भारत में अब मुसलमानों के किन्ही अधिकारों की मांग ही सरासर नाजायज़ है


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यह एक शाश्वत सत्य व सार्वभौमिक नियम है कि अधिकारों के लिए पहले कर्तव्य पालन करना अनिवार्य होता है लेकिन जमीनी सचाई के सर्वथा उलट जा कर लगभग सारे ही मुस्लिम नेताओं और उनके सेक्यूलर रहनुमाओं ने अब यह अनोखी बात कहना भी शुरू कर दिया कि भारतदेश की आजादी के लिये हजारों मुसलमानों ने अपनी जानें क़ुरबान की हैं तो मेरा संवैधानिक व ऐतिहासिक सत्य को मानते हुए यही कहना है कि “द्विराष्ट्रवाद सिद्धांत के आधार पर अविभाजित भारत का विभाजन करके मुसलमानों नें उसके एवज में पाकिस्तान और बंगलादेश बना कर कीमत 1947 में ही समस्त अधिकारों समेत वसूल ली थी”

साथ ही अब मुस्लिम नेता और उनके राजनैतिक रहनुमा यह अत्यंत विचित्र बात भी कहने लगे हैं कि हरेक मुसलमान स्वभाव से सेक्यूलर और हिन्दू तो सांप्रदायिक यानि फिरका परस्त होते हैं जिनके कारण ही मुसलमान पिछड़े , गरीब,अशिक्षित और बेरोजगार हैं जबकि इन मुसलमान रूपी ‘सेक्यूलर वोट’ की कट्टर धर्मांधता की बर्बर जेहादी व आतंकवादी सचाई वैश्विक रूप से जगजाहिर हो चुकी है विश्व के 63 देशों में इनकी वीभत्स व घिनौनी धर्मांधता व जेहादीवाद के रूप में..जिसमें गैरमुसलिम सिर्फ मार ही दिये जाते हैं, इस आधुनिक युग में समसामयिक व्यवहार और शिक्षा की जगह धार्मिक शिक्षा – उम्मा और मदरसा को ही थोप रहे लोगों को ऐसी शिकायतें करने तक का नैतिक व बुनियादी अधिकार कतई नहीं है।

हां आज के ‘छद्मवेशी कूटरचित सेक्यूलर’ भारत में हो सकता है कि नयी सेक्यूलर पीढ़ी के भाईचारावादी Humanitarianism पुराण पढते नव हिन्दू ,इन मुसलमानों के कपोल कल्पित दावों को सच और न्यायसंगत सा मान ही लें , लेकिन ऐतिहासिक प्रमाणों और तथ्यों से भी सिद्ध होता है कि ‘भारतीय’ मुसलमानों के यह सभी दावे झूठे निराधार और कपोल कल्पित ही हैं बस,,,, वास्तव  में मुसलमानों की बर्बादीनुमा पिछडेपन का कारण हम हिन्दू नहीं बल्कि ” हिन्दुओं की संपूर्णता से बर्बादी यही ‘भारतीय’ मुसलमान कर रहे हैं ” क्योंकि जैसे किसी के अधिकारों को छीनना अपराध है उसी तरह किसी के अधिकार छीन कर किसी अवांछित दूसरे को देना भी उस से भी बड़ा व अक्षम्य अपराध है …!!

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शायद कांग्रेसी और तथाकथित सेकुलर सत्ता के नशे में आकर इस गलतफहमी में पड़े हुए हैं कि इन अवांछित खैरात पसंद मुसलमानों को जितनी अधिक मुफतखोर सुविधायें दी जायेगी वह उतने ही देशभक्त बनेंगे जैसे कि Legionaries Patriotism जैसा वर्णसंकर देशभक्त पैसों के बल पर पैदा करने की असफल द्रोही कोशिश लेकिन हो तो इसका उलटा ही असर रहा है , मुसलमानों में अलगाववादिता की भावना जानबूझकर और उग्र हो रही है क्योंकि ये खैराती मुसलमान अपना मूल स्वभाव नहीं बदल सकते इस गद्दार अलगाववादिता यानि भारत विरोध का बिस्मिल्लाह खैरूम्माकिरीन तो कश्मीर से हो ही चुका है जो अब कुछ सालों के भीतर सम्पूर्ण भारत में फ़ैल जायेगा इसका सबूत कश्मीर में लगाये जाते इन नारों से मिलता है , वहां ये खैराती मुसलमान कहते  हैं ,

1-“ज़ालिमो  औ काफिरो  कश्मीर  हमारा छोड़  दो “
(O! Merciless, O! Kafirs leave our Kashmir)

2-“कश्मीर  में अगर  रहना  होगा  ,  अल्लाहो अकबर  कहना  होगा “
(Any one wanting to live in Kashmir will have to convert to Islam)

3-“ला शरकिया ला  गरबिया  इस्लामिया  इस्लामिया  “
From East to West, there will be only Islam

4-“मुसलमानो  जागो  , काफिरो भागो “
 (O! Muslims, Arise, O! Kafirs, scoot)

