भारत में जिहादी आतंकवाद और गज़वा ऐ हिंद किन्ही दंगों की उपज़ नहीं है !


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हमेशा से ही जिहादी संगठन दंगों के मुस्लिम उत्पीड़न वाले दृश्यों का दुरुपयोग मुस्लिम समाज से चंदा बटोरने के लिए करते हैं पर आज तक दंगों के चलते कोई जिहादी या जिहादी संगठन खड़ा हुआ हो ऐसा कोई प्रमाण नहीं है…!!
टुकड़ाखोर छद्म सेकुलर भिखारीवेशी चिंतक और उनके मध्य-एशिया, यूरोपीय आका चाहे जितने फर्जीवाड़े कर लें सच यह है कि हिंदुस्तान में जिहादियों की आतंकी कार्रवाइयों का दंगों से पैदाइश की परिकल्पना फर्जी है….!!
हिंदुस्तान में जिहादी आतंकवाद पूरी तरह से मुस्लिम सर्वोच्चता के वहाबी विचारों और पाकिस्तानी प्रायोजन से अलगाववादी प्रवृत्ति की औलाद है। मुजफ्फरनगर में कोई दंगापीड़ित शरणार्थी जिहादी बनने के लिए तैयार नहीं हुआ…सच या झूठ…?
1960 के दशक से 2002 के गुजरात दंगों तक का भी यही इतिहास है कि इन दंगों के शरणार्थी शिविरों और दंगापीड़ितों में कोई भी जिहादी नहीं पैदा हुआ..! जिहादी रक्तपात करना मुस्लिम समुदाय के एक बेहद अल्पसंख्यक जमात का धंधा है। ये धंधेबाज जिहाद की खेती करते हैं और उसकी फसल पाकिस्तान काटता है..।

हिंदुस्तान में तमाम जिहादी संगठनों का मातृसंगठन हुआ करता है स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी)। सिमी का गठन 1977 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जमात-ए-इस्लामी की छात्र इकाई के रूप में हुआ था। कोई सेकुलर बता दे कि 1977 में किस दंगे की प्रतिक्रिया में सिमी गठित हुई….???

साबरमती एक्सप्रेस में भी सिमी ने ही लगाई थी आग ,,जो कि गुजरात के दंगों में भी एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जिसे हिंदुस्तानी आतंकी विशेषज्ञ भी बिसारते रहे हैं और जानबूझकर कोई टीवी पत्रकार या राजनेताओं में से भी कोई भी इन गुजरात के तथाकथित दंगों के ट्रिगर गोधरा के साबरमती ट्रेन के अग्निकांड के ताप पर बात नहीं करता मानो वो इंसान थे ही नहीं क्यों…??
सिमी पर 2001 में प्रतिबंध लगाया गया। गोधरा में अयोध्या से लौटती हुई साबरमती एक्सप्रेस के कोच में जो आग लगाई गई थी वह आग सिमी से जुड़े लोगों ने ही लगाई थी। सिमी ने हुजी, लश्कर-ए-तोयबा, इंडियन मुजाहिदीन, हरकत-उल अंसार, हरकत-उल मुजाहिदीन के आतंकियों का ऐसा नेटवर्क तैयार कर दिया था कि जांचकर्ताओं को भी किसी भी बमकांड का पता लगाना मुश्किल ही नहीं असंभव हो चुका था,, 2002 से लेकर 2013 के बीच जितने भी आतंकी हमले हुए हैं उनमें ऐसा कोई भी नाम नहीं उभरता जिसके बारे में यह बताया जा सके कि हमले में शामिल जिहादी कभी दंगापीड़ित रहा है,,चाहे बात अबू हमजा की कर ली जाए, फैयाज कागजी की कर ली जाए, सैयद जबीउद्दीन अंसारी उर्फ अबू जुंदाल की कर ली जाए, यासिन भटकल की बात कर ली जाए, कतील सिद्दीकी की पृष्ठभूमि जांच ली जाए, जावेद हमीदुल्लाह सिद्दीकी की पृष्ठभूमि देख ली जाए, इनमें कोई कभी दंगापीड़ित नहीं रहा है। फिर दंगापीड़ितों के नाम पर जिहाद को जायज ठहराने का यह गोरखधंधा क्यों किया जा रहा है…???

सर्टिफाईड़ सेक्यूलर कांग्रेसी पप्पू और ईमानमणिधारी केजरी मोर या साईकल सवार सबसे बडे आतंकी गुंडई समर्थक जवाब दे पाने में सक्षम हैं…??

