इस्लाम में गुमराह कौन करता है और गुमराह करने का असल गुनहगार ही कौन ?


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ऐ बे’ईमान वालों सच बताना कि अगर इस्लाम “धार्मिक सहिष्णु मजहब” है तो ‘इस्लाम’ में ही गुमराह कौन करता है और गुमराही का, गुमराह करने का ‘असल गुनहगार’ कौन..??

गुमराह कौन करता है  ?

“शैतान ने कहा, मैं लोगों को बहकाऊंगा और उनको कामनाओं के मायाजाल में फंसाऊँगा ”
सूरा -अन निसा 4:119

“शैतान लोगों से जो वादे करता है ,वह धोखे के सिवा कुछ नहीं है ”
सूरा -अन निसा 4:120

इन उपरोक्त आयतों में तथाकथित ‘अल्लाह’ लोगों को गुमराह करने का अपराध शैतान पर लगा रहा है फिर दूसरी जगह यह कहता है —

“अल्लाह जिसको चाहे गुमराही में डाल देता है और जिसे चाहता है सीधा मार्ग दिखा देता है”
सूरा -अन नह्ल 16:93

“कह दो सब कुछ अल्लाह की ओर से होता है तो इन लोगों को क्या हो गया कि इस समझ बूझ के निकट भी नहीं होते”
सूरा -अन निसा 4:78.

तो गुमराह करने वाला कौन, किसने किया और किस मतलब से किया और गुमराह करने का गुनहगार कौन हुआ फिर …??

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माँ – बाप की बात मानो ?

“यदि वह तुझ पर दवाब डालें कि तू किसी ऐसी चीज को मेरा (अल्लाह ) हिस्सेदार बना जिसकी तुझे अकल नहीं हो तो, तू उनका कहना नहीं मानना”
सूरा -लुकमान 31:15
फिर इस बात के बारे में भी अल्लाह उल्टी बात कहता है –

“ऐ ईमान वालों तुम अपने बापों और भाइयों को अपना दोस्त नहीं बनाओ अगरचे वो इस्लाम की जगह कुफ्र को पसंद करें और जो कोई इन से दोस्ती का रिश्ता जोड़ेगा तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे ”
सूरा -अत तौबा 9:23

यानि मां बाप की बात मानें या ना मानें..?? मां बाप की बात मानने तक के मामले में कट्टरपंथी बना कर गुमराह किसने और क्यों किया..?? गुनहगार कौन हुआ गुमराह करने का..??

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★★ इस्लाम कैसे फैलायें  ?

“धर्म के बारे में कोई जबरदस्ती नहीं है”
सूरा -बकरा 2:256

“तुम किताब वालों और उम्मियों (जिनके पास किताब नहीं है) के पास जाओ और उन से कहो कि क्या तुम भी इस्लाम कबूलने को राजी हो और अगर वह ख़ुशी से इस्लाम स्वीकार कर लें तो उन्होंने सही रास्ता पा लिया और यदि वह इस से मुंह मोड़ें तो तुम पर सिर्फ यह सन्देश देने की ही जिम्मेदारी है”
सूरा -आले इमरान 3:20

‪#‎विशेष‬ – अब बताइये इन दोनों बातों में से कौन सी बात सही है ?
या फिर नीचे वाली आयत ही सही है ?

•• “यदि वह इस्लाम स्वीकार नहीं तो उन से इतना लड़ो कि सिर्फ पूरे का पूरा अल्लाह का मजहब इस्लाम ही बाकी रह जाये ”
सूरा -अल अनफाल 8:39

तो दूसरे गैर इस्लामिक बंदे को अपना धर्म मानने की आजादी इस्लाम और कुरान के मुताबिक है या नहीं, या उसको इस्लाम कबूल करना ही पडेगा वर्ना लड कर मरना ही पडेगा सूरा -अल अनफाल 8:39 के मुत्तालिक ..?