5-“इस्लाम  हमारा  मकसद  है ,कुरान  हमारा  दस्तूर  है ,जिहाद हमारा  रास्ता  है  “

(Islam is our objective, Q’uran is our constitution, Jehad is our way of our life)

6-“कश्मीर बनेगा  पाकिस्तान “

(Kashmir will become Pakistan)

7-“पाकिस्तान  से क्या रिश्ता  , ला इलाहा  इल्लल्लाह “

(Islam defines our relationship with Pakistan)

8-“दिल  में रखो अल्लाह का खौफ ,हाथ  में रखो क्लाशनीकॉफ “

(With fear of Allah ruling your hearts, wield a Kalashnikov)

9-“यहाँ क्या चलेगा , निजामे  मुस्तफा “

(We want to be ruled under Shari’ah)

10-” पीपुलस् लीग  का  क्या पैगाम  ,फ़तेह  , आजादी  और इस्लाम “

(“What is the message of People’s League? Victory, Freedom and Islam.”)

निष्कर्ष
इस प्रकार के कई धमकी वाले नारे कश्मीर के अलगाववादी  संगठन “ हिज्बुल मुजाहिदीन -Hijb-ulMujahidin  ”  ने कश्मीर के उर्दू दैनिक समाचार”आफताब -Aftab “  में दिनांक  1 अप्रैल  1990 को प्रकाशित किये या करवाये थे जिनमें स्थानीय कश्मीर प्रशासन की सम्मिलित भूमिका ना रही हो विश्वास करना कठिन है,  साथ ही यही नारे जगह जगह कश्मीर के सभी शहरों में दीवार पर पोस्टर के रूप में भी चिपका दिए गये थे और इसका उद्देश्य सिर्फ कश्मीर के हिन्दुओं और गैरमुसलमानों को भयभीत करके उनसे कश्मीर खाली कराने का ,उन्हे निर्वासित करने का था ! बड़े ही अफसोस की बात है कि एक तरफ जब कांग्रेस व सेक्यूलरों की सरकारें मुसलमानों के अवैध, असंवैधानिक तुष्टिकरण में ही लगी हुई थी उसी समय कश्मीर के मुसलमान अपनी वीभत्स कृतघ्नता प्रकट कर रहे थे और सभी सेक्यूलर वोट व दल यह नजारा तब से अब तक चुपचाप देख रहे हैं किसी ने इसका विरोध करने की हिम्मतें तब भी नहीं  दिखाई और ना ही अब तक….क्योंकि सबके मुंह में सेक्यूलरिज्म का टुकडैल ताला लगा हुआ है ।

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सब जानते हैं कि मुस्लिम स्कूलों यानी मदरसों में शिक्षा के नाम पर कुरान, हदीस और इस्लामी कानून और जीवन पद्धति ही पढ़ाया जाता है जिसमें न तो कोई स्वीपर या चपरासी तक की सरकारी नौकरी मिल सके सी योग्यता ही है और ना ही कोई रोजगार ही मिल सकता है,,, अकसर मदरसे से पढ़े हुए ये बच्चे आगे चलकर सिर्फ मुल्ला ,मौलवी और मुअज्जिन ही बन जाते  हैं या किसी दल में घुस कर नेतानुमा बन जाते हैं पर लायक तो बन ही नहीं पाते …!!
इस्लामी तालीम के कारण जब कहीं नौकरी नहीं मिलती तो यही अधिकांश सरकारी खैरात पर पलते ये मुस्लिम युवा सिर्फ जिहादी और अपराधी, आतंकी ही बनते हैं….फिर भी जब लालू प्रसाद रेल मंत्री बना तो 7 जुलाई  2008 को उसने मदरसे की उलजूलूल इस्लामी शिक्षा को सरकारी नौकरी के लिए भी मान्य कर दिया यही नहीं जो खैरात पर पलते मुसलमान बिलकुल ही निरक्षर थे उन्हें भी कुली के रूप में नियुक्त करके नियमित रेल कर्मचारी का दर्जा भी दे दिया जबकि गैर मुस्लिम युवकों को तो रेलवे में नौकरी प्राप्त करने के लिए कई प्रकार के आधुनिक शिक्षा के ही डिग्री कोर्स तक करना पड़ते हैं ,,,यही नहीं केंद्रीय सरकार ने तो मुस्लिम छात्र छात्राओं के लिए एक विशेष छात्रवृत्ति योजना भी चालू कर दी , जिसके मुताबिक जिस मुस्लिम परिवार की आमदनी एक लाख प्रति वर्ष से कम होगी उनके बच्चों को दस हजार रूपया प्रति वर्ष छात्रवृत्ति मिलेगी…!!

