सेक्यूलरिज्म… हे भारत यहाँ सेक्यूलरिज्म का कैसा खेल चल रहा है?


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भारत में कौन भूला है कमल हासन के उस उदगार को जिसमें मुस्लिम कट्टरपंथियों से खार खाए फिल्मी सितारे ने किसी सेक्यूलर देश जाकर बसने की चेतावनी दे दी थी यानि ये कहकर कमल हासन ने इंडिया के सेक्यूलर होने पर ही सवाल खड़ा कर दिया था…!!

ये सवाल तो उठता ही है कि क्या इंडिया में सेक्यूलर(शुद्ध आचरण वाला) नहीं रहा जा सकता है ?
क्या इसी मजबूरी के तहत सरकारी योजनाओं के शिलान्यास के वक्त नारियल फोड़ी जाती ?
क्या इसी खातिर इफ्तार पार्टियों में शरीक होकर मुस्लिम टोपी पहनकर फोटो सेशन करवाया जाता है?
क्या भारत-पाक क्रिकेट मैच देखने के लिए नेताओं और पत्रकारों के बड़े वर्ग का ड्यूटी से समय निकालना और गौरवान्वित होने की आतुरता का इजहार करना इसी श्रेणी में आता है ?

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जबकि तथाकथित रूप से व तथ्यात्मक तौर पर हमारे संविधान का मर्म है कि राज सत्ता से जुड़े लोग निजी जिन्दगी में कुछ भी हों… लेकिन सार्वजनिक और सरकारी कामों के समय सेक्यूलर यानि गैर-धार्मिक आचरण का प्रदर्शन करेंगे। टोपी पहनने और तिलक लगाने जैसे धार्मिक व्यवहार से दूर रहेंगे.. गौर करने की बात है कि सेक्यूलरिज्म शब्द का जुड़ाव मौजूदा स्थिति से है… सांसारिकता से है, दुनियादारी से है,, इसका आध्यात्मिकता से लेना-देना नहीं है,,, पिछला जन्म हुआ था या नहीं, अगला जन्म होगा या नहीं…. स्वर्ग है या नहीं… सेक्यूलरिज्म में इस तरह के विमर्श की गुंजाइश नहीं,, यही कारण है कि भारत के संविधान के अनुसार जनता तो धार्मिक रहे पर शासन से जुड़े लोग सेक्यूलर आचरण वाले रहें,,
यानि धार्मिक निष्पक्षता पर ‘इंडिया’ के राजनेता इस लाइन पर चलना नहीं चाहते,,उनके लिये यही प्रमुख है कि सेक्यूलरिज्म का मतलब अल्पसंख्यक में भी सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण और यही कारण है कि इस देश में सबसे अधिक दुष्कर्म सेक्यूलरिज्म शब्द के साथ हुआ है…!!

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नरेंद्र मोदी के सेक्यूलरिज्म यानि इंडिया फर्स्ट में राष्ट्रवाद की धमक है, उन्होंने स्पष्ट नहीं किया है कि इस राष्ट्रवाद(राष्ट्रहित) के लिए सेक्यूलर मिजाज ही रास्ता है,पर  कांग्रेस समेत सभी गैर-बीजेपी दलों का दुराग्रह है कि जो दल मुसलमानपरस्त नहीं वो कम्यूनल/ सांप्रदायिक ( गैर-सेक्यूलर शब्द का इस्तेमाल नहीं करते ना वे सब ) हैं यानि जो सेक्यूलर नहीं वो कम्यूनल ही हो सकता है यानि सेक्यूलर शब्द का एंटोनिम( उलट शब्द) गैर सेक्यूलर न होकर कम्यूनल / सांप्रदायिक कर दिया इन्होंने,, भाषा के ज्ञानी और बुद्धिजीवी ध्यान दें इस पर यदि सेक्यूलर माने गैर-धार्मिक तो फिर गैर-सेक्यूलर मतलब धार्मिक आचरण वाला हुआ…पर कांग्रेस ब्रांड सेक्यूलरिज्म के अनुसार धार्मिक आचरण वाले कम्यूनल ही होंगे..क्यों..??

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अब सुप्रसिद्ध और मीडिया बहसों की जान बनी हुई एकमात्र गोल्ड मेडेलेसिस्ट दंगा वाली थ्योरी पर भी ध्यान दें… 😀

दुनिया में सबसे अनोखा और सिर्फ भारत का ही सर्टिफिकेटधारी सेक्यूलर जमात कहता कि गुजरात में दंगे हुए तो वहां के सीएम मोदी कम्यूनल हुए, इस थ्योरी के नजरिए से देखें तो सिख दंगे के कारण पूर्व पीएम राजीव गांधी भी कम्यूनल हुए,किंतु कश्मीर के दंगों व यूं कहें कि आतंकी नरसंहारों के कारण फारूख अबदुल्ला, मुफ्ती मौहम्मद सईद और ओमर अबदुल्ला जैसे सभी मुख्यमन्त्री कम्युनल ही नहीं आतंकवादी भी हुए और हालिया मुज्जफरनगर के दंगों से अखिलेश यादव कम्युनल हैं, बंगाल के दंगों से ममता बनर्जी कम्युनल हैं,, देश का कौन सा राज्य ऐसा छूटा है जहां दंगे न हुए हों..?

यानि इन सभी राज्यों की सरकारें तो कम्युनल यानि सांप्रदायिक हुई।

वहीं जब बात पर्सनल लॉ बोर्ड और वक्फ बोर्ड समेत संविधान के अनुच्छेद 44 तथा समान नागरिक संहिता को लागू करने के विषय की तो यहां आकर कांग्रेस समेत सभी मुस्लिम तुष्टिकरण को ही सेक्यूलरिज्म बताने के पैरोकार राजनैतिक दल और उनके चरण चाटुकार से पत्रकार फंस जाते हैं…और उन पर ना कोई प्रश्न बचता है, ना जवाब ही उपजते हैं..क्यों सही है ना…??

वन्दे मातरम

Posted By Dr. Sudhir Vyas at sudhirvyas’s blog in WordPress

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