भारत के मारक प्रमुख सैन्य हथियार


KALI 5000, मिसाईल,  रॉकेट और विमान सुखोई SU 30 MKI समेत नये रूसी टैंक “आर्माता” T-15 का संक्षिप्त वर्णन :

KALI 5000 – इंडिया दैट इज भारत का अदृश्य तरंगों वाला ब्रह्मास्त्र 

Kilo- Ampere- Linear- Injector  यानि
India’s electron-accelerated pulse-power gigahertz microwave beam weapon ही KALI 5000 कहलाता है।

Indian atomic scientists have developed the country’s first ‘star wars’ weapon whose beams could cripple enemy missiles and aircraft. Bursts of microwaves for KALI packed with gigawatts of power could “soft kill” incoming enemy aircraft and missiles by crippling their electronics systems and computer chips. 

KALI 5000 – जो अवांछित हवाई जहाज और मिसाईल , रॉकेट समेत हर अवांछनीय वस्तु के इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिक सर्किट और चिपों को इलेक्ट्रॉन माईक्रोवेव तरंगों के शक्तिशाली झटके से से फेल कर हमारे देश व सीमाओं की रक्षा करेगा।

आने वाले समय में भारत सामरिक दृष्टि से सुपर पावर बन सकता है। सुनने में भले ही यह बात अजीब लगे लेकिन भारत गोपनीय तरीके से ‘काली 5000′ (किलो एंपीयर लीनियर इंजेक्टर) मिशन पर अनुसंधान में जुटा है। यह अनुसंधान पूरा हो जाने पर भारत की हवाई सुरक्षा अभेद हो जाएगी, काली 5000 मिशन 1985 में Director of the BARC डॉ. आर. चिदंबरम द्वारा प्रस्तुत किया गया था और 1989 में इस महत्वपूर्ण सामरिक योजना पर आधिकारिक तौर पर / मूर्तरूप से काम शुरू कर दिया गया,DRDO और भाभा परमाणु रिसर्च सेंटर भी इस सामरिक महत्व की स्टार वार्स सरीखी योजना का सहभागी है।

अब तक KALI 80, KALI 200, KALI 1000, KALI 5000 and KALI 10000 नामक परिष्कृत हो चुके वर्जन बनाये जा चुके हैं 

KALI-5000 को सेना में कमीशन मिला यानि सेना में 2004 में शामिल कर लिया गया है।

यह वह तकनीक है जिसके जरिए लेजर जैसी अदृश्य बीम को फायर करके अपनी तरफ आ रहे आक्रामक हथियार को नष्ट किया जा सकेगा। काली 5000 मिशन पूर्ण हो जाने पर दुश्मन की मिसाइल, विमान यहां तक तक कि अंतरिक्ष में उपग्रह को भी हवा में ही मार गिराया जा सकेगा। या यूं कहें कि परिंदा भी देश के आकाश से भारत की तरफ बिना उसकी इजाजत के आंख उठा कर नहीं देख सकेगा।

जानकारों की माने तो भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर में इस तकनीक को अन्य कार्यों में काम लेता रहा है। अब इसी तकनीक को और अधिक परिष्कृत करने का काम चल रहा है जिससे अंतरिक्ष में ही जासूसी , सैन्य व संचार के हर तरह के उपग्रहों तक को समाप्त कर सकें साथ ही दूर दुश्मन देश के विमान, संचार और रॉकेट मिसाईल तंत्र को भारत में बैठे बैठे ठप किया जा सके इसी सैन्य ताकत को बढ़ाने में इसके इस्तेमाल पर काम किया जा रहा है। डीआरडीओ भी इस मिशन में भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर के साथ मिलकर काम कर रहा है।

यह तो सर्वज्ञात है ही कि भारत के पास सामूहिक विनाश के हथियार के रूप में परमाणु अस्त्र हैं। पूर्व में भारत के पास रासायनिक शस्त्र भी थे।
यद्यपि भारत ने अपने नाभिकीय शस्त्रागार के आकार के बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है किन्तु ऐसा अनुमान है कि इसके पास 110-120 नाभिकीय शस्त्र हैं, हम मानसिक कमजोर नहीं हैं बस हम प्राथमिक आक्रमणकारी नहीं, साम्राज्यवादी नहीं यह हमारी एक कमजोरी भी है और बचाव का स्पष्ट साधन भी।

