इस्लाम- जहालत,फ़िरकापरस्ती औऱ अलगाववादी ज़िहाद


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मित्रों , आमतौर पर हम सब लोग मुसलमानों के दो ही फिरकों ‘शिया और सुन्नी’ के बारे में ही सुनते रहते है ,लेकिन इनमे भी कई फिरके / समुदाय है ,इसके अलावा कुछ ऐसे भी फिरके है ,जो इन दोनों से अलग है और साथ ही इन सभी के विचारों और मान्यताओं में इतना विरोध है की यह एक दूसरे को ही ‘काफ़िर’ तक कह देते हैं और आपस में एक दूसरे की हत्यायें और मस्जिदों को ‘शहीद’ भी कर देते हैं वहां बम फोड़कर मस्जिदें जला देते है और लोगों को क़त्ल कर देते है …!
जगप्रसिद्ध है कि शिया लोग तो मुहर्रम के समय सुन्नियों के खलीफाओं ,सहबियों ,और मुहम्मद की पत्नियों आयशा और हफ्शा को खुले आम गलियां देते है,,इसे तबर्रा कहा जाता है…!!
लेकिन मुसलमानों में शिया और सुन्नी दो ही वर्ग, फिरके या समुदाय नहीं है इनमें ही अलगाववाद और समुदाय बंटवारा कूट कूट कर भरा है, ,सभी मित्र इनकी कटु सचाई पर गौर करें जिसे “फिरकापरस्ती” कह कह कर हम हिंदुओं पर उंगली उठाने में बडे बडे “जहीन मौलाना” लोग पीछे नहीं रहते-

1.) सुन्नियों के फिरके –
हनफी ,शाफई,मलिकी ,हम्बली ,सूफी ,वहाबी ,देवबंदी ,बरेलवी ,सलफी,अहले हदीस आदि ..!

2.) शियाओं के फिरके -इशना अशरी ,जाफरी ,जैदी ,इस्माइली ,बोहरा ,दाऊदी ,खोजा ,द्रुज आदि

3.) अन्य फिरके -अहमदिया ,कादियानी ,खारजी ,कुर्द ,और बहाई आदि इत्यादि।

पर इन सब में इतना अंतर है कि यह एक दूसरे की मस्जिदों में नमाज नहीं पढ़ते और ना ही एक दूसरे की हदीसों को ही मानते है….इन सब फिरकापरस्तों में सबके नमाज पढ़ने का तरीका ,अजान ,सब अलग है और इनमें भी एकता असंभव है…!
हर जगह सुन्नियों, वहाबियों के मुकाबले संख्या कम होने के से बाकी सब शांत तो रहते हैं ,लेकिन इन्हें जब भी मौका मिलाता है यह उत्पात जरुर करते हैं …!!

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यहाँ एक बहुत कटु सत्य की तरफ सबका ध्यान खींचना चाहूँगा कि मुसलमान अक्सर अपनी बढ़ती जनसंख्या की डींगें मारते रहते है और घमंड से कहते हैं कि आज तो हमारे 53-56 देश हैं आगे चलकर इनकी और हमारी संख्या और बढ़ेगी ,हमारा इस्लाम दुनिया भर में फ़ैल जायेगा …!

मित्रों,विश्व में जितने भी धर्म स्थापक हुए हैं ,सभी ने अपने मत के बढ़ने की कामना की है .लेकिन मुहम्मद साहब ही एकमात्र व्यक्ति थे जिसने इस्लाम के विभाजन ,टुकडे हो जाने और सिमट जाने की भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी यह भी अकाट्य सत्य है,यह बात सभी प्रमाणिक हदीसों में मौजूद है …!
यदि कोई इन हदीसों को झूठ कहता है ,तो उसे मुहम्मद साहब को झूठ साबित करना पड़ेगा क्योंकि यह इस्लाम के भविष्य के बारे में है और यह सचाई सभी जानते हैं कि इस्लाम किसी आदर्श या नैतिकता के आधार पर ही नहीं बल्कि तलवार के जोर पर और आतंक से फैलाया गया है ,, ऐतिहासिक रूप से इस्लाम की बुनियाद खून से भरी है और कट्टरता की ही पर्याय है, असहिष्णुता की पर्याय भी है पर कमजोर है…!!

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यह बात वर्तमान में भारत, पाकिस्तान , अफगानिस्तान, अबख़ाजिया , दक्षिणीअसेतिया , उज्बेकिस्तान , ताजिकिस्तान , इराक , चैचेन्या , इंगूशेतिया , बोस्निया , ईथोपिया ,सूडान, सोमालिया , स्पेन , अल्जीरीया , लीबीया , बंगलादेश , इंडोनेशिया , इरान , मिस्र सहित हालिया सीरीया व नाईजीरिया व मलेशिया , बंगलादेश आदि मुस्लिम देशों की वास्तविक स्थितियों की आंख में झांक कर पता लग जाता है कि “शांति का पैगाम देते शांतिदूतों का धर्म” किस तरह का पैगाम ही दे रहा है और कौन किसके खिलाफ ‘जिहाद’ ही कर रहा है या शांति का पैगाम दे रहे हैं मात्र नाम की अनंत शांति हेतु पर वास्तविकता में मरघट सी शांति हेतु …क्योंकि मुरदे कुछ नहीं बोलते वो शांत होते हैं,उन्हे सिवाय दो गज जमीन कुछ नहीं चाहिये…!!

सोचो सेक्यूलर भिखारियों, ,सोचो…माना पांचों अंगुलियां एक समान नहीं होती पर जुड़ी तो ‘हाथ’ से ही रहती हैं …खून में ‘हाथ’ ही सनता है, हर कुकर्म ‘हाथ’ ही करता है कोई अंगुली नहीं….!!.

जय हिंद
वन्दे मातरम्

Posted By Dr. Sudhir Vyas at sudhirvyas’s blog in WordPress

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