नरेंद्र मोदी ही क्यों…?


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नारायणं नमस्कृत्य नरंचैव नरोत्तमम्
देवीं सरस्वतिं व्यास ततो जय मुदीरयेत्

मित्रों,,नरेन्द्र मोदी के रूप में भारत को एक सक्षम , ईमानदार और तेज़ तर्रार प्रधानमन्त्री मिलने को है ,, सही कहूं तो एक ऐसा देशभक्त राष्ट्रवादी नरसिंहम् आने को है जिसके डर से गद्दार चोर चूहों और द्रोही लकडबग्घों समेत रानी महाठगिनी लोमड़ी तक की फूंकें सरक रही है और उसे रोकने के लिए सारे कुटिल अस्त्र शस्त्र का उपयोग किया जा रहा है लेकिन महाठगिनी और उसकी कूटसेना को ये नहीं मालूम कि ये वही नरेन्द्र मोदी है जिसकी तारीफ अमेरिका और यूरोप भी करता है ,, कॉरपोरेट के महारथी जिसके गुजरात के विकास के गीत गाते हैं , जनता जिसे लगातार अपने सिर आँखों पर बिठाये हुए है !

ऐसे जनह्रदय सम्राट माननीय नरेन्द्र मोदी की ही आज के भारत को जरूरत है !

साक्षात लोमड़ी की अवतार महाठगिनी को ये डर है कि अगर मोदी प्रधान मंत्री की कुर्सी तक पहुँच गए तो उसके सारे पते ठिकाने ढूंढ लिए जायेंगे और वो बच नहीं पायेगी ,, वैसे कभी कभी देश को ठगों से बचाने के लिए एक कठोर प्रशासक की जरूरत भी होती है और नरेन्द्र मोदी में वो सारे गुण परिलक्षित होते हैं जो एक प्रशासक में होने चाहिए सो यह सुनिश्चित और सर्वमान्य सत्य है कि राष्ट्रीय जननेता नरेन्द्र मोदी भारत के भविष्य हैं !

मित्रों,,, आज अगर देश को चोरों और महाठगों से बचाए रखना है तो नरेन्द्र मोदी को समस्त सहयोगियों सहित और हरेक सीट के भाजपा उम्मीदवार को नरेंद्र मोदी का ही प्रतिनिधी/ दूत मानकर उसे 100% मतदान द्वारा सांसद बनाना होगा और इसी लोकतंत्र द्वारा नरेंद्र मोदी को प्रचंड बहुमत द्वारा प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाना ही होगा अन्यथा हम अपने किये हुए पर पछताने के अलावा और कुछ कर ही नहीं पाएंगे और लूटने वाले देश को और हमें और ज्यादा लूटेंगे !

आज लगभग हम सब जानते हैं कि रूपये का क्या हाल हुआ पड़ा है , अभी और भी देखते जाइये ,मात्र नरेंद्र मोदी की लहर और चुनावपूर्व लहर का ही यह चमत्कार है कि रूपया सुधरने लग गया है,,यदि नरेंद्र मोदी नहीं तो ये महाठगिनी और गिरोह इस देश के लोगों को जीने लायक नहीं छोड़ेगें ,,इतने घोटाले होंगे और यही हाल रहेगा तो कोई भी यहाँ पैसा लगाने हिंदुस्तान में नहीं आएगा और फिर युवा वर्ग को नौकरियों के लाले पड़ जायेंगे , भुखमरी होगी , अभी भी है और ज्यादा हो जाएगी …!
देखते रहिये , लूटने वाले लूट कर भाग जायेंगे और हम दाने दाने को मोहताज़ हो जायेंगे , अब हजारों करोड़ का घोटाला नहीं होता लाखों करोड़ का घोटाला होता है और मूकता को ही ताकत मानने वाला नखदंतहीन, अर्थहीन प्रधानमंत्री कहता है कि कहीं कुछ नहीं हुआ ,,पुन: ऐसा कांग्रेसनीत मूकमोहन और देश को बर्बाद करने वाला ही प्रधानमंत्री चाहिए ..??

