‘सेक्यूलर वोट’ तो वोट फिर बहुसंख्यक हिंदू कहाँ ही हैं ?


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भारत की पशु चिकित्सा व्यवस्था और सफाई व्यवस्था तो बहुत लचर है ….. !!

मुंह में बवासीर लिये मानसिक रोगी सेक्यूलर पशु , रैलियां करते हैं, विष्ठा वमन करते हैं किंतु ना पशुचिकित्सा विभाग कार्यवाही करता है ना ही नगरीय या केंद्रीय सफाई विभाग ,, बस ले दे कर एक नोटिस विभाग काम करता है नोटिस दे कर भूल जाने का ..!!

चहुंओर सिर्फ हरे रंग का बोलबाला है नीति, राजनीति, व्यवस्था और भाईचारा व धर्मनिरपेक्षता ना मानने तक में …अब तो नोट भी हरे हरे और वोट भी हरे हरे ..तो नेता भी हरे हरे और तो और आजकल हरा ही सेक्यूलर है ऐतिहासिक सांप्रदायिक पशु ही सेक्यूलर वोट है जेहाद के ठेकेदार ‘सेक्यूलर मूल्यों की रक्षा’ हेतु एकजुट हैं लेकिन सब भूल गये कि सुबह और शाम तक का रंग सिंदूरी होता है, केसरिया होता है ..और कोई नई बात नहीं है कि मेरे सिंदूरी, केसरिया रंग की यही अतिसहिष्णुता है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बंगलादेश, कश्मीर और भारत के कई हिस्सों में इसने अपना सनातन भगवा रंग त्यागकर हरा रंग धारण कर लिया है,,यदि फिर भी इसे इस तरह अपमानित और बदनाम होना पड़े और बारंबार निर्दोष हो कर भी स्वयं को सिर्फ हरे रगं को संतुष्ट करने हेतु बात बेबात सही साबित करना पडे तो मै कहूँगा की इसे इतना पक्का हो जाना चाहिए की इसे दूसरे रंग में समाहित हो जाने की जगह अन्य रंगों को खुद में समाहित कर ले या फिर सामने आनेवाले दूसरे रंगों को प्रभावशून्य कर दे….क्योंकि यही अब वर्तमान में समय और धर्मसम्मत मांग है कि आखिर कब तक गाय का थन सूअर चूसते रहेंगे..बदलाव लाना होगा,बहुसंख्यक पहले बहुसंख्यक बन कर सोचे और वोट द्वारा अपना हक ले ले…और क्यों नहीं अब ..अब नहीं तो कभी भी नहीं…!!

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मित्रों शाश्वत सत्य के रूप में हर देश में समय समय पर बारंबार कहा गया है कि “किसी देश का नाश केवल राष्ट्रवादी जूनून के तूफ़ान से रोका जा सकता है , लेकिन केवल वो जो खुद जुनूनी होते हैं दूसरों में राष्ट्रवाद का जूनून पैदा कर सकते हैं” और वैसे भी विभाजनकारी और गद्दारों की मानसिकताऐं तथा तासीर बदलने सा समय अब रहा नहीं अत: गद्दारी का खात्मा केवल गद्दारों के खात्मे से ही संभव है.. देशद्रोह और गद्दारी की सजा में खात्मे यानि मृत्युदंड का हमारे भारत में संवैधानिक प्रावधान है और मेरा मानना है कि जघन्य अपराधी समेत राष्ट्रद्रोही के, जनद्रोही के कोई मानवाधिकार नहीं होते ..!!
आज मेरे देश को किसी एक्ट की या तुष्टिकरण की नई नीति की नहीं बल्कि कठोर इच्छाशक्ति सहित एक्शन की दरकार ज्यादा है और सरकारों को केवल कमेटी निर्माण ही नहीं बल्कि लोगों से कमिटमेंट सुनिश्चित भी करनी होगी, तभी इस राजनैतिक, आर्थिक व सामाजिक बदहाली से देश को मुक्ति मिल सकती है और इस की राह में सिर्फ श्री नरेंद्र मोदी का ही विजन देश को एक रास्ता दिखाता प्रतीत होता है ..!!
मुझ जैसे मूढमगज भी इन सब को समझते हुए ही सिर्फ नरेंद्र मोदी को ही अपना घोषित नेता मानते हैं और वोट कमल को ही देंगे एक बार फिर मिशन 272+ का इंकलाब हो ही जाये शतप्रतिशत हिंदू मतदान का लक्ष्य संधान करो …!!
घर घर कमल, हर हर महादेव
हर हर मोदी, मैं भी मोदी
राष्ट्र सर्वप्रथम
वन्दे मातरम्.

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