सिमी का जब गठन किया गया था तब उसे खुद जमीयते इस्लामी ने अपनी पूर्ववर्ती छात्र इकाई स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन (एसआईओ) का पुनर्गठन करार दिया था। ‘सिमी’ वैचारिक रूप से सैयद अब्दुल अला मौदूदी के विचारों से प्रभावित थी। मौदूदी ने इस्लामी क्रांति के नाम पर 1941 में जमात-ए-इस्लामी की स्थापना की थी,,,,, 1941में कौन से सांप्रदायिक दंगे हुए थे….???
मौदूदी ने 1941 में ही शरीया (इस्लामी कानून) के तहत शासन की मांग की थी। मौदूदी का ऐलान था कि जो भी मुसलमान सेकुलर शासन को स्वीकारेगा वह मौत के बाद जहन्नुम में जाएगा। मौदूदी विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए। पर जमीयते इस्लामी की विचारधारा पर उसका प्रभाव कायम रहा। सिमी गठन के साथ ही आक्रामक पैंतरे दिखाने लगी। पितृसंगठन जमीयते-इस्लामी से उसका कागजी अलगाव 1981 में ही हो गया था..,,कश्मीर में जिहादी गतिविधियां 1988 तक साफ तौर पर हावी नहीं हो पाई थी ,,,कश्मीर में पहले मौदूदी की विचारधारा का प्रसार किया गया,, शरीया संस्थापित करने का परचम लहराया गया। इसी दौरान हिंदुस्तान के अन्य हिस्सों में भी मौदूदी की विचारधारा को माननेवालों ने जिहाद की तैयारियां शुरू कर दी थीं। मुंबई में जिहादी गतिविधियां मुंबई के दंगों के बहुत पहले प्रारंभ हो चुकी थीं..! जमीयते इस्लामी की तरह ही मौदूदी की विचारधारा को साकार करने के लिए कृतसंकल्प एक अन्य संगठन का नाम है जमात अहले-हदीस,, अहले-हदीस के गोरबा गुट के लोगों ने 1985 में मुंबई के मोमीनपुरा इलाके में मुसलमानों के कल्याण के नाम पर तंजीम इस्लाहुल मुस्लिमीन (टीआईएम) नामक एक संगठन बनाया। टीआईएम की पहली बैठक में जलीस अंसारी, आजम गौरी और अब्दुल करीम टुंडा मौजूद थे। इनमें कौन दंगा पीड़ित था….???

क्या “तीस्ता ‘दंगा’ सेटलवाड” भी इनमें से ( जलीस अंसारी, आजम गौरी और अब्दुल करीम टुंडा में से)  किसी को दंगा पीड़ित साबित कर सकतीं है क्या..?

जलीस अंसारी लोकमान्य तिलक अस्पताल, सायन का डॉक्टर था। मोहम्मद आजम गौरी अपराध जगत में सक्रिय होने के पहले आंध्र प्रदेश में माओवादी हुआ करता था। करीम टुंडा तब मुंबई में डाई का व्यवसाय किया करता था। अंसारी, गौरी और टुंडा कभी किसी दंगे के भुक्तभोगी नहीं रहे। 1985 से 1993 के बीच इन तीनों ने बम विस्फोटों की शृंखलाओं को अंजाम दिया। अगस्त 2013 में गिरफ्तारी के बाद खुद करीम टुंडा ने कबूल किया कि उससे लश्करे-तोयबा के आतंकियों ने 1991 में संपर्क कर लिया था, लश्कर-ए-तोयबा ने करीम टुंडा को कश्मीर के बाहर जिहादी नेटवर्क तैयार करने का जिम्मा सौंपा था और तब तक तो बाबरी के विध्वंस की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था…!!
जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड बताते हैं कि लश्कर-ए-तोयबा के प्रमुख हाफिज सईद ने अपने साथी आजम चीमा को बाबरी विध्वंस के महीनों पहले हिंदुस्तान भेजा था,,इसी आजम चीमा को लश्कर के जिहादी तैयार करने के साथ-साथ विस्फोटक बनाने का प्रशिक्षण देने का जिम्मा भी सौंपा गया था और तयशुदा योजनाओं के तहत बाबरी विध्वंस के बाद साल भर के भीतर टीआईएम ने 43 बमकांड मुंबई और हैदराबाद में कराए। गुलबर्गा, सूरत और लखनऊ की इंटरसिटी ट्रेनों में इस समूह ने 7 बमकांडों को अंजाम दिया। आजम गौरी, जलीस अंसारी और अब्दुल करीम टुंडा ने बमकांडों की झ़ड़ी लगा दी थी, पर इनमें से अधिकांश विस्फोट हल्के थे, 50 विस्फोटों में केवल 2 लोगों की जान गई थी..!
मार्च, 1993 में मुंबई का पहला शृंखलाबद्ध विस्फोट हुआ और इन विस्फोटों को भले ही मुंबई के दंगों की पृष्ठभूमि रही हो पर जिन लोगों ने भी इन बमकांडों को अंजाम दिया उनमें से भी कोई दंगापीड़ित नहीं था,,,दाऊद इब्राहिम का कौन-सा रिश्तेदार दंगों में मारा गया…??
टाइगर मेमन के किस रिश्तेदार को दंगों से क्षति पहुंची..??
मुस्तफा डोसा से लेकर माजिद खान तक कोई दंगापीड़ित नहीं था,,,दंगापीड़ितों के नाम पर पाकिस्तान ने विभाजनकारी तत्वों को प्रोत्साहित किया और हमारे टुकड़ाखोर सेकुलर भिखारीवेशी चिंतकों ने आईएसआई के गेम प्लान में टुकड़ों और वोट बैंक के लालच में जानबूझकर सहयोग ही दिया है …!!

