आधासीसी का दर्द ⇄ माईग्रेन (Migraine)


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माइग्रेन एक जटिल विकार है जिसमें बार-बार मध्यम से गंभीर सिरदर्द होता है और अक्सर इसके साथ कई स्वैच्छिक तंत्रिका तंत्र से संबंधित लक्षण भी होते हैं। यह शब्द ग्रीक  ἡμικρανία (हेमीक्रेनिया), “सिर के एक हिस्से में दर्द” से उत्पन्न है।

आमतौर पर सिरदर्द एक हिस्से को प्रभावित करता है और इसकी प्रकृति धुकधुकी जैसी होती है जो 2 से लेकर 72 घंटों तक बना रहता है। संबंधित लक्षणों में मितली, उल्टी ,फोटोफोबिया (प्रकाश के प्रति अतिरिक्त संवेदनशीलता),फोनोफोबिया (ध्वनि के प्रति अतिरिक्त संवेदनशीलता) शामिल हैं और दर्द सामान्य तौर पर शारीरिक गतिविधियों से बढ़ता है।

माइग्रेन सिरदर्द से पीड़ित एक तिहाई लोगों को ऑरा के माध्यम इसका पूर्वाभास हो जाता है, जो कि क्षणिक दृष्य, संवेदन, भाषा या मोटर (गति पैदा करने वाली नसें) अवरोध होता है और यह संकेत देता है कि शीघ्र ही सिरदर्द होने वाला है।

माना जाता है कि माइग्रेन पर्यावरणीय और आनुवांशिकीय कारकों के मिश्रण से होते हैं। लगभग दो तिहाई मामले पारिवारिक ही होते हैं। अस्थिर हार्मोन स्तर भी एक भूमिका निभा सकते हैं: माइग्रेन य़ौवन पूर्व की उम्र वाली लड़कियों को लड़कों की अपेक्षा थोड़ा अधिक प्रभावित करता है लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाओं को दो से तीन गुना अधिक प्रभावित करता है।
आम तौर पर गर्भावस्था के दौरान माइग्रेन की प्रवृत्ति कम होती है।
माइग्रेन की सटीक क्रियाविधि की जानकारी नहीं है। हलांकि इसको न्यूरोवेस्कुलर विकार माना जाता है। प्राथमिक सिद्धांत सेरेब्रल कॉर्टेक्स (प्रमस्तिष्कीय आवरण) की बढ़ी हुयी उत्तेजना तथा ब्रेनस्टेम (रीढ़ के पास का मस्तिष्क का हिस्सा) के ट्राइगेमिनल न्यूक्लियस (त्रिपृष्ठी नाभिक) में न्यूरॉन्स दर्द के असमान्य नियंत्रण से संबंधित है।

आरंभिक अनुशंसित प्रबंधन में, सिरदर्द के लिये सामान्य दर्दनाशक दवाएं जैसे आइब्युप्रोफेन  और एसीटोमीनोफेन, मितली और शुरुआती समस्याओं के लिये मितलीरोधी दवायें  जैसे मेटाक्लोप्रामाईड दी जाती हैं।
जहां पर सामान्य दर्दनाशक दवायें प्रभावी नहीं होती हैं वहां पर विशिष्ट एजेन्ट जैसे  ट्रिप्टन्स  या एरगोटामाइन्स का उपयोग किया जा सकता है।

चिह्न तथा लक्षण

माइग्रेन आमतौर पर सीमित, बार-बार गंभीर सिरदर्द के साथ होता है जिसके साथ स्वैच्छिक लक्षण होते हैं। माइग्रेन से पीड़ित लगभग 15-30% लोगों कोऑरा के साथ माइग्रेन का अनुभव होता है और जिन लोगों को ऑरा के साथ माइग्रेन होता है उनको अक्सर बिना ऑरा के भी माइग्रेन होता है। दर्द की तीव्रता, सिर दर्द की अवधि और दर्द होने की आवृत्ति हर एक में भिन्न-भिन्न होती है। 
72 घंटे से अधिक चलने वाले माइग्रेन को “स्टेटस माइग्रेनॉसस” के नाम से जाना जाता है। माइग्रेन के लिये चार संभावित चरण होते हैं, हलांकि सभी चरणों का अनुभव होना आवश्यक नहीं है:

पूर्व लक्षण, वे लक्षण जो सिरदर्द के कुछ घंटों या दिनों पहले ही महसूस होते हैंऑरा, जो सिरदर्द के तुरंत पहले महसूस होते हैं दर्द चरण, जिसे सिरदर्द चरण भी कहते हैं ,, पोस्टड्रोम, वे प्रभाव जो माइग्रेन आक्रमण की समाप्ति पर अनुभव किये जाते हैं