1.) भारतीय सेना को धार देने वाली एक अहम मिसाइल ‘निर्भय’ –

यह भारत की नवीनतम क्रूज मिसाइल है, जिसे डीआरडीओ ने बनाया है, निर्भय को आम मिसाइल की तरह ही लॉन्च किया जाता है, लेकिन एक निर्धारित ऊंचाई तक पहुंचने के बाद इसमें लगे विंग्स खुल जाते हैं और निर्भय एक विमान की तरह काम करने लगता है। निर्भय मिसाइल की खासियत है कि यह कम ऊंचाई पर उड़ सकता है, जिसकी वजह से यह दुश्मनों के राडार में नहीं दिखता। निर्भय को ग्राउंट स्टेशन से कंट्रोल किया जा सकता है। टारगेट तक पहुंचने के बाद ये उसके इर्द-गिर्द चक्कर लगा सकता है और सटीक मौके पर मार कर सकता है।निर्भय 1,000 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकता है। मिसाइल में ‘फायर एंड फोरगेट’ सिस्टम लगा है, जिसे जाम नहीं किया जा सकता। डीआरडीओ प्रमुख अविनाश चंद्र के मुताबिक निर्भय मिसाइल हवा, जमीन और पोतों से दागी जा सकेगी। इसके हवाई संस्करण की योजना पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि मिसाइल का हवाई संस्करण विकसित किया जा रहा है और इसे एसयू-30 एमकेआई जैसे लड़ाकू विमानों से दागा जा सकेगा।

2.) ब्रह्मोस मिसाईल –
28 अप्रैल 2002 को भारत ने ध्वनि की गति से भी तेज चलने वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का पहला परीक्षण किया था और इसे ब्रह्मोस का नाम दिया गया। भारत ने इसका निर्माण रूस के सहयोग से किया। दोनों देशों के बीच 1998 में ये ज्वाइंट वेंचर हुआ था। इस मिसाइल का भारत कई बार परीक्षण कर चुका है। ब्रह्मोस 290 किलोमीटर तक की मार करने की क्षमता रखती है और इसका वजन तीन टन है। ये जहाज, पनडुब्बी और हवा समेत कई प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है। ये मिसाइल ध्वनि की गति से 2.8 गुना ज्यादा गति से उड़ान भर सकती है। मार्च 2012 को हुए अभ्यास परीक्षण के बाद ब्रहमोस मिसाइल प्रणाली अब सेना की दो रेजीमेंट में पूरी तरह ऑपरेशनल हो गई है। यह अब तक दुनिया की सबसे तेज़ गति से चलने वाली क्रूज मिसाइल है और इसे इंटरसैप्ट करना, मार गिराना अब तक असंभव है और इसके उन्नत और अधिक दूरी तक मार करने वाले विभिन्न वैरियंट अब उपलब्ध हैं।

3.) सागरिका मिसाइल –
भारत के पास सागरिका नाम की ऐसी मिसाइल भी है जो समुद्र में से दागी जा सकती है और जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। सबमरीन लांच्ड बैलेस्टिक मिसाइल (एसएलबीएम) सागरिका को 2008 में विशाखापत्तनम के तटीय क्षेत्र से छोड़ा गया था। यह मिसाइल 700 किमी की दूरी तक मार कर सकती है। इस तरह की मिसाइलें चंद ही देशों के पास हैं। इसकी लंबाई 8.5 मीटर की है और 500 किलो तक बारूद ले जाने में सक्षम है। इस मिसाइल का निर्माण 1991 में शुरू हुआ और 2001 में तैयार हो गई। उसके बाद नौसेना को दे दी गई। 

4.) आकाश मिसाइल :
2003 में भारत ने जमीन से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल का परीक्षण किया। 700 किलोग्राम के वजन वाली ये मिसाइल 55 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकती है। इसकी गति 2.5 मैक है। आकाश मिसाइल एक साथ कई निशानों को एक साथ भेद सकती है और मानवरहित वाहन, युद्धक विमान और हेलीकॉप्टरों से दागी गई मिसाइलों को नष्ट कर सकती है। इस प्रणाली को भारतीय पेट्रीयट कहा जाता है। आकाश मिसाइल प्रणाली 2030 और उसके बाद तक भारतीय वायु सेना का अहम हिस्सा रहेगी। यह मिसाइल 18 हजार मीटर की ऊंचाई पर 30 किलोमीटर की दूरी पर उड़ते हुए लड़ाकू विमान को निशाना बना सकती है। इस में परमाणु सामग्री भी भरी जा सकती है। 