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भारत सरकार सेकुलरिज्म के नाम पर मुस्लिम देशों से चाहे जितनी मित्रता दिखाए और पाकिस्तान से चाहे जितने शांति समझौते कर डाले और चाहे देश के सभी हिन्दुओं को आतंकी घोषित करके जेल में बंद कर दे लेकिन इस्लामी आतंक तब तक बंद नहीं होगा , जब तक भारत में इस्लामी शरीयत लागू नहीं होती यानि भारत इस्लामी देश नहीं बन जाता क्योंकि कुछ मक्कार मुल्लों ने पाकिस्तान सहित भारत में यह बात फैला रखी है ,कि मुहम्मद साहब ने भविष्यवाणी की थी ,एक दिन भारत पर मुसलमान जिहादी हमला करेंगे और भारत से युद्ध करके इस्लामी हुकूमत कायम कर देंगे इसलिए हरेक मुसलमान का फर्ज है कि वह रसूल की इस भविष्यवाणी को पूरा करें..!
यही कारण कि भारत पर होनेवाले हरेक हमले को मुसलमान आतंकवाद नहीं बल्कि “गज़वतुल हिन्द غزوة الهند “कहते हैं , जिसका अर्थ भारत से लड़ाई( Battle of India ) होता है .उर्दू में इस लड़ाई को ” गजवा ए हिन्द غزوه هند” भी कहा जाता है और पाकिस्तान के सुरक्षा विश्लेषक security analyst” जैद हामिद ‘ ने कुछ हदीसों के हवाले देकर यह दुष्प्रचार शुरू कर दिया है कि जल्द ही भारत पर जिहादियों हमला होगा और भारत को इस्लामी देश बनाने के लिए हर मुसलमान जिहादियों की सहायता करे..!

गजव़तुल हिन्द की हदीसें

पाकिस्तान के जैद हामिद और उसके जैसे जिहादी विचार रखने वाले भारत के दुश्मन मुसलमान जिन हदीसों के आधार पर भारत पर आतंक फैलाते रहते हैं , उनकी संख्या केवल पांच है जो कई किताबों से इकट्ठी की गयी हैं और जिन किताबों से यह हदीसें जमा की गयी है , हदीस के बाद उनके सन्दर्भ दिए गए हैं

हदीस 1.

“अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है , मेरी यह उम्मत दल बना कर हिन्द और सिंध पर चढ़ाई करेगी ”
“في هذه الأمة، سيرأس القوات نحو السند والهند”
“In this Ummah, the troops would be headed towards Sindh & Hind”
सन्दर्भ -इमाम हम्बल की मसनद , इब्न कसीर की अल बदया व् नहया और नुईम बिन हम्माद की किताब अल फितन

हदीस 2.