पूर्व लाक्षणिक (प्रोड्रोम) चरण

पूर्व लाक्षणिक या पूर्व लक्षण माइग्रेन पीड़ित ~60% लोगों में होते हैं। जो ऑरा या दर्द की शुरुआत से दो घंटो से दो दिनों पहले होता है। इन लक्षणों में व्यापक विविधता वाली घटनायें हो सकती हैं , जिनमें: मूड का बदलाव, चिड़चिड़ापन, अवसाद या परम आनंद, थकान, कुछ विशेष खाने की इच्छा, मांसपेशीय जकड़न (विशेष रूप से गर्दन में), कब्ज़ या दस्त, गंध या शोर के प्रति संवेदनशीलता शामिल है, यह ऑरा के साथ या ऑरा के बिना माइग्रेन वाले लोगों में हो सकता है।

ऑरा चरण

ऑरा एक क्षणिक केन्द्रीय तंत्रिका संबंधी घटना है जो सिरदर्द से पहले या उसके दौरान होता है। वे कई मिनटों के दौरान धीरे-धीरे दिखते हैं और 60 मिनटों तक बने रहते हैं।लक्षण दृष्टि, संवेदी या मोटर प्रकृति के हो सकते है और बहुत से लोगों में एक से अधिक हो सकते हैं।दृष्टि संबंधी प्रभाव सबसे आम हैं, जो 99% मामलों में होते हैं और आधे से अधिक मामलों में विशिष्ट रूप से होते हैं। दृष्टि बाधाओं में अक्सर
सिंटिलेटिंग  स्कोटोमा शामिल होते हैं (दृष्टि क्षेत्र में आंशिक परिवर्तन जो फड़कता है ) ये आम तौर पर दृष्टि के केन्द्र के पास से शुरु होते हैं और फिर टेढ़ी-मेढ़ी रेखाओं में किनारों की ओर फैलते हैं जो किले की दीवारों या किले के समान लगती हैं।आमतौर पर रेखायें काली व सफेद होती है लेकिन कुछ लोगों को रंगीन रेखायें भी दिखती हैं। कुछ लोग अपनी दृष्टि के क्षेत्र के कुछ भाग को खो देते है जिसे अर्धान्धता कहते हैं जबकि दूसरों को धुंधला दिखता है।

संवेदी ऑरा दूसरी सबसे आम घटना है जो ऑरा वाले 30-40% लोगों में होती है, अक्सर हाथ व बाजू के एक ओर पिन व सुई चुभने का एहसास होता है जो कि उसी ओर के नाक और मुंह के क्षेत्र तक फैल जाता है, अंग सुन्न होने का एहसास आमतौर पर झुनझुनी होती है जिसके साथस्थिति संवेदना की हानि हो जाती है। ऑरा चरण के अन्य लक्षणों में बोलने व भाषा संबंधी बाधायें,दुनिया घूमती दिखना और कम आम मोटर समस्यायें शामिल हैं।

मोटर लक्षण यह संकेत देते हैं कि यह एक आधे सिर का माइग्रेन है और दूसरे ऑरा लक्षणों के विपरीत कमजोरी एक से अधिक घंटे तक बनी रहती है बाद में होने वाले सिरदर्द के बिना ऑरा का होना बेहद कम बार संभव है, जिसको मौन माइग्रेन कहते हैं।

दर्द का चरण

पारंपरिक रूप से सिरदर्द एकतरफा, चुभने वाला और मध्यम से गंभीर तीव्रता वाला होता है , आमतौर पर यह धीरे-धीरे आता है , और शारीरिक गतिविधि के साथ बढ़ता है , 40% से अधिक मामलो में दर्द दोतरफा हो सकता है और गर्दन में दर्द भी आमतौर पर हो सकता है। जिन लोगों को बिना ऑरा के माइग्रेन होता है उनमें दोतरफा सिरदर्द काफी आम है,,  कम आमतौर पर शुरुआत में दर्द, सिर के ऊपर या पीठ में हो सकता है ,  वयस्कों में आमतौर पर दर्द 4 से 72 घंटों तक बना रहता है , हालांकि युवा बच्चों में यह 1 घंटे तक बना रहता है, दर्द होने की आवृत्ति भिन्न-भिन्न होती है, जो पूरे जीवन में कुछ एक बार से लेकर एक सप्ताह में कई बार तक हो सकता है, जिसका औसत एक महीने में एक बार तक हो सकता है।
आम तौर पर दर्द के साथ मितली, उल्टी, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता ,  गंध के प्रति संवेदनशीलता , थकान तथा चिड़िचड़ापन शामिल होता है। आधारी माइग्रेन में ,  ब्रेन स्टेम से संबंधित तंत्रिका संबंधी लक्षणों या शरीर के दोनो भागों में तंत्रिका संबंधी लक्षणों के साथ आम प्रभावों में दुनिया के घूमने का एहसास, सिर में हल्कापन महसूस होना और भ्रम शामिल है।  मितली 90% पीड़ित लोगों को होती है और उल्टी लगभग एक तिहाई लोगों को होती है।  इसी कारण बहुत से लोग एक शांत कमरे की तलाश करते हैं। अन्य लक्षणों में धुंझला दिखना, नाक बंद होना, दस्त, बार-बार पेशाब करने जाना,पीलापन या पसीना आना शामिल है,  खोपड़ी में सूजन या कोमलता के एहसास के साथ गर्दन में जकड़न भी हो सकती है। संबंधित लक्षण बुजुर्गों में कम आम हैं।

