आवश्यकता


कभी कभी लोकतंत्र और आजादी के पेड़ को गद्दारों ,अलगाववादियों और आतंकी तानाशाहों के खून से ही सींचा जाना चाहिए  ,, जब कुत्ता चाँद पर भौंकता है तो ये उसका धर्म है पर जब वो अनजाने तथा बाहरी लोगो पर भौंकता या काटता है तो ये उसकी वफादारी है और देशभक्ति की भी यही पहली परिभाषा है जिसका (देशभक्ति और राष्ट्रवादिता का) हमारी गुलाम मानसिकता और मुफ्त पाने , कुछ तो पाने की लालची आशा में ही वेश्यावृत्ति के पर्याय से बन चुके चरित्र में नितांत अभाव है, और यही कारण है कि भीरू व गैरजिम्मेदार नागरिकों से ही 90% भरा हुआ हमारा भारत देश स्वघोषित एक विश्व-शक्ति तो है पर भविष्य में शायद आज से रूप में भी होगा ही नहीं..!!

क्योंकि देशभक्ति शर्मिंदा होने की भी उतनी ही काबिलियत मांगती है जितनी कि गर्व महसूस करने की …!!

जय हिंद
वन्दे मातरम्

Posted By Dr. Sudhir Vyas at sudhirvyas’s blog in WordPress

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