“हजरत सुबान ने कहा कि रसूल ने कहा है , मेरी उम्मत के दो दल होंगे ,एक को अल्लाह जहन्नम की आग से बचा लेगा और एक दल भारत पर आक्रमण करेगा फिर लौट कर ईसा मसीह से मिलेगा ”
“واضاف “بين مجموعتين أمتي أن يكون من هذا القبيل، لعنهم الله وتحررت من النار؛ مجموعة واحدة ستهاجم الهند والثاني سيكون أن الذي سيرافق عيسى ابن مريم-”
“Two groups amongst My Ummah would be such, to whom Allah has freed from fire; One group would attack India & the Second would be that who would accompany Isa Ibn-e-Maryam .”
सन्दर्भ-मसनद ,इमाम निसाई की सुन्नन अल मुजतबा ,इब्न असीम की किताब अल जिहाद ,नुईम बिन हम्माद की किताब अल फितन

हदीस 3.

“अबू हुरैरा ने कहा ,रसूल ने हम लोगों से कहा , निश्चय ही तुम लोगों से एक दल हिंदुस्तान पर हमला करेगा और युद्ध में विजयी होगा फिर वहां के राजाओं को हथकड़ियों और बेड़ियों में जकड कर घसीटते हुए सीरिया तक लायेगा . अल्लाह उन सभी मुसलमानों के गुनाह माफ़ कर देगा ,अबू हुरैरा ने यह भी कहा कि यदि मुझे इस लड़ाई में जाने का मौका मिलेगा तो मैं अपना सब बेच कर इस लड़ाई में शामिल हो जाऊंगा .”
“بالتأكيد، واحدة من القوات الخاصة بك ستفعل حرب مع هندوستان، والله يوفق هؤلاء المحاربين، بقدر ما سيجلب ملوكهم عن طريق سحبها في سلاسل / الأغلال. وسوف يغفر الله هؤلاء المحاربين (من بركة هذه الحرب كبيرة). وعندما سيعود هؤلاء المسلمين، فإنها تجد حضرة عيسى بن مريم. في سوريا “.
أبو هريرة. وقال ان ‘إذا كنت قد وجدت أن غزوة، ثم ستبيع كل ما عندي من منتجات جديدة وقديمة وستشارك فيها “.
सन्दर्भ-नुईम बिन हम्माद की किताब अल फितन

हदीस 4.

“हजरत कअब ने कहा कि रसूल ने कहा , यरूशलेम के बैतूल मुक़द्दस के एक राजा के मुजाहिद भारत पर हमला करेंगे और वहां की सारी संपत्ति लूट लेंगे और भारत के सभी राजाओं को कैद करके यरूशलेम के राजा के सामने प्रस्तुत कर देंगे और उस राजा के मुजाहिद पूरब से पश्चिम तक सम्पूर्ण भारत पर कब्ज़ा कर लेंगे,और पूरे भारत को बर्बाद कर देंगे ”
“وأضاف “كان ملك القدس (بيت المقدس المجاهدين) جعل القوات المضي قدما نحو هندوستان. ووريورز تدمير أرض هند، وسوف تمتلك كنوزها، ثم الملك سوف تستخدم تلك الكنوز للديكور القدس. التي من شأنها أن تجلب القوات الهندية ملوك أمام الملك (القدس). ومحاربيه بأمر الملك قهر كل المنطقة الواقعة بين الشرق والغرب. وهل البقاء في هندوستان “.
“A King of Jerusalem (Bait-ul-Muqaddas) would make a troop move forward towards Hindustan. The Warriors destroy the land of Hind; would possess its treasures, then King would use those treasures for the décor of Jerusalem. That troop would bring the Indian kings in front of King (of Jerusalem). His Warriors by King’s order would conquer all the area between East & West. And would stay in Hindustan ”.
सन्दर्भ-नुईम बिन हम्माद की किताब अल फितन

हदीस 5.

“सफ़वान बिन उमरू ने कहा ,रसूल ने कहा मेरी उम्मत के कुछ लोग हिंदुस्तान पर हमला करेंगे और अल्लाह उनको इस में सफलता प्रदान करेगा ,यही नहीं हमारे लोग भारत के सभी राजाओं को हथकड़ी और बेड़ियों में जकड कर कैद कर सीरिया ले जायेंगे ,वहां ही मरियम पुत्र ईसा भी मिल जायेंगे ”
“بعض الناس من أمتي قتال مع هندوستان، الله يمنح لهم النجاح، حتى لو وجدوا ملوك الهندي الوقوع في الأغلال. والله يغفر لهؤلاء ووريورز. عندما ستتحرك تجاه سوريا، سوف تجد بعد ذلك عيسى ابن مريم هناك. ”
“Some people of My Ummah will fight with Hindustan, Allah would grant them with success, even they would find the Indian kings being trapped in fetters. Allah would forgive those Warriors. When they would move towards Syria, then would find Isa Ibn Mariyam over there.”
सन्दर्भ-नुईम बिन हम्माद की किताब अल फितन

यदि हम भारत पर हमले “गजवतुल हिन्द ” के बारे में इन पाँचों हदीसों को गौर से पढ़ें तो,पता चलता है कि यह सभी हदीसें ” नुईम बिन हम्माद “के द्वारा संकलित की गयी हैं और इनकी सत्यता को परखने के लिए पहले “नुईम बिन हम्माद “का परिचय देना जरूरी है .