पोस्टड्रोम

माइग्रेन का प्रभाव मुख्य सिरदर्द समाप्त के बाद कुछ दिनों तक रहता है; इसे माइग्रेन पोस्टड्रोम कहा जाता है। अनेक लोग माइग्रेन वाले हिस्‍से में पीड़ा होने का अनुभव करते हैं और कुछ लोगों को सिरदर्द समाप्‍त होने के बाद कुछ दिनों तक बाधित विचार क्षमता की शिकायत होती है। रोगी को थकान या ‘‘खुमारी’’ का एहसास हो सकता है तथा उसे सिर में दर्द, संज्ञानात्‍मक कठिनाइयां, पेट खराब होने के लक्षण, मूड में बदलाव और कमजोरी महसूस हो सकती है। 
एक सारांश के अनुसार, “कुछ लोगों को दर्द होने के बाद असामान्य रूप से तरोताजा महसूस करते हैं या उनको खुशी का एहसास होता है, जबकि कुछ लोगों को अवसाद तथा दुख हो सकता है।”

कारण

अर्धकपारी (आधे सिर का दर्द) का अंतर्निहित कारण अज्ञात है लेकिन उनको वातावरण और आनुवांशिक कारकों के मिश्रण से संबंधित माना जाता है।इनके दो – तिहाई मामले परिवारों के भीतर ही होते हैं और शायद ही कभी एकल जीन दोष के कारण होते हैं। कई तरह की psychological stages इससे संबंधित हैं जिनमें शामिल हैं: depression / अवसाद , चिंता और Bipolar Disorder / द्विध्रुवी विकार साथ ही कई जैविक घटनाएं या ट्रिगर्स / कारक भी हैं।

आनुवांशिकी

जुड़वा बच्चों के अध्ययन संकेत करते हैं कि माइग्रेन सिर दर्द को विकसित होने में 34 से 51% संभावना आनुवंशिक प्रभाव के कारण होती है। ऑरा के साथ होने वाले माइग्रेन के लिये यह आनुवंशिक संबंध ऑरा के साथ नहीं होने वाले माइग्रेन की तुलना में अधिक मजबूत है।जीन के विशिष्ट वेरिएंट की संख्या जोखिम की एक छोटी मात्रा से लेकर से मध्यम मात्रा को बढ़ाती है।

माइग्रेन पैदा करने वाले एकल जीन विकार दुर्लभ हैं।इनमें से एक पारिवारिक हेमीप्लेजिक माइग्रेन कहा जाता है जो कि ऑरा के साथ होने वाले माइग्रेन का एक प्रकार है जो एक ऑटोसोमल प्रमुखता की तरह विरासत में मिलता है। विकार, आयन परिवहन में शामिल प्रोटीन के लिये जीन कोडिंग के भिन्नरूपों से संबंधित हैं। सबकॉर्टिकल दौरे तथा ल्यूको एन्सेफेलोपैथी के साथ CADASIL सिन्ड्रोम या मस्तिष्क ऑटोसोमल प्रमुखता धमनीविकृति, आनुवंशिक माइग्रेन का एक और कारण है।

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ट्रिगर/ कारक

माइग्रेन ट्रिगर द्वारा प्रेरित किया जा सकता है, कुछ लोग इसे थोड़े मामलों में तो कुछ लोग अधिक मामलों में इसे एक प्रेरक के रूप में बताते हैं। कई चीज़ों को ट्रिगर के रूप में चिह्नित किया गया है, लेकिन इन संबंधों की शक्ति और महत्व अनिश्चित हैं। ट्रिगर, लक्षणों की शुरुआत से 24 घंटे पहले हो सकता है।

शारीरिक पहलू

आम तौर पर बताये जाने वाले ट्रिगर तनाव, भूख और थकान हैं (इन समान रूप से तनाव सिरदर्द में योगदान करते हैं) , माइग्रेन की माहवारी के आसपास घटित होने की संभावना अधिक होती हैं। रजोदर्शन, मौखिक गर्भनिरोधक का उपयोग , गर्भावस्था , रजोनिवृत्ति के पास का समय और रजोनिवृत्ति जैसे अन्य हार्मोन प्रभाव भी भूमिका निभाते हैं। ये हार्मोन प्रभाव ऑरा के बिना माइग्रेन में एक बड़ी भूमिका निभाते लगते हैं। माइग्रेन आम तौर पर रजोनिवृत्ति के बाद या दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान नहीं होता है।

