबी कट्टरपंथियों, वोट बैंक के लोभियों, बाहुबलियों, धन्नासेठों और जातिवादी राजनीतिक दलों का वर्चस्व है..?

यह कैसी स्वतन्त्रता जिसमें सरकारी इशारे पर नौकरशाही आम नागरिकों पर हमले करती है..?

यह कैसी स्वतन्त्रता जिसमें मासूम बच्चों, महिलाओं, बूढ़ों, बीमारों और विकलांगों को अपने अधिकार के लिए सड़कों पर उतरना पड़े..?

यह कैसी स्वतन्त्रता जिसमें देशद्रोहियों की चाटुकारिता की जाए और देशभक्तों को गोलियों से भूना जाए..?

यह कैसी स्वतन्त्रता जिसमें एक खास वर्ग को पाकिस्तान के झण्डे फहराने और भारत के राष्ट्रीय झण्डे को जलाने की इजाजत दी जाए..?

यह कैसी स्वतन्त्रता है जिसमें भारत के संविधान, संसद, सर्वोच्च न्यायालय और बहुसंख्यक समाज का अपमान करके खुली बगावत करने जैसी देशघातक हरकतों को अनुच्छेद 370 की आड़ में अनदेखा कर दिया जाए..?

यह कैसी स्वतन्त्रता जिसमें देश के एक भाग में सौ करोड़ हिन्दुओं को अपनी धार्मिक यात्रा के लिए सौ एकड़ जमीन के लिए भी बलिदान देना पड़े..?

यह कैसी स्वतन्त्रता जिसमें देशद्रोहियों को तो सरकार द्वारा राशन पानी दिया जाए और देशभक्तों पर कफ्र्यू लगाकर चालीस दिन तक भूखा रहने को मजबूर किया जाए..?

स्वतन्त्रता संग्राम में हजारों-लाखों राष्ट्रभक्तों ने अपना बलिदान दिया था। क्या इस दिन के लिए….?

देश में एक ऐसा क्षेत्र कश्मीर भी है, जहां पिछले 66 वर्ष से पनप रहा अलगाववाद अब पूर्णतया राष्ट्रदोह में बदल में चुका है।
जहां भारत से कटकर पाकिस्तान में शमिल होने अथवा आजाद इस्लामी मुल्क बनाने के लिए शुरू हुआ हिंसक आन्दोलन अपनी चरमसीमा लांघ चुका है। कश्यप ऋषि की भूमि कश्मीर में अब विदेशी हमलावरों का बोलबाला है। जहां जिहाद की खूनी चक्की में पिस कर हिन्दू समाज का 98 प्रतिशत हिस्सा मतान्तरित होकर अपने ही पूर्वजों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और गौरवशाली विरासत को बर्बाद करके भारत का शत्रु बन गया है। जहां से भारतीयता की रक्षा करने और विदेशी आक्रमणकारियों के सामने घुटने न टेकने वाले हिन्दुओं को भगा दिया गया है।

भारतीय संसद द्वारा 1996 में पारित प्रस्ताव में, राजनीतिक नेताओं द्वारा लगाए जाने वाले नारों में, सरकारी कागजों में और कोटि-कोटि हिन्दुओं के दिलों में भले ही कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, परन्तु सेकुलर असलियत इसके विपरीत है।
आज कश्मीर में जिहाद चल रहा है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों में प्रशिक्षित होकर मुस्लिम मुजाहिदीन न केवल कश्मीर में ही “आजादी की जंग” छेड़े हैं, बल्कि इसी रास्ते से पूरे हिन्दुस्थान को दारुल इस्लाम बनाने के लिए भारत में फैल चुके हैं..गवाह हम सब, भारत सरकार और नियामक सब हैं ..पर फिर भी सब आंखें मूंदे ‘जनसहयोग’ के कारण ही सोने को ‘मजबूर’ हैं……

यक्ष प्रश्न बना रहेगा भारत के कालिदासों के लिये कि ” क्या हम स्वतंत्र हैं ..?”

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
वन्दे मातरम्

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