image

5.) प्रहार मिसाइल :
प्रहार जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है जिसका जुलाई 2011 में परीक्षण किया गया था। इसकी मारक क्षमता 150 किलोमीटर है। ये कई तरह के वारहेड ले जाने की क्षमता रखती है। इसकी लंबाई 7.3 मीटर, वजन 1280 किलोग्राम और व्यास 420 मिलीमीटर है। 200 किलोग्राम का पेलोड ले जाने की क्षमता रखने वाली इस मिसाइल का रिएक्शन टाइम काफी कम है यानी प्रतिक्रिया काफी जल्दी होती है। इसे डीआरडीओ ने दो साल से भी कम समय में विकसित किया है। ये मल्टी बैरल रॉकेट और मध्यम रेंज बैलेस्टिक मिसाइल के बीच की खाई को कम करती है। 

6.) धनुष मिसाइल :
धनुष मिसाइल को नौसेना के इस्तेमाल के लिए विकसित किया गया है और यह 350 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित लक्ष्य को भेद सकती है। ये पृथ्वी मिसाइल का नौसनिक संस्करण ही है। इसकी लंबाई दस मीटर और चौड़ाई एक मीटर है और यह भी 500 किलोग्राम तक के हथियार ढो सकती है। इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है और निर्माण भारत डाइनेमिक्स लिमिटिड ने किया है। 

7.) पृथ्वी मिसाइलें :
पृथ्‍वी-1 खासतौर से थल सेना के लिये बनाई गई है, जिसकी रेंज 150 किलोमीटर है। यह अपने साथ 1000 किलो बारूद ले जाने में सक्षम है। इसे जमीन से दागा जाता है। पृथ्‍वी-2 यह विशेष रूप से वायुसेना के लिये बनाई गई मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता 250 किमी तक है और इसमें 500 किलो बारूद भरा जा सकता है। इसे फाइटर प्‍लेन से दागा जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसमें किसी भी एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल को झांसा देकर निशाना साधने की क्षमता है। पृथ्‍वी-3 मिसाइल खास तौर से नौसेना के लिये बनायी गई है। किसी भी लड़ाकू जहाज से इस मिसाइल का प्रक्षेपण किया जा सकता है। इसकी रेंज 350 किलोमीटर है। पृथ्वी रेंज की मिसाइलें भारत ने स्वदेशी तकनीक से विकसित की है और इन्हें भारतीय सेना में इसे शामिल किया जा चुका है। 

8.) अग्नि मिसाइलें :

अग्नि-1 पर 1999 में काम शुरु हुआ था लेकिन इसका परीक्षण 2002 में किया गया। इसे कम मारक क्षमता वाली मिसाइल के तौर पर विकसित किया गया था। यह 700 किमी तक मार करने में सक्षम है। भारत ने परमाणु क्षमता संपन्न अग्नि -1 मिसाइल का दिसंबर 2011 में फिर से सफल परीक्षण किया। इससे पहले 25 नवंबर 2010 को अग्नि-1 मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया था। अग्नि- 1 को पहले ही भारतीय सेना में शामिल कर लिया गया है। जमीन से जमीन तक मार करने वाली अग्नि-2 मिसाइल का व्हीलर आईलैंड से मई 2010 में सफल परीक्षण किया। इससे पहले 2009 में दो बार परीक्षण असफल हो गया था। अग्नि-2 मिसाइल की मारक क्षमता दो हजार किलोमीटर है और ये एक टन तक का पेलोड ले जा सकती है। इसमें अति आधुनिक नेवीगेशन सिस्टम और तकनीक है। ये मिसाइल किसी बड़ी पेंसिल की जैसी लगती है। अग्नि-2 को भी भारतीय सेना में शामिल किया जा चुका है।
भारत ने परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता वाली मिसाइल अग्नि-3 का पहले 2006 में परीक्षण किया जिसे आंशिक रूप से ही सफल बताया गया था। इसकी मारक क्षमता 3500 किमी है। ये जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है। 2007 और 2008 में अग्नि-3 का सफल प्रक्षेपण किया गया। 3500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली ये मिसाइल 17 मीटर लंबी है और इसका व्यास दो मीटर है। ये 1.5 टन का पेलोड ले जा सकती है। इसमें अति आधुनिक कम्प्यूटर और नेवीगेशन सिस्टम है। उड़ीसा के व्हीलर द्वीप से करीब तीन हजार किमी से अधिक दूरी तक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल अग्नि-4 का सफल प्रक्षेपण नवंबर 2011 को किया गया था। इसमें कई तरह की नई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। ये इसी सीरिज की पहले की मिसाइलों से हल्की है। परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम लगभग एक हजार किलोग्राम के पेलोड क्षमता वाली अग्नि-4 बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-2 मिसाइल का ही उन्नत रूप है। पहली बार इसका प्रक्षेपण 2010 में दिसंबर में हुआ था लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से ये सफल नहीं हो पाया था। अप्रैल 2012 में अग्नि-5 का परीक्षण किया गया, जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। इसकी जद में पाकिस्तान ही नहीं पूरा चीन तक आ जाता है। इसकी रेंज 5500 किलोमीटर तक है, जिसे 7000 किलोमीटर तक भी बढ़ाया जा सकता है। इसे 2015 को भारतीय सेना को सौंप दिया जाएगा।