आहार पहलू

आहार संबंधी ट्रिगर की समीक्षाओं से पता चलता है कि साक्ष्य अधिकतर व्यक्तिपरक आकलनों पर निर्भर करता है और इसे इतना सक्षम नहीं पाया जाता कि किसी विशेष ट्रिगर को सत्य या असत्य सिद्ध कर सके। विशिष्ट एजेंटों के बारे में, माइग्रेन पर टाइरामाइन के प्रभाव के लिये साक्ष्य नहीं दिखता है और जबकि मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG/ अजीनोमोटो ) को अक्सर एक आहार ट्रिगर के रूप में रिपोर्ट किया जाता है साक्ष्य दृढ़ता के साथ इस का समर्थन नहीं करता है।

पर्यावरणीय पहलू

इनडोर और आउटडोर वातावरण में संभावित ट्रिगर में समग्र साक्ष्य काफी खराब गुणवत्ता के थे, लेकिन फिर भी ये माइग्रेन से पीड़ित लोगों को वायु गुणवत्ता और प्रकाश व्यवस्था से संबंधित कुछ बचाव उपाय लेने का सुझाव देते हैं। जबकि पहले यह विश्वास किया जाता था यह उच्च बुद्धिमत्ता वाले लोगों काफी आम होता है लेकिन ऐसा सही नहीं दिखता है।

रोग के कारण पैदा हुए क्रियात्मक परिवर्तन :

माइग्रेन को एक न्यूरोवेस्कुलर (स्नायु तथा संवहनी) विकार माना जाता है साक्ष्य इस बात का समर्थन करते हैं कि यह मस्तिष्क के भीतर शुरू होता है और फिर रक्त वाहिकाओं तक फैलता है। कुछ शोधकर्ताओं को लगता है कि न्यूरॉन तंत्र एक बड़ी भूमिका निभाते हैं, जबकि दूसरों को लगता है कि रक्त वाहिकायें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कुछ अन्य को लगता है कि दोनों ही संभवतः महत्वपूर्ण हैं , न्यूरोट्रांसमिटर सेरोटॉनिन के उच्च स्तर, जिनको 5 हाइड्रॉक्सीट्राइप्टामाइन भी कहा जाता है, शामिल माने जाते हैं।

ऑरा

निष्क्रियता की अवधि के बाद लिओ का अवसाद प्रसार या वल्कुटीय प्रसार अवसाद न्यूरॉन संबंधी गतिविधि का प्रस्फुटन है, जो एक ऑरा के साथ माइग्रेन वाले लोगों में देखा जाता है। इसके होने के लिये बहुत सारे स्पष्टीकरण हैं जिनमें NMDA ग्राहियों का सक्रियण शामिल है जो कोशिका में कैल्शियम का प्रवेश कराता है। गतिविधि के प्रस्फुटन के बाद प्रभावित क्षेत्र में मस्तिष्क प्रांतस्था के लिये रक्त प्रवाह में दो से छः घंटे के लिये कमी हो जाती है। यह माना जाता है कि जब विध्रुवण मस्तिष्क के नीचे की ओर यात्रा करता है तो वे नसें जो सिर और गर्दन में दर्द महसूस करती हैं वे ट्रिगर कर दी जाती हैं।

दर्द

माइग्रेन के दौरान, सिर दर्द की सटीक यंत्र रचना अज्ञात है। कुछ साक्ष्य केंद्रीय तंत्रिका तंत्र / central nervous system की संरचनाओं (जैसे ब्रेनस्टेम और डाएन्सेफालोन) के लिये प्राथमिक भूमिका का समर्थन करते हैं , जबकि अन्य डेटा परिधीय सक्रियण (जैसे संवेदी तंत्रिका जो कि सिर और गर्दन की रक्त वाहिकाओं के चारों ओर होती है ) का समर्थन करते हैं , संभावित उम्मीदवार वाहिकाओं में ड्यूरल धमनियों, पिएल धमनियों और एक्स्ट्राक्रैनिएल धमनियां जैसी कि खोपड़ी में होती हैं, शामिल हैं। विशेष रूप से, एक्स्ट्राक्रैनिएल धमनियों की वैसोडाएलाटेशन की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।

रोग-निदान

माइग्रेन का निदान चिह्नों और लक्षणों पर आधारित है, सिर दर्द के अन्य कारणों को पता करने के लिये कभी-कभी इमेजिंग परीक्षण किया जाता है। यह माना जाता है कि इस स्थिति वाले लोगों की एक पर्याप्त संख्या का निदान नहीं किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय सिरदर्द सोसायटी के अनुसार, ऑरा के बिना माइग्रेन का निदान, निम्नलिखित “5, 4, 3, 2, 1 मापदंड” के अनुसार किया जा सकता है:

पांच या अधिक दौरे – ऑरा के साथ माइग्रेन के निदान के लिये, दो दौरे पर्याप्त हैं।अवधि में चार घंटे से तीन दिन तकनिम्न में से दो या अधिक:एकतरफा (आधा सिर प्रभावित);धड़कता हुआ;”दर्द की मध्यम या गंभीर तीव्रता”;”नियमित शारीरिक गतिविधि द्वारा उत्तेजना या परिहार के कारण”निम्न में से एक या अधिक:मतली और/या उल्टी;प्रकाश (फोटोफोबिया) और ध्वनि (फोनोफोबिया) दोनों के प्रति संवेदनशीलता

