माईक्रो पोस्ट “सेक्यूलर भाईचारा = हिंदुत्व और राष्ट्रवाद”


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अब समय की मांग के अनुसार हिंदुत्व और राष्ट्रवादिता का आपसी संबंध बहुत गहरा, भावनात्मक तथा कट्टरता का परिचायक बन ही जाना चाहिए यह शांति कायम रहने की और अखंड राष्ट्र के रूप में ससम्मान, जिंदा रहने तक की एकमात्र प्राथमिकता है !

याचक की तरह हिंदूओं को भाईचारे की डफली और चुटकियां बजाना बंद करके सगर्व हां ‘मैं हिंदू हूँ ‘ कहने मात्र के साथ साथ हर हिंदू के साथ सिर्फ हिंदू भारतीय होने के कारण संगठित होना शुरू कर देना पडेगा तब ही संगठित विराट हिंदू शक्ति और समाज के साथ जेहादी और सेक्यूलर हाथ बढा कर भाईचारे की ताली बजाने आ सकेंगे ….

अन्यथा हिंजडों की तरह विधर्मी म्लेच्छों और आतंकी, दंगाई जेहादी मानसिकता के समक्ष 66 साल से हो रहे भाईचारा नौटंकी और सेक्यूलर सहिष्णुता का क्या फायदा ही हुआ है स्पष्ट कर दें ….??

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1947 के धार्मिक आधार पर द्विराष्ट्रवादी योजना के तहत भारत विभाजन के समय काँग्रेस समेत ‘सेक्यूलर वोट’ को सहिष्णुता और सेक्यूलरिज्म याद नहीं आ रहा था…??

1947 से लेकर 2014 तक सेक्यूलर वोट और उनके राजनैतिक दलालों को सेक्यूलरिज्म किस भाषा में और किनके लिये याद आ रहा था इसका ज्वलंत उदाहरण 1990 के दशक से ही कश्मीर से हिंदू नरंसहार और विस्थापन से समक्ष है जबकि “सेक्यूलर आजादी” मिले तबतक 43-45 साल हो गये थे…केरल और आंध्रप्रदेश में समक्ष है, तमिलनाडु और यूपी, बिहार, आसाम समेत दिल्ली, मेवात और राजस्थान में समक्ष है कि कैसा और कौनसा सेक्यूलरिज्म …..??

“बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति।
बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति॥”

बस यही सुंदरकांड की चौपाई ही अब हम सब की किस्मत और भविष्य का संपूर्णता से निर्धारण करने में सक्षम है, नेता पार्टी या कोई सेक्यूलर मसीहा नहीं….!!

एकमत, संगठित हिंदू शक्ति से भाईचारे कायम रखने और सिर्फ ‘अमन ही कायम’ रखने के इच्छुक अल्पसंख्यकों की ही बढती संख्या स्वयमेव उनके मुंह से वंदे मातरम् भी बुलवायेगी  और भारत माता की जय भी साथ ही टोपी पहना कर “सेक्यूलरिज्म को मानते सेक्यूलर” का सर्टिफिकेट भी वो तब ही देने की हिम्मतें करा करेंगे जब खुद. ‘तिलक लगवा कर और मौऴी/कलावा’ अपनी कलाईयों पर स्वयमेव  बंधवायेंगे..!!

सनद रहे मित्रों, हम हिंदू भाईचारे के याचक नहीं क्योंकि हम तो ‘कानूनन बहुसंख्यक’ है और जो यह बात ना माने, मनवा सकने लायक सिर्फ संगठित रह कर, शक्तिशाली रह कर ही सच को मानने पर मजबूर किया जाता है…हम बाजार हैं, हमारी ही क्रय शक्ति है हम ही इन सांप्रदायिक कट्टर जेहादियों के, सेक्यूलर मंगतों के भाग्यविधाता हैं सो सच को स्वीकार करो मित्रों …हम याचक नहीं हैं, हम भाईचारे का उपहार नहीं देंगें अब अपितु भाईचारे को उपहार में लेंगे वो अपनी पसंद से, ठोकबजा कर निश्चित हो कर …अन्यथा 1947 के बाद और खासकर 1971 में बंगलादेश निर्माण की कांग्रेसी गलती के बाद तथा कश्मीर से हिंदू नरसंहारी विस्थापन के बाद तो हर मुसलमान और सेक्यूलर वोट विदेशी है, भारतीय कतई नहीं…भारत में हर मुसलमान विदेशी है जिसका कोई जड़ मूल या संबंध ना भारत से है ना ही भारतीय जल, जंगल ,जमीन से…सनद रहे ।

हिंदू, हिंदुत्व, हिंदुस्तान
यही हो हमारी पहचान
वन्दे मातरम्

Posted By Dr. Sudhir Vyas at sudhirvyas’s blog in WordPress

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