हमारी काँग्रेस व सेक्यूलरों की सरकारें हिन्दुओं के साथ हिंदुस्तान में ही कुत्सित भेदभाव करती है इसका स्पष्ट उदहारण इस बात से सामने है कि जब कोई हिन्दू उच्च शिक्षा के लिए कर्ज लेता है तो उस से  12 -14 %  प्रति वर्ष की दर से ब्याज लिया जाता है लेकिन खैरात पर पलते नकली अल्पसंख्यक जिहादी छात्र से राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास और वित्त निगम केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत ऋण पर मात्र  3% ब्याज लेता है।
इसी तरह स्व-रोजगार के लिए वाणिज्यिक उद्यम में एक हिंदू युवा 15-18% ब्याज पर वाणिज्यिक बैंकों से ऋण प्राप्त करने के लिए हकदार है और वे ‘अपनी जेब’ से परियोजना लागत के लिए 15-40% की ‘मार्जिन मनी’ का उत्पादन करने के लिए है बाकी बैंक से आता है लेकिन अल्पसंख्यक युवाओं से उनकी जेब के  ‘मार्जिन मनी के रूप में’ में केवल 5% डाल दिया है; अन्य 35% राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम द्वारा केवल 3% ब्याज पर प्रदान किया जाता है जबकि एक निष्पक्ष धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक प्रणाली में, किसी भी सरकारी सहायता और अनुदान केवल आर्थिक स्थिति और योग्यता के आधार पर पूरी तरह आधारित वितरित किया जा सकता अर्थात भारत सरकार संविधान की धारा 15(1) का स्पष्ट उल्लंघन कर रही है जिसमे कहा गया है कि –
“राज्य किसी भी नागरिक से केवल धर्म, जाति, जाति, सेक्स, जन्म स्थान या इनमें से किसी के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा”

कहने का तात्पर्य यही है कि हिन्दी में कहावत   प्रसिद्ध है कि कमजोर व्यक्ति या समुदाय को हर कोई दबा ही लेता है यानी कमजोर व्यक्ति या धर्म समाज को दूसरों के सामने झुकना ही पड़ता है वर्तमान के हम हिंदुओं की ही तरह ! 

कहावत है ना “मौन सम्मति लक्षणम ”  यानि   भारत के सभी सेक्यूलर वोट और मुसलमान नेता यही चाहते हैं कि कश्मीर सहित पूरा भारतदेश सिर्फ पूर्ण शरीयत लागू इस्लामी देश ही बन जाये …!!

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इन तथ्यों से तो यही प्राथमिक निष्कर्ष निकलता है कि सांप को कितना भी प्रेम से दूध पिलाया जाये  पर वह हमेशा विष ही उगलते हुए दूध पिलाने वालों को डसेगा मुसलमानों की ही तरह !!

अत: मुसलमानों ने पाकिस्तान और बंगलादेश के संवैधानिक रूप में सन 1947 में ही अपने सारे अधिकार ले लिये  थे और अब द्विराष्ट्रवाद सिद्धांत के तहत धार्मिक रूप से विभाजित हिंदू बहुसंख्यक भारत में केवल मुस्लिम ‘अल्पसंख्यक’ होने या हिंदूधर्म के अनुसार जातिगत आधार पर दलित या पिछडे मुसलमानों को कोई अधिकार देने का कोई विशेष औचित्य ही नही है और ना ही कोई संवैधानिक आधार ही है।

याद रखिये ये मुफतखोर मुसलमान अल्पसंख्या के आधार पर तब तक विशेष से अधिकार मांगते  रहेंगे जब तक उनकी संख्या हिन्दुओं से आधी तक बनी रहेगी और जिस दिन हमारी जकात (खैरात) पर पलते इन खैराती मुसलमानों की संख्या हिन्दुओं की संख्या से आधी से अधिक हो जाएगी यह सारा सेक्यूलरिज्म,  भाईचारा,  सौहार्द और गंगा-जमुनी संस्कृति भूलकर हमारे भारत को इस्लामी देश बना देंगे और हिन्दुओं से ‘विशेष’ अधिकार मांगने की जगह हम हिन्दुओं के मूलभूत व संवैधानिक अधिकार तक छीन लेंगे …..!!

“भारतीय” मुसलमानों के लिये विशेष अधिकारों की मांग करने वाले देशद्रोही और जनद्रोही सेक्यूलर नेता और राजनैतिक दल याद रखें कि इन खैरात पसंद मुसलमानों ने पाकिस्तान और बंगलादेश के संवैधानिक रूप में सन 1947 में ही अपने सारे अधिकार ले लिये थे और अब द्विराष्ट्रवाद सिद्धांत के तहत धार्मिक रूप से विभाजित हिंदू बहुसंख्यक भारत में इनको मतदान करने और निर्वाचित होने तक के रूप में अधिकतम अधिकार दिये जा चुके अब किसी अन्य अधिकार या सुविधा दिये जाने की कोई गुंजाइश बची ही नहीं है।

हिंदू हिंदुत्व हिंदुस्तान
यही है हमारी पहचान
वन्दे मातरम्

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  1. sudhirvyas says:

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    सदैव शुभैच्छु
    मंगलकामनाएँ
    वन्दे मातरम्

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