यदि किसी को निम्न में से दो का एक या अधिक दिन तक अनुभव हो: फोटोफोबिया, मतली, या काम करने या पढ़ने में अक्षमता, तो निदान होने की संभावना है।
वे लोग जिनको निम्न पाँच में से चार के अनुभव हों: धड़कता हुआ सिरदर्द, 4-72 घंटे की अवधि, सिर के एक तरफ दर्द, मतली या ऐसे लक्षण जो व्यक्ति के जीवन में आक्षेप करे तो माइग्रेन की संभावना 92% होती है। इन लक्षणों में से कम से कम तीन के मिलने पर, लोगों में संभावना 17% होती है।

वर्गीकरण

माइग्रेन को सबसे पहले, 1988 में वर्गीकृत किया गया।अंतर्राष्ट्रीय सिरदर्द सोसायटी ने हाल ही में अपने 2004 के सिर दर्द के अपने वर्गीकरण को अपडेट किया है। इस वर्गीकरण के अनुसार दूसरों के अतिरिक्त, माइग्रेन प्राथमिक सिरदर्द के साथ तनाव प्रकार के सिरदर्द ( Tension Headaches) और क्लस्टर सिरदर्द  ( Cluster Headache ) हैं जिनके बारे में आगे की अन्य पोस्ट / लेखों में बतलाने की कोशिश करूँगा ।

माइग्रेन को सात उपवर्गों में बांटा गया है (जिनमें से कुछ में और उपवर्ग भी होते हैं):

ऑरा के बिना माइग्रेन या “आम माइग्रेन” में वे माइग्रेन सिरदर्द शामिल हैं जिनमें ऑरा का साथ नहीं होता है।ऑरा के साथ माइग्रेन या “क्लासिक माइग्रेन” में आम तौर पर माइग्रेन सिरदर्द के साथ ऑरा का साथ होता है। आम तौर पर ऐसा कम होता है कि सिर दर्द बिना ऑरा के हो या एक गैर माइग्रेन सिर दर्द के साथ हो। दो अन्य किस्मों में पारिवारिक हेमिप्लेजिक माइग्रेन और स्पोरैडिक हेमिप्लेजिक माइग्रेन शामिल हैं, जिसमें किसी व्यक्ति को ऑरा के साथ माइग्रेन होता है तथा साथ ही मांसपेशीय कमजोरी भी होती है। यदि एक करीबी रिश्तेदार को समान स्थिति होती है तो यह “पारिवारिक” कहा जाता है, अन्यथा यह “स्पोरैडिक” कहा जाता है। एक अन्य किस्म आधारिक प्रकार का माइग्रेन है, जहां सिरदर्द और ऑरा के साथ बोलने में कठिनाई आसपास की चीज़ें घूमती दिखना, कान में घंटी जैसा बजना या ब्रेनस्टेम से संबंधित अन्य कई लक्षण साथ दिखते हैं लेकिन मांसपेशीय कमजोरी नहीं होती है। यह प्रकार शुरूआती तौर पर आधारी धमनी, की ऐठन के कारण होना माना जाता था, वह धमनी जो कि ब्रेनस्टेम आपूर्ति करती है , बचपन के आवधिक सिंड्रोम जो आमतौर पर माइग्रेन के पूर्ववर्ती होते हैं जिनमें बारबार उल्टी होना (कभी-कभी तीव्र उल्टी की अवधियां), पेट का माइग्रेन (पेट में दर्द, आमतौर पर मतली के साथ) और बचपन के कंपकपी के साथ हल्के चक्कर (चक्कर के कभी-कभार होने वाले हमले) शामिल हैं। रेटिना माइग्रेन में माइग्रेन सिरदर्द शामिल होता है जिसके साथ दृश्य गड़बड़ी या एक आंख में भी अस्थायी अंधापन हो सकता है।माइग्रेन की जटिलताओं में माइग्रेन सिरदर्द और/या ऑरा शामिल होतें है जो कि असामान्य रूप से लंबे समय के लिये या बार-बार होते हैं या एक दौरे या मस्तिष्क के घाव के साथ जुड़े होते हैं।संभावित माइग्रेन की स्थिति वह होती है जिसमें माइग्रेन की कुछ विशेषताएं शामिल होती हैं, लेकिन जहां इसे निश्चितता के साथ एक माइग्रेन (समवर्ती दवा के अति प्रयोग के उपस्थिति में) के रूप में निदान करने के लिये पर्याप्त साक्ष्य नहीं होते हैं।पुराना माइग्रेन, माइग्रेन की जटिलता है और एक ऐसा सिरदर्द है जो कि माइग्रेन के सिरदर्द के लिये नैदानिक मानदंडों को पूरा करता है और अधिक समय के अंतराल के लिये होता है। विशेष रूप से, 3 महीने से अधिक समय के लिये, 15 दिन/महीने से अधिक या उतने ही समय के लिये।