एक  घोषित मानसिक रूप से असंतुलित और ‘युवा’ के नाम पर चोर गिरोह का मानसिक रोगी प्रधानमंत्री चाहिए …??

पुन: नाकारा प्रधानमंत्री चाहिए हमें ?

चोरों का सरदार चाहिए हमें पुन: ?

एक देशद्रोही रिमोट से चलने वाला प्रधानमंत्री पुन: चाहिए हमें ?

पुन: लल्लू और महाठगिनी को अपना बॉस मानने वाला ही प्रधानमंत्री चाहिए हमें ?

ये हमें,,, हम सबको,,, भारत के प्रत्येक मतदाता और नागरिक को सोचना होगा कि उन्हें देश का प्रधानमंत्री चाहिए या 10 जनपथ का आज्ञाकारी नौकर ..?

नरेन्द्र मोदी को केवल एक पार्टी का नेता ना समझ कर हमारे पूरे देश का भविष्य माना जाये तो ही ज्यादा उचित होगा ,,,वो ना केवल भारतीय जनता पार्टी के खेवन हार हैं बल्कि भारत के उज्जवल भविष्य के प्रतीक भी हैं .. अभी मौका है भारत की जनता के पास कि इन लोकसभा चुनावों में अपने विवेक का पूरा उपयोग करते हुए देश के गद्दारों से कुर्सी खींचकर देशहित ही सोचने वाले नरेन्द्र मोदी के हाथों में देश की बागडोर सौंपकर भारत के भविष्य को उज्जवल और सम्मानित और शक्ति का पर्याय बना सके ! 
नरेन्द्र मोदी पर ये आरोप लगता रहा है कि वो गोधरा कांड के आरोपी हैं ,, रोने वाले सिर्फ एक समुदाय के नहीं हैं ! जिन्हें ना मालूम हो उनके लिए बताना चाहता हूँ की नरेन्द्र मोदी के मुख्य मंत्री के कार्यकाल में जितने दंगे हुए उससे ज्यादा कांग्रेस के शासनकाल में हुए हैं , हमारे देश में सांप्रदायिकता के विरोध का मतलब सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण है !

कौन भूल सकता है अहमदाबाद में 1987 में हुए दंगों को ?
तब वहा कांग्रेस थी चिमनभाई पटेल के तो गिरोहबाज़ जेहादी लतीफ़ के साथ रिश्ते होने तक की बात सामने आई थी .!!
बात चाहे 1961 में  मध्यप्रदेश के जबलपुर में हुए साम्प्रदायिक-हिंसा की हो.तब वहां भी कांग्रेस थी अथवा 1969 में गुजरात के दंगो  की हो…तब वहां भी कांग्रेस थी 1984 में सिख विरोधी हिंसा की हो..तब वहां कांग्रेस ही थी पूर्णता से संगठित रूप से पूर्वनियोजित रूप से किये नरसंहारी सिख दंगो में कांग्रेस और कांग्रेसी प्रशासन समेत कांग्रेस सदस्यों जगदीश टाईटलर, सज्जन कुमार के शामिल होने की बात साफ़ सामने थी पर उन पर कुछ हंगामा नहीं हुआ ,उन्हें बरी कर दिया गया क्यूंकि वो कांग्रेसी है इसलिये सही है…??
1987 में मेरठ के दंगे हो ,तब वहां कांग्रेस थी और 1989 में हुए भागलपुर के महा नरसंहारी दंगे की बात हो..तब वहां कांग्रेस थी ….1992 – 93 में बाबरी काण्ड के बाद मुंबई में भड़की हिंसा की हो, तब भी कांग्रेस थी … 2008 में कंधमाल की हिंसा की हो ..तब  कांग्रेस थी या फिर 2012 अभी पिछले दिनों ही उत्तर प्रदेश के बरेली में फ़ैली सांप्रदायिक हिंसा की हो अथवा अब भी बंगलादेशी मुसलमान घुसपैठियों द्वारा नियोजित राजनैतिक संरक्षण वाली सांप्रदायिक हिंसा की आग में सुलगते हुए असम की हो जिसमे अब तक करीब तीन लाख स्थानीय असमी व हिंदू लोगों ने अपना घर बार छोड़ा दिया,,,तब वहां भी सेक्यूलर कांग्रेस ही थी .!!