9.)  मोक्षित मिसाइल :
इस मिसाइल की तकनीक रूस से इंपोर्ट की गई है। इसकी रेंज 120 किलोमीटर है, जिसका इस्‍तेमाल सिर्फ नौसेना में किया जा सकता है।

10.)  सूर्या मिसाइल :
यह मिसाइल अभी तैयार नहीं है। इसका निर्माण 1994 से डीआरडीओ में चल रहा है। हालांकि भारत सरकार ने अभी तक अधिकारिक रूप से इस मिसाइल के बारे में एक भी खुलासा नहीं किया है। यह भारत की पहली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल होगी। इसकी क्षमता अग्नि से कहीं अधिक 5000 से 10000 किलोमीटर तक मार करने वाली होगी। सामने फोटो सूर्या मिसाइल की नहीं है, क्‍योंकि इस मिसाइल की अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

11.)  शौर्य मिसाइल :
यह कम दूरी तक मार करने वाली यह मिसाइल भारतीय थल सेना के लिये बनाई गई। इसमें 1000 किलोग्राम तक परमाणु सामग्री भरी जा सकती है। इसकी रेंज 600 किलोमीटर की है।

12.) पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट मिसाईल सिस्टम यानि पिनाका MK 2 :
मूलतः रूस द्वारा निर्मित ‘पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम’ के दूसरे प्रारूप पिनाका मार्क -2 मिसाइल मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की रेंज करीब 38 किलोमीटर की थी, डी.आर.डी.ओ ने इसके सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करते हुवें मारक क्षमता को 55 किलोमीटर दूरी तक तैयार की है।
पिनाका मार्क -2 के अपग्रेड वर्जन के ट्रायल हाल में पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में किए गए जो कि पूरी तरह सफल रहे हैं। पिनाका Mk2 ने अपने टार्गेट पर अचूक निशाने साधते हुवें उन्हें ध्वस्त किया। इस नये पिनाका मल्टीपर्पस रॉकेट लांचर के सॉफ्टवेयर में कई बदलाव कर उसे अपग्रेड किया गया हैं। पिनाका रॉकेट लॉन्चर सिस्टम पहले से ही सैन्य सर्विसेज में हैं। इन दिनों पिनाका को और अपग्रेड करने तथा इसकी मारक क्षमता की रेन्ज बढाने की प्रक्रिया चल रही हैं, और डी.आर.डी.ओं के वैज्ञानिकों की देखरेख में और ट्रायल किये जा रहे हैं। ये परीक्षण लगातार किये जाते रहेंगे,, नई पिनाका MK 2 ने 53 किलोमीटर तक की रेंज में सफलतापूर्वक टार्गेट हिट किया वैसे अभी पिनाका की मारक क्षमता की रेन्ज 38 कि.मी. तक ही थी तथा इससे अब 44 सैकिण्ड में 12 रॉकेट्स फायर किया जा सकता हैं। ये न केवल अचूक निशाने साधता हैं वरन इसके कई प्रकार का एम्युनेशन फायर भी किया जा सकता हैं, इसके रॉकेट को वार हैड दुश्मन पर कहर बन जाता हैं तथा टारगेट को ध्वस्त कर देता है। छह प्रक्षेपक और प्रत्येक से 12 रॉकेटों के वार से 3.9 वर्गकिलोमीटर के लक्षित इलाके को यह निष्प्रभावी कर ठोस संरचनाओं और बंकरों को तबाह कर सकता है त्वरित प्रतिक्रिया समय,अचूक निशाना और ज्यादा गोले दागने की क्षमता के कारण यह भारतीय सशस्त्र बल को कम सघन युद्ध जैसी स्थितियों में बढत दिलाता है,, 53-55 किलोमीटर तक की नई पिनाका विकसित होने के बाद उसके सफल परीक्षणों से सेना की ताकत और मजबूत हो गई। 