पेट का माइग्रेन

पेट के माइग्रेन के निदान विवादास्पद हैं। 

कुछ साक्ष्य यह संकेत करते हैं कि सिर दर्द के अभाव में बार बार होने वाले पेट दर्द के प्रसंग, माइग्रेन का एक प्रकार हो सकते हैं या कम से कम सिरदर्द के पूर्ववर्ती हो सकता हैं। दर्द के ये प्रसंग माइग्रेन के प्रारंभिक या प्राथमिक लक्षण हो सकते है या नहीं भी हो सकते हैं और आम तौर पर कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों तक जारी रह सकते हैं। वे अक्सर या तो व्यक्तिगत या विशिष्ट रूप से माइग्रेन के पारिवारिक इतिहास वालों में होते हैं। अन्य लक्षण जिनको पूर्ववर्ती माना जाता है उनमें चक्रीय मितली सिंड्रोम और बचपन के कंपकपी के साथ हल्के चक्कर शामिल हैं।

विभेदक रोगनिदान

अन्य स्थितियां जो माइग्रेन सिरदर्द के इसी तरह के लक्षण पैदा कर सकती हैं उनमें कनपटी धमनीशोथ, गुच्छ सिरदर्द, तीव्र मोतियाबिंद, दिमागी बुखार और सबएराक्नॉएड रक्तस्राव शामिल है। कनपटी धमनीशोथ आम तौर पर 50 से अधिक वर्ष की उम्र के लोगों को होता है, जिसमें कनपटी कोमल पड़ जाती है, गुच्छ सिरदर्द में एक तरफ की नाक बंद हो जाती है, आँसू और आँख के कोटरों के आसपास गंभीर दर्द होता है, तीव्र मोतियाबिंद में दृष्टि संबंधी समस्यायें होती हैं, दिमागी बुखार, बुखार से जुड़ा है और सबएराक्नॉएड रक्तस्राव तेज शुरुआत से जुड़ा है। तनाव सिरदर्द / Tension Headache आम तौर पर दोनों ओर होते हैं, तेज़ नहीं होते हैं और कम अक्षम करने वाले होते हैं।

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रोकथाम

माइग्रेन की रोकथाम के उपचारों में दवायें, पोषक तत्वों की खुराक, जीवन शैली परिवर्तन और सर्जरी शामिल हैं। रोकथाम की सिफारिश उन लोगों के लिये की जाती है जिनको सप्ताह में दो दिन सिरदर्द होता है, जो गंभीर दौरों के उपचार के लिये दी जाने वाली दवाये सह नहीं पाते हैं या वे लोग जिनको ऐसे गंभीर दौरे पड़ते हैं जो आसानी से नियंत्रित नहीं होते हैं।

माइग्रेन की आवृत्ति, कष्ट और/या अवधि को कम करना और निष्फल करने की चिकित्सा की प्रभावशीलता को बढ़ाना लक्ष्य है। दवा के अतिप्रयोग से होने वाले सिरदर्द से बचना भी रोकथाम का एक कारण है। यह एक आम समस्या है और पुराने रोज़ होने वाले सिरदर्द में तब्दील हो सकती है।

दवा/उपचार

माइग्रेन की रोकथाम वाली दवायें तभी कारगर मानी जाती हैं यदि वे माइग्रेन हमलों की गंभीरता या आवृत्ति को कम से कम 50% तक कम कर दें।टोपिरामेट, डाइवेल्प्रोएक्स/सोडियम वैल्प्रोएट, प्रोप्रानोलॉल और मेटोप्रोलॉल को योग्य बताने में दिशा निर्देश काफी सतत हैं क्योंकि पहली पंक्ति के उपयोग के लिये साक्ष्य के उच्चतम स्तर इनके साथ हैं।लेकिन गाबापेंटिन के लिये अनुशंसाओं की प्रभावशीलता में काफी विविधता है। टिमेलॉल भी माइग्रेन की रोकथाम के लिये और माइग्रेन दौरे की आवृत्ति और गंभीरता को कम करने में प्रभावी है, जबकि फ्रोवैट्रिप्टैन मासिक धर्म संबंधी माइग्रेन की रोकथाम के लिये प्रभावी है। ऐमीट्रिप्टाइलीन और वेनलेफैक्साइन भी कुछ हद तक प्रभावी हैं।बोटॉक्स उन लोगों के लिये प्रभावी है जिनको पुराना माइग्रेन हो लेकिन प्रांसंगिक न हो।

