भारत ,,और सेक्यूलर देश..? मजाक मत करो,,यहां शरिया लागू है


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मेरी नजर में ना भारत धर्मनिरपेक्ष देश है और ना भारत में धर्मनिरपेक्षता ही है कहीं –

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्डों, शरिया कानूनों और धर्म आधारित मुस्लिम लीग , जमात , ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन, ऑल इंडिया मजलिस-ई इत्तेहादुल मुस्लिमीन तथा ऑल इंडिया मुस्लिम फोरम इत्यादि जैसे घोर सांप्रदायिक फासिस्टों के पंजीकृत राजनैतिक दलों से भरे भारत को आप धर्मनिरपेक्ष कहतें हैं तो क्षमा करें यह सिरे से गलत है ,,
संविधान के अनुच्छेद 44 समेत संविधान और भारत निर्माण तक की मूल भावनाओं का अपमान करते हुऐ हम सबके साथ भारत के साथ भी कांग्रेस व सहयोगी दल छल , धोखा ही करते आ रहे हैं!
भारत में शरिया आधारित कानून कांग्रेस व सहयोगियों की देन है और वास्तविक धर्मनिरपेक्षता की मूल भावना के साथ संविधान का अपमान कर देश को छलते हुऐ मात्र मुस्लिम तुष्टिकरण की ही राजनीति को 1942 से चालू रख कर समान नागरिक संहिता आजादी के 66 सालों के बाद भी लागू करने में संपूर्ण असक्षमता कांग्रेस व सहयोगियों की पुन: विभाजनकारी कुमानसिकता का परिचायक है…क्योंकि भारत में अधिकतर निजी कानून धर्म के आधार पर तय किए गए हैं…!

हम हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध हिंदू विधि के अंतर्गत आते हैं, जबकि मुस्लिम और ईसाई के लिए अपने कानून हैं…!

मुस्लिमों का कानून शरीअत पर आधारित है; जबकि इसके संपूर्ण उलट अन्य धार्मिक समुदायों के कानून भारतीय संसद के संविधान पर ही आधारित हैं…जो मेरी बात सही साबित करते हैं कि भारतभूमि कोई धर्मनिरपेक्ष देश नहीं अपितु यहां अघोषित रूप से शरीयत ही लागू है …और भारत में अब वर्तमान हालात में कोई भी समान नागरिक संहिता लागू किये जाने का विरोध कर ही नहीं सकता सिवाय कट्टर सांप्रदायिक फासिस्टों और गद्दारों के क्योंकि समान नागरिकता कानून का अर्थ भारत के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक (सिविल) कानून (विधि) से है। समान नागरिक संहिता एक सेक्युलर (पंथनिरपेक्ष) कानून होता है जो सभी धर्मों के लोगों के लिये समान रूप से लागू होता है। दूसरे शब्दों में, अलग-अलग धर्मों के लिये अलग-अलग सिविल कानून न होना ही ‘समान नागरिक संहिता’ का मूल भावना है। समान नागरिक कानून से अभिप्राय कानूनों के वैसे समूह से है जो देश के समस्त नागरिकों (चाहे वह किसी धर्म या क्षेत्र से संबंधित हों) पर लागू होता है. यह किसी भी धर्म या जाति के सभी निजी कानूनों से ऊपर होता है. ऐसे कानून विश्व के अधिकतर आधुनिक देशों में लागू हैं.
समान नागरिकता कानून के अंतर्गत निम्नलिखित स्तर सुपरिभाषित होते हैं-

1.) व्यक्तिगत स्तर

2.) संपत्ति के अधिग्रहण और संचालन का अधिकार

3.) विवाह, तलाक और गोद लेना

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समान नागरिकता कानून भारत के संबंध में है, जहां भारत का संविधान राज्य के नीति निर्देशक तत्व में सभी नागरिकों को समान नागरिकता कानून सुनिश्चित करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करता है. हालांकि इस तरह का कानून अभी तक लागू नहीं किया जा सका है पर मुझको यह समझ ही नहीं आता कि भारत के मुसलमान अपने लिए अलग पर्सनल लॉ होने पर आग्रह (ज़िद) क्यों करते हैं?
इस  हठ से उनमें अलगाव की नीति का बोध होता है। सारे भारतवासियों के लिए ‘समान नागरिक संहिता (Uniform/Common Civil Code) होना चाहिए, यह देश की एकता व अखण्डता का भी तक़ाज़ा है और तमाम नागरिकों के, क़ानून की निगाह में बराबर होने का तक़ाज़ा भी। संविधान भी यही चाहता है और यह स्पष्टता से हम सबके समक्ष है कि इस समय भारतदेश बहुत खतरनाक दौर से गुजर रहा है अगर जल्द सही दिशा में सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो राजनीतिक पार्टियां वोट के लालच में सामाजिक ढांचे की जड़ों में इतना जहर घोल देंगी कि सभ्‍य व अहिंसक,  नागरिकों के लिए जीना मुश्किल हो जाएगा और यह सब मुस्लिम तुष्टिकरण , जेहादी, आतंकवादी सांप्रदायिक हिंसा के पैरोकार अल्पसंख्यकों के सहयोग से ही होता आ रहा है..!
देश के स्वतंत्र होने के बाद यह आवश्यक था कि देश के प्रत्येक नागरिक के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू की पर ऐसा नहीं हुआ समान नागरिक संहिता का नाम लेना भी भारतीय राजनीति में अपराध समझा जाने लगा है संविधान के अनुच्छेद 44 में कहा गया था कि सरकार को प्रत्येक नागरिक के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू करनी चाहिए, लेकिन जब भी कभी समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रश्‍न खड़ा होता है मुस्लिम और ईसाई वोटों के लालची कांग्रेस व अन्य धर्मनिरपेक्ष दल स्वर में स्वर मिला कर इसका विरोध करना शुरू कर देते हैं।भारतीय संविधान एवं न्यायपालिका समान नागरिक संहिता को देश की एकता एवं अखंडता के लिए आवश्यक समझती है। ऐसी परिस्थिति में जब संवैधानिक उत्तरदायित्व एवं न्यायालय का निर्णय राजनीतिज्ञों की दृष्टि में अपराध बन जाए तब देश के नागरिकों को इसके विषय में जानना एवं निर्णय लेना अनिवार्य हो जाता है…!!

Posted By Dr. Sudhir Vyas at sudhirvyas’s blog in WordPress

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