अब ज़रा गोधरा की बात कर लेते हैं ,, मगरमच्छ के आंसू बहाने वालों से पूछना चाहता हूँ कि गोधरा के स्टेशन पर ट्रेन में आग किसने लगाईं और क्यूँ लगाईं ? 
हर जगह गोधरा दंगो की बात होती है लेकिन उन कार सेवको के जन की बात नहीं होती क्यूंकि उन कारसेवको की जान की कीमत इसलिए नहीं है क्यूंकि वो हिन्दू थे ..??
भारत देश में हिन्दू होना एक पाप हो गया है और उनका समर्थन करना महा पाप है और उसे महा पापी मन जाता है ,,हर कोई दंगो की बात करता है लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा की जो लोग ट्रेन में जिन्दा जलकर मर गए मतलब उन्हें जिन्दा जलाया गया उनके परिवारवालो का क्या..??
वो हिंदू लोग  कैसे जी रहे है,, उनके बीवी, बच्चे, भाई, बहन कैसे हालत में है और क्या कर रहे है…?
किसी ने यह नहीं पूछा ,, 27 फरवरी 2002 को अयोध्या से वापस आ रहे 59 कारसेवको को साबरमती एक्सप्रेस के एस – 6 डिब्बे में जिन्दा जलाने की घटना से उत्पन्न हुई तीखी साम्प्रदायिक – हिंसा भारत के इतिहास में कोई पहली सांप्रदायिक – हिंसा की घटना नहीं थी..??
क्या सिर्फ इसलिए कि वो अपने आराध्य श्री राम के मंदिर निर्माण के लिए प्रण लेने गए थे बस ये उनका दोष था ? 
कहाँ से आया इतना पेट्रोल कि बोगियों की बोगियों को सुनियोजित रूप से मुसलमान भीड व मौलाना इमामों द्वारा जला डाला गया..? 
उनके जान नहीं थी ,,उनके बीवी बच्चे नहीं थे,, उनको जलन नहीं होती,, वो इंसान नहीं थे ? 
या सिर्फ वो हिन्दू थे इसलिए उनको जलाकर मार डाला गया और जब इसका प्रतिवाद आया तो सबकी त्योरियां चढ़ गयीं..क्यों ? 
क्या हिन्दुओं को इस देश में जीने का हक नहीं है ? 
उनका क्या दोष था ,, क्या उनको मारना , ट्रेन को जलाना pre planning नहीं थी ?
http://en.wikipedia.org/wiki/Godhra_train_burning