वैकल्पिक चिकित्सा

Petasites (Butterbur) की जड़ का रस माइग्रेन की रोकथाम में प्रभावी पाया गया है।

Acupuncture  माइग्रेन के इलाज में प्रभावी है पर “सही” एक्यूपंक्चर का उपयोग नकली (sham) एक्यूपंक्चर की तुलना में बहुत कुशल नहीं है, लेकिन, दोनों “सही” और नकली एक्यूपंक्चर नियमित देखभाल की तुलना में अधिक प्रभावी दिखायी देते हैं, इसमें रोगनिरोधी दवा से उपचार की तुलना में कम प्रतिकूल प्रभाव होते हैं। माइग्रेन सिर दर्द की रोकथाम में किरोप्रैक्टिक हेरफेर, फिज़ियोथेरेपी , मालिश और विश्राम उतना ही प्रभावी हो सकता है जितना कि प्रोप्रानोलोल या टोपाइरामेट हो सकता है, हलांकि अनुसंधान में पद्धति के साथ कुछ समस्यायें थी।
मैग्नीशियम कोएंजाइम क्यू (10), राईबोफ्लेविन  विटामिन बी (12) और फीवर-फ्यू के माध्यम से लाभ के कुछ संभावित साक्ष्य हैं, हालांकि इन प्रारंभिक परिणामों की पुष्टि के लिये बेहतर गुणवत्ता वाले परीक्षण किये जाने चाहिये। वैकल्पिक दवाओं में से बटरबर (Butterbur) के साथ इसके उपयोग के सबसे अच्छे साक्ष्य हैं।

युक्तियां और सर्जरी

बायोफीडबैक और न्यूरोस्टिम्युलेटर जैसी चिकित्सीय युक्तियों की माइग्रेन रोकथाम में कुछ लाभ हैं, मुख्य रूप से जब आम माइग्रेन-विरोधी दवायें विपरीत संकेत देती हैं या दवाओं के अति प्रयोग के मामले में। बायोफीडबैक लोगों को कुछ शारीरिक मापदंडों के प्रति जागरूक करने में मदद करता है जिससे कि उनको नियंत्रित व सहज किया जा सके और माइग्रेन उपचार के लिये उनको कारगर किया जा सके। न्यूरोस्टिम्युलेशन में प्रत्यारोपण किये जा सकने योग्य न्यूरोस्टिम्यूलेटर उपयोग होता है जो जटिल पुराने माइग्रेन के उपचार के लिये पेसमेकर के समान काम करता है और गंभीर मामलों में उत्साहजनक परिणाम देता है।
माइग्रेन सर्जरी, जिसमें सिर और गर्दन के आसपास कुछ नसों का असंपीड़न / Decompression किया जाता है, उन लोगो के लिये एक विकल्प हो सकता है जिनमें दवाओं से सुधार नहीं हो रहा हो।

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उपचार

सभी रोगियों में माइग्रेन के पूर्व संकेत (ट्रिगर्स) एक से नहीं होते, इसलिए उनके लिए डायरी में अपनी अनुभूतियां दर्ज करना उपयोगी हो सकता है। इसके बाद दवा की सहायता से इन ट्रिगर्स से समय रहते बचकर, माइग्रेन को टाल भी सकते हैं।

कभी-कभार माइग्रेन का हल्का-फुल्का दर्द होने पर दैनिक काम प्रभावित नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे रोगी बिना किसी डाक्टरी राय के सीधे दवाई विक्रेता से मिलने वाले आम दर्दमारक दवाइयां ले सकते हैं, जैसे कि क्रोसीन या गैर-स्टैरॉयड जलन मिटाने वाली गोलियां डिस्प्रिन, ब्रूफेन और नैप्रा।भीषण दर्द होने पर दो प्रकार की दवाएं काफी प्रभावशाली होती हैं, जिन्हें इन रोगियों को सदा अपने साथ रखना चाहिए। पहली- जलन मिटाने वाली कैफीन रहित गोलियां नैप्रा-डी, नैक्सडॉम और मेफ्टल फोर्ट। और दूसरी ट्रिप्टान दवाएं- जैसे कि सुमिनेट टैब्लेट, नैसाल स्प्रे या इंजेक्शन, राइज़ैक्ट या फिर ज़ोमिग। पहले ट्रिप्टान दवाएं तब दी जाती थीं, जब माइग्रेन पर आम पेन किलर्स का कोई असर नहीं होता था। इसके बाद नए शोध से पता चला कि भीषण दर्द में सीधे ही ट्रिप्टान दवाओं का सहारा लेना अधिक कारगर होता है। ट्रिप्टान दवाएं दर्द शुरू होने से पहले, या मामूली दर्द शुरू हो जाने पर भी ली जा सकती हैं। इससे इनका असर बढ़ जाता है। ऐसा करके माइग्रेन के 80 प्रतिशत हमलों को दो घंटे में खत्म किया जा सकता है। इससे दवा का दुष्प्रभाव (साइड-इफैक्ट) भी कम हो जाता है और अगले 24 घंटों में माइग्रेन दर्द की संभावना भी नहीं रहती।