जैद हामिद भारत पर हमले के बारे में जिन पांच हदीसों के हवाले देता है उनको जमा करने वाला एक ही व्यक्ति था जिसका पूरा नाम “अबू अब्दुल्लाह नुईम बिन हम्माद इब्न मुआविया अल खुजैयी अल मरवाजी” था लेकिन लोग सिर्फ ” नुईम बिन हम्मादنعيم بن حماد ” ही कहते हैं…नुईम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इराक के हिजाज शहर में प्राप्त की थी फिर वह मिस्र में चला गया और वहां कई उलेमाओं से हदीसों का ज्ञान हासिल किया जिनमे मुख्य “अबू हमजा सुक्करी ,अबू बकर इब्न अयास …हफ्स इब्न गियास भी शामिल हैं लेकिन इब्न मूसा ,अबू दाऊद ,और अबुल फतह अज्दी ने कहा है कि नुईम फर्जी हदीसें बनाता था(he used to fabricate narrations ) यही नहीं इसने इमाम अबू हनीफा पर भी फर्जी हदीसें गढ़ने का आरोप लगाया था जो झूठा साबित हुआ था , इसी तरह नुइम ने एक बार कह दिया था कि कुरान किसी की रचना है , या किसी ने बना कर दी है( Noble Qurān being created ) और इस अपराध के लिए नुइम को 223 हिजरी सन 845 में जेल की सजा भी दी गयी थी और जेल में ही 229 हिजरी सन 851 में नुइम की मौत हो गयी थी …!
इस्लाम की इतिहास की किताब के मुताबिक नुइम की बड़ी दर्दनाक मौत हुई थी (he had a very bad death)जिसका सबूत यहाँ दिया जा रहा है जिसको शंका हो वह इस साईट को खोल कर देख ले
قال أحمد بن محمد بن سهل الخالدي: سمعت أبا بكر الطرسوسي يقول: أخذ نعيم بن حماد في أيام المحنة سنة ثلاث أو أربع وعشرين ومئتين، وألقوه في السجن، ومات في سنة تسع وعشرين ومئتين، وأوصى أن يدفن في قيوده
سير أعلام النبلاء – (10 / 610)

http://wup-forum.com/viewtopic.php?f=12&t=14

किताब अल फ़ित्न

यहां हमने नुईम बिन हम्माद का परिचय देते हुए प्रमाणित कर दिया है कि वह एक जालसाज , धोखेबाज व्यक्ति था , और वह फर्जी हदीसें बनाने का अपराधी था और उसने भारत पर हमले ” गजवतुल हिन्द ” के बारे में जो हदीसें प्रस्तुत की हैं , वह अपनी किताब ” किताब अल फित्न كتاب الفتن”से नकल की हैं .यह किताब मूल अरबी में है , और इसमे दस अध्याय हैं जिनमे अलग अलग देशों के बारे में भविष्य में होने वाली घटनाओं का वर्णन दिया गया है .यह किताब अरबी में है और इस साईट में दी गयी है ,

http://www.discoveringislam.org/nuaim_bin_hammad_1.htm

परन्तु इस्लाम के अनेकों विद्वान् और उलेमा नुइम बिन हम्माद की हदीसों की किताब को अप्रमाणित ,झूठी ,और बनावटी मानकर अमान्य ठहरा चुके हैं उलेमाओं ने इसके यह कारण बताये हैं ,, पाकिस्तानी मुल्ले और जिहादी भले ही “गजवतुल हिन्द “की हदीसें दिखा कर लोगों को धोखा देते रहें ,लेकिन कई साल पहले ही कई मुस्लिम उलेमाओं द्वारा इन हदीसों को झूठा और अविश्वनीय सिद्ध कर दिया था …!
सबूत के लिए इस लिंक को पाकिस्तानी लोग आंखें खोल कर देख लें , फिर भारत पर इस्लामिक हमले का सपना देखें .इसके लिए यह तीन सबूत ही काफी हैं…….