13.)  नाग मिसाईल :
नाग किस्म की मिसाइलें 4 किलोमीटर की दूरी पर मार कर सकती हैं। डिफेंस नाउ पोर्टल में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, इस परीक्षण के दौरान 4 किलोमीटर, 2 किलोमीटर और 500 मीटर की दूरी पर मिसाइलें दागने के अभ्यास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही साथ लक्ष्यों पर निशाना साधने की भारत के रक्षा अध्ययन संगठन (डी.आर.डी.ओ.) द्वारा विकसित ट्रैकिंग प्रणाली का भी परीक्षण किया जा रहा है। खड़े और चलते, दोनों प्रकार के टैंकों पर मिसाइलें दागने के अभ्यास किए जा रहे हैं।

14.)  K-15 मिसाईल :
यह पनडुब्बी तक परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम मध्यम दूरी की के-15 नामक बैलिस्टिक मिसाइल है तथा यह भारत द्वारा खुद तैयार की गई मिसाइल है जिसे पनडुब्बी से भी दागा जा सकता है,, के-15 मिसाइल ने परीक्षण के सभी मानकों को पूरा किया है, मध्यम दूरी की यह मिसाइल पंद्रह सौ किमी तक मार करने में सक्षम है वैसे मध्यम दूरी की मिसाइलें 600 किमी से 2000 किमी तक मार करने में सक्षम मानी जाती हैं।पनडुब्बी आधारित मिसाइल तकनीक में दक्षता हासिल करना भारत की एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इससे सेना की सटीक मारक क्षमता में नई तेज धार आ गई है।

15.)  सुखोई एसयू-30 एमकेआई :

सुखोई एसयू-30 एमकेआई यह विमान भारतीय वायुसेना का सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान है। यह विमान सीधे निशाने पर वार करता है। भारत ने रूस को 272 सुखोई विमानों का ऑर्डर दिया था, जिनमें से 2011 तक 146 विमान सेना के बेड़े में शामिल हो चुके थे। यह विमान टाईटेनियम धातु का बना होता है और इसमें पायलट रडार के माध्‍यम से पहले से लक्ष्‍य निर्धारित कर सकता है। 

Note  :   अब भारत रूस से दुनिया का सबसे उन्नत टैंक “आर्माता”  T- 15 खरीद सकता है और यह दुनिया का इकलौता टैंक है जिसमें चालक दल और युद्धक क्रू के लिये 3 सदस्यीय बख्तरबंद कैबिन अलग है और तोप व मशीनगन प्रणाली ऑटोमेटिक है यानि नई पीढ़ी के टैंक टी-15 अर्माता की मुख्य विशेषता उसका लेआउट है। टैंक के चालक दल के लिये एक सुरक्षित बख़्तरबंद कैप्सूल बनाया गया है,यह टैंक सक्रिय प्रतिरक्षा व्यवस्था से लैस है जो उसके निकट पहुंचनेवाले टैंक रोधी गोलों को स्वचालित ढंग से नष्ट कर देती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टैंक की नयी 125 मिमी व्यास वाली तोप अपनी संभावनाओं की दृष्टि से 120 मिमी व्यास की सर्वेश्रेष्ठ जर्मन तोप `राइन मेटल` से बेहतर है। कई विशेषज्ञों की राय है कि टी-15 को 152 मिमी व्यास की अधिक शक्तिशाली तोप से भी लैस किया जा सकता है।अतिरिक्त विशेष तत्वों के उपयोग से अर्माता का प्लेटफार्म ऐसे सैन्य वाहनों के निर्माण के लिये इस्तेमाल किया जा सकता है जो मानव की भागीदारी के बगैर काम कर सकेंगे।

रूस ऐसा एकमात्र देश है जिससे मिलकर भारत नई पीढी के कई तरह के नये हथियारों का निर्माण कर रहा है, जिनमें नई पीढ़ी (5 वीं पीढी) के सैनिक विमान FGFA (Future Generation Fighting Aircraft) और परिवहन विमान है। 

मेरा निजी विचार है कि भारत अपने नये टैंक के निर्माण हेतु संयुक्त उद्यम बनाने की संभावना में रुचि लेगा क्योंकि यह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सपने ‘मेक इन इंडिया’ (भारत में ही बनाओं) के अनुरूप है। 

Dr. Sudhir Vyas Posted from WordPress for Android

Advertisements

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s