कुछ दवाएं ऐसी हैं, जिन्हें डॉक्टर की सलाह और मार्गदर्शन से ही लिया जा सकता है , इन्हें एर्गोटैमिन्स कहा जाता है। इस श्रेणी में एर्गोमार, वाइग्रेन, कैफरगोट, माइग्रेनल और डीएचई-45 आती हैं। ट्रिप्टान दवाओं की तरह ये भी अन्य धमनियों को तो खोलती हैं, लेकिन हृदय की धमनियों को कुछ ज्यादा ही खोल देती हैं, इसलिए कम सुरक्षित मानी जाती हैं। यहां खास ध्यान योग्य बात है कि कई बार सिरदर्द दूसरी खतरनाक और जानलेवा बीमारियों का भी संकेत होता है। इसलिए बार-बार होने वाले तेज सिरदर्द, गर्दन दर्द, अकड़न, जी मिचलाने या आंखों के आगे अंधेरा छा जाने को बिलकुल भी नजर अंदाज न करें और फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिये। माइग्रेन की दवाई अब प्रसिद्ध भारतीय औषदि कंपनी रैन्बैक्सी भी निकाल रही है।माइग्रेन में हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी भी लाभदायक होती है।

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चिकित्सकीय गूढतायुक्त शब्दों के अलावा भी माईग्रेन या आधासीसी के दर्द की व्याख्या बहुत संक्षिप्तता में की जा सकती है कि –

माईग्रेन क्या है?

क्या यह रोग है?

वह होता क्यूँ है?

माईग्रेन  सिरदर्द की ही एक  स्थिति है , सर में खून ले जाने वाली रक्त नलियां एक पोले पाइप के जैसी लचीली स्थिति स्थापक नलियां  होती है. उसमे जब किसी जगह कोई रूकावट आ जाती है ,तब खून उसमे से ठीक तरह से बह नहीं सकता है,और एक दबाव पैदा होने  लगता है , और वह खून की नलियां फूलने लगती है और उनमें दर्द पैदा होता है
जब उक्त स्थिति में यह दबाव  कम होता है तो यह दर्द भी कम होता है , और एक सीमा में रहता है  जबकि माईग्रेन में यही रुकावट ज्यादा होने के कारण फुलाव ज्यादा होता है और आस पास की नाड़ियों में भी दबाव बढ़ने लगता है , कपाल ,भोहैं , डोरे इत्यादि में भयानक दर्द असह्य हो जाता है , और सर के अन्य हिस्सों में भी यह स्थिति फैलने लगती है और यह रूकावट कभी कभी रक्तवाहिनी नलियों को फाड़ देने वाली स्थिति भी पैदा कर सकती है.

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माईग्रेन के लक्षण :-

1) असह्य सरदर्द.

2) आँखों के डोरे पर दबाव बढ़ने से दो-दो , तिन-तिन विजन का दिखना.

3) चक्कर या बेहोशी का आना. धुप या रौशनी सहन न होना तेज आवाज़ से सर दर्द करने लगना या दर्द बढ़ना.

4) किसी शारीरिक श्रम करने पर दर्द बढ़ जाना ,

5) दिन ढलने पर रात्रि  की ठंडक पाने पर उसमें कमी आजाना या मिट जाना क्योंकि खून का दबाव ठंडक पाकर कम हो जाता है.

6) माईग्रेन में एक सी दर्द की स्थिति भी बनी रह सकती है ,या कभी कम भी हो सकती है,चरम स्थिति में यह दोनों स्थितियां खतरनाक भी हो सकती है

खून की नलियों में रुकावट मूलतः कफ या अत्यधिक पीत या एसिडिटी, जो की खून की नलियों को सुजाकर अवरुद्ध करने पर भी हो सकती है, वायु प्रकोप या गेस्ट्रिक ट्रबल  होने पर यह तीव्रता घट बढ़ भी सकती है.

 माइग्रेन के निदान एवं उपाय :-

1) सर के पोकेट्स में का काफ निश्रुत कर दिया जाए  और प्रेशर घटा दिया जाए .

2) एसिडिटी या पित्त, उलटी  या दवा द्वारा निकाल दिया जाय .

3) पेट का रुका हुआ मल, जो की गैस पैदा करता है ,उसे मल-शुद्धि  द्वारा घटा दिया जाए.

4) इन सब के मूल में पाचन तंत्र की गडबड़ीयां  व् असमथता को पाचनतंत्र को ठीक करके सुधार दिया जाये ,जो की आयुर्वेदिक दवाइयां  व् परहेज  के एक व्यवस्थित  आयोजन से पूर्णतः एक निश्चित विधि  द्वारा किया जा सकता है ,पूरा पाचनतंत्र सुधारा जा सकता है , और रोग मुक्त हुआ जा सकता है…!

आशा करता हूँ कि सरल रूप में माईग्रेन की व्याख्या करता यह लेख आप सभी मित्रों हेतु उपयोगी साबित होगा , आप सब की प्रतिक्रिया व संदेशों का इंतजार रहेगा मित्रों ..!!

स्वस्थ रहें, प्रसन्नचित्त रहें, निरोगी काया ही सफलता की प्राथमिक सीढ़ी है।

वन्दे मातरम्

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