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 याद करिए राजीव गाँधी के शब्द जब इंदिरा जी की हत्या हुई थी ,, याद आया ?
उन्होंने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो जमीन हिल ही जाती है और इसी को आधार बनाकर हजारों निर्दोष सिखों को लूटा गया और मौत के घाट उतारा गया,, तब कहाँ थी साम्प्रदायिकता की बात करने वाली ज़मात ? तब कहाँ थे धर्म निरपेक्षता का दंभ भरने वाले ? 
भारत जैसे शांति प्रिय देश में हर सांप्रदायिक हिंसा की घटना निश्चित रूप से किसी व्यक्ति विशेष पर न होकर सम्पूर्ण देश के ऊपर एक कलंक के समान है ,, ध्यान देने योग्य है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब असम में फ़ैलाई सांप्रदायिक बंगलादेशी मुस्लिम हिंसा की घटना को देखने के लिए गए थे और उन्होंने असम की सांप्रदायिक हिंसा की घटना को देश का कलंक कहा था , अभी तक का यह सच है कि देश में हुए हर आतंकवादी घटना, सांप्रदायिक हिंसा, जाति अथवा भाषाई झगडे निम्नस्तर की राजनीति की भेट चढ़ते देर नहीं लगती जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है ,भैंगी मुस्लिमपरस्त धर्मनिरपेक्षता की आड में अपने को समाजवादी एवं साम्यवादी कहने वाले सेक्यूलर राजनेताओं और तथाकथित सेकुलर बुद्धिजीवियों ने अपने वाकपटु मुंहफट बयानों के चलते भारत की एकता और अखंडता को सदैव ही नुकसान पहुचानें में कोई कसर नहीं छोडी ,,,अवसरवादी राजनीति के चलते ये तथाकथित लोग मीडिया के सहारे विभिन्न आयोगों और माननीय न्यायालयों के निर्णयों को भी अपने वोट-बैंक के तराजू पर तौलते हुए देश में एक भ्रम की स्थिति पैदा करने में भी कोई कमी नहीं छोड़ते और अपने आपको न्यायाधीश समझते हुए फैसले देते हुए भी नहीं हिचकिचाते !
इसका उदाहरण हम कांग्रेस की जयंती नटराजन के उस बयान में देख सकते है जिसमें उन्होंने गोधरा काण्ड पर आये न्यायालय को फैसले को बिना पढ़े अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि गोधरा काण्ड के बाद हुए दंगो के लिए नरेंद्र मोदी ही दोषी है, इसके अलावा उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह के उस बयान को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता जिसमे उन्होंने दिल्ली के जामिया एंकाउन्टर में मोहन चन्द्र शर्मा की शहादत पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिल्ली पुलिस के मनोबल को नेस्तनाबूत करने का दुस्साहस किया था, इन्ही सांप्रदायिक मुस्लिमों के ही सरपरस्त वाकपटुओं के बयानों के चलते देश ने हमेशा सामाजिक सौहार्द, एकता , सुरक्षा जैसे राष्ट्रहित का अभाव महसूस किया है !
आज अगर देश को चोरों और महाठगों के गिरोह से बचाए रखना है तो नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाना ही होगा अन्यथा हम अपने किये हुए पर पछताने के अलावा और कुछ नहीं कर पाएंगे और लूटने वाले देश को और ज्यादा लूटेंगे ! 

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कर गयी पैदा तुझे उस कोख का एहसान है ,, सैनिकों के रक्त से आबाद हिन्दुस्तान है !!
अब आपस में लड़ने का कोई मतलब ही नहीं है लड़ना ही है तो हिन्दुस्तान के लिए लड़ो इन यूपीऐ के चोरो से लड़ो इन कांग्रेसी गद्दारों से लड़ो ,, कभी देखा है लकड़बग्घो,भेडियो ,लोमडियों ,गीदड़ों और रोते कुत्तों का सिंह से मुकाबला …??
निरंकुश चोर कांग्रेस + अराजक देशद्रोही AAP + बिकाऊ मीडिया + आतंकवादी + माओवादी नक्सली + चीन,पाकिस्तान  सब मिलकर सिर्फ नरेंद्र मोदी के विरोध में ..और पूरा हिंदुस्तान नरेंद्र मोदी तथा भाजपा के पक्ष में … यही सचाई सबसे भारी है..!!

नरेंद्र मोदी अबकी बार , विशुद्ध भारतीय हो सरकार … वन्दे मातरम् होगा साकार.

भारत माता की जय
हर हर मोदी घर घर मोदी ,

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे.

Posted By Dr. Sudhir Vyas at sudhirvyas’s blog in WordPress

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