1.इमाम अल बानी ने इन हदीसों की जाँच करके इन्हें “मौजूअ موضوع” यानि फर्जी (abricated ) हदीसों में वर्गीकृत किया है और इसका पहला कारण यह बताया है कि यह हदीसें विश्वास करने के योग्य नहीं हैं ..
وهذا متن موضوع، وإسناده واهٍ مسلسل بالعلل:
الاولى / المؤلف نفسه؛ نعيم بن حماد، فإنه مع كونه من أئمة السنة والمدافعين عنها، فليس بحجة فيما يرويه، فقال النسائي:
“ليس بثقة “.
واتهمه بعضهم بالوضع. والحافظ الذهبي مع صراحته المعهودة، لم يستطع أن يقول فيه – بعد أن ذكر الخلاف حوله – إلا: “قلت: ما أظنه يضع “!

2.शेख अबू उमर अस सफार ने इन् हदीसों देखा और कहा की यह वास्तव में अपुष्ट हैं और इनके कथन जाँच करने योग्य नहीं हैं और यही बात अल बुखारी ने भी कही है …
لثانية: شيخه أبو عمر – وهو: الصفار: كما وقع له في غير هذا الحديث -، واسمه: حماد بن واقد، وهو ضعيف، بل قال البخاري: “منكر الحديث “

3.इमाम इब्न लुहैया ने जब इन हदीसों को पढ़ा तो उन्हें इतना अपुष्ट और फर्जी पाया कि इन हदीसों की किताब को आग में झोंक दिया . और जला कर राख कर दिया …

لثالثة: ابن لهيعة، وهومعروف بالضعف بعد احتراق كتبه

http://ummuabdulazeez.wordpress.com/2012/07/29/fabricated-hadeeth/

मुसलमानों को फर्जी हदीसें दिखा कर उनको भारत पर हमला करने और भारत में आतंक की योजनाओं का सूत्रधार पाकिस्तानी भड़काऊ भाषण देने के लिए कुख्यात मुस्लमान का पूरा नाम ” सय्यद जैदुज्जमा हामिद زید الزمان حامد” है ,, लोग इस नीच को “जैद हामिद ” के नाम से जानते हैं….इसका जन्म कराची में 14 मार्च सन 1964 में हुआ था और इसका बाप कर्नल “जमान हामिद ” सेना से रिटायर्ड हो चूका है ..आजकल यह पाकिस्तानी सरकार में सुरक्षा सलाहकर और राजनीतिक टिप्पणीकार है और भारत के खिलाफ जहर उगलता रहता है ,, कहा जाता है कि इसका भारत के कई मुस्लिम नेताओं से और कट्टर मुल्लों से भी सम्बन्ध है ,यह अक्सर अखबारों में भी भारत के खिलाफ लिखता रहता है , और इसके लिए अपनी एक साईट भी बना रखी है ..

जिसका लिंक निम्नांकित है ,

http://www.brasstacks.pk/  

Contact numbers: Office: 
 +92 51 5598046  

Moblile: 
0092 321 500 1370  

Email : 
admin@brasstacks.ca 

इस लेख के माध्यम से उन सभी जिहादी विचार के लोगों को सचेत कर रहा हूं जो फर्जी हदीसों पर विश्वास करके भारत पर जिहाद या लड़ाई का सपने देख रहे है , उन्हें पता होना चाहिए कि अल्लाह ने रसूल को भी अल्लाह के नाम से बातें गढ़ने की यह सजा बताई है ,जैसा कुरान में कहा है  –
और अगर यह नबी हमारी तरफ से कोई फर्जी बातें गढ़ता ,तो हम उसका हाथ जकड लेते ,फिर उसकी गर्दन की रग काट देते

सूरा -हाक्का 69: 44 से 46 तक

तो मुसलमान खुद सोचें अगर कोई रसूल के नाम से फर्जी हदीसें गढ़ता है ,तो वह उस व्यक्ति को क्या सजा देंगे,, वैसे हमें इन हदीसों से कोई अंतर नहीं पड़ता , भारत में इतनी शक्ति है कि पाकिस्तान को खाकिस्तान बना सकता है … जेहादी आतंकवाद और शरियाग्रस्त भारत के कडवे सच को झुठलाकर हम कौनसी और कैसी धर्मनिरपेक्षता की ही बातें करतें हैं, समर्थन करतें हैं …??
वन्दे मातरम्


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One Comment Add yours

  1. Vithal Das Vyas says:

    any hadish if you have link or some pdf file, block or any material for same thanks vyas ji

    Like

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