फिर इस्लाम में मजहब, धर्म तक को मानने देने के मामले में गुमराह किसने और क्यों किया, गुमराह करने का गुनहगार कौन..??

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★★ अल्लाह की धमकियाँ  —

“ईमान लाने वालों अल्लाह का आदेश मानों और साथ में रसूल का आदेश भी मानो”
सूरा -अन निसा 4:59

“ईमान लाने वालों अल्लाह का आदेश मानों और साथ में रसूल का आदेश भी मानो और उनके कहर से बचते रहो”
सूरा -अल माइदा 9:92

“जो लोग उसके अनुसार फैसला नहीं करें जो अल्लाह की किताब में है तो वही काफ़िर हैं ”
सूरा -अल माइदा 5:44

तो मित्रोंं, कुरान से ही लिए गये इन कुछ प्रमाणों से ये स्वीकार करना ही पड़ेगा कि जब खुद अल्लाह ही इतनी द्विअर्थी, दो मतलब की बातें कहता है ,आदेश देता है तो उस अल्लाह पर ही ईमान रखने वाले ये बे’ईमानवाले तो कितने हद दरजे के झूठे होंगे और अपनी कही बातों पर कायम ही कैसे रह सकते हैं..??

यहे बातें तो पहले के और वर्तमानचीन इतिहास से भी सिद्ध हो चुका है कि दुनिया में जिसने भी बे’ईमानवालों पर भरोसा किया है उसे सिर्फ पछताना ही पड़ा है , बोलो हाँ कि ना….???

‪#‎धार्मिक_जिज्ञासाऐं‬ along with ‪#‎Total_लोलवा‬

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यह एक अकाट्य सत्य व तथ्य है कि विज्ञान और इस्लाम एक दूसरे के विरोधी हैं, क्योंकि विज्ञान तथ्यों को तर्क की कसौटी पर परखने के बाद और कई बार कडे परीक्षण करने के बाद उनको स्वीकार करता है जबकि इस्लाम निराधार , बेतुकी और ऊलजलूल बातों पर आँख मूँद पर बे’ ईमान रखने पर जोर देता है ,, इस बात का तो वर्तमानचीन इतिहास खुद गवाह है कि इस्लाम के उदय से लेकर मुसलमानों ने “हुक्के” के अलावा कोई दूसरा अविष्कार ही नहीं किया लेकिन दूसरों के द्वारा किये गए अविष्कारों के फार्मूले चोरी करके उनका उपयोग दुनिया को बर्बाद करने के लिए जरुर किया है … !!

अंत में बात बेबात हिंदू रीति रिवाज, पूजा उपासना, देवी देवताओं , पूजनीयों सहित ‘ॐ’ , सूर्य नमस्कार और योग और हिंदुओं तक का हक मार कर खाने के बावजूद हर वक्त हिंदू और भारत का जबरदस्ती विरोध करने वाले मुसलोईड्स (भारतीय मुसलमान) हेतु मात्र 10 सवाल जिनका सटीक प्रमाण सहित और तर्कपूर्ण जवाब कोई मुल्ला मौलवी या मुसलोईड दे सकता है , दम है तो दो…??

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1.) मुसलमानों का दावा है कि कुरान अल्लाह की किताब है लेकिन कुरान में बच्चों की खतना करने का हुक्म नहीं है फिर भी मुसलमान खतना क्यों कराते है ,क्या अल्लाह में इतनी भी शक्ति नहीं है कि मुसलमानों के खतना वाले बच्चे ही पैदा कर सके और कुरान के विरूद्ध काम करने से मुसलमानों को काफ़िर क्यों नहीं माना जाए ?

2.) मुसलमान मानते हैं कि अल्लाह ने फ़रिश्ते के हाथो कुरान की पहली सूरा लिखित रूप में मुहम्मद को दी थी लेकिन अनपढ़ होने से वह उसे नहीं पढ़ सके इसके अलावा मुसलमान यह भी दावा करते हैं कि विश्व में कुरान एकमात्र ऐसी किताब है जो पूर्णतया सुरक्षित है तो मुसलमान कुरान की वह सूरा पेश क्यों नहीं कर देते जो अल्लाह ने लिख कर भेजी थी इस से तुरंत पता हो जायेगा कि वह कागज कहाँ बना था और अल्लाह की राईटिंग कैसी थी वर्ना हम क्यों नहीं माने कि जैसे अल्लाह फर्जी है वैसे ही कुरान भी फर्जी है..??

3.) इस्लाम के मुताबिक यदि 3 दिन / 3 माह का बच्चा मर जाये तो उसको कयामत के दिन क्या मिलेगा,, जन्नत या जहन्नुम और किस आधार पर ..??

4. मरने के बाद जन्नत में पुरुष को 72 हूरी (अप्सराऐं) मिलेगी…तो स्त्री को क्या मिलेगा..72 हूरा (पुरुष वेश्या/ Gigolo ) और अगर कोई बच्चा पैदा होते ही मर जाये तो क्या उसे भी हूरें मिलेंगी और वह बच्चा हूरों का क्या करेगा ?

5.) यदि मुसलमानों की तरह ईसाई, यहूदी और हिन्दू मिलकर मुसलमानों के विरुद्ध जिहाद करें तो क्या मुसलमान इसे धार्मिक कार्य मानेंगे या अपराध ,, और क्यों ?

6.) यदि कोई गैर मुस्लिम (काफ़िर) यदि अच्छे गुणों वाला हो तो भी क्या अल्लाह उसको जहन्नुम की आग में झोंक देगा और क्यों ?और अगर ऐसा करेगा तो क्या ये अन्याय नहीं हुआ ??

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7.) कुरान के अनुसार मुहम्मद सशरीर जन्नत गए थे और वहां अल्लाह से बात भी की थी लेकिन जब अल्लाह निराकार है और उसकी कोई इमेज (छवि) नहीं है तो मुहम्मद ने अल्लाह को कैसे देखा और कैसे पहचाना कि यह अल्लाह है या शैतान है या एलियन ?

8.) मुसलमानों का दावा है कि जन्नत जाते समय मुहम्मद ने येरूसलम की बैतूल मुक़द्दस (यानि मस्जिदुल अक्सा) नाम की मस्जिद में नमाज पढ़ी थी लेकिन वह मुहम्मद के जन्म से पहले ही रोमन लोगों ने नष्ट कर दी थी मुहम्मद के समय उसका नामोनिशान नहीं था तो मुहम्मद ने उसमे नमाज कैसे पढ़ी थी ? हम मुहम्मद को झूठा क्यों नहीं कहें ?

9.) अल्लाह ने अनपढ़ मुहम्मद में ऐसी कौनसी विशेषता देखी जो उनको अपना रसूल नियुक्त कर दिया,क्या उस समय पूरे अरब में एक भी ऐसा पढ़ा लिखा व्यक्ति नहीं था जिसे अल्लाह रसूल बना देता और जब अल्लाह सचमुच सर्वशक्तिमान है तो अल्लाह मुहम्मद को 63 साल में भी अरबी लिखने या पढने की बुद्धि क्यों नहीं दे पाया ?

10.) जो व्यक्ति अपने जिहादियों की गैंग बना कर जगह जगह लूट करवाता हो और लूट के माल से बाकायदा अपने लिए पाँचवाँ हिस्सा (20 %० ) रख लेता हो उसे अल्लाह का रसूल कहने की जगह कमीने लुटरों हत्यारों का सरदार क्यों नहीं कहें ?

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हम हिंदुओं पर शिवलिंग, गणेश, मूषक वाहन, ब्राह्मणवाद समेत विभिन्न देवी, देवताओं पर अनुचित, अश्लील सवाल करने वाले सेक्यूलर, तथाकथित वंचित वर्ग के थेरवादी वहाबियत के नवबौद्ध और मुसलोईड्स जवाब दो इन सवालों का …. दे सकोगे…????

‪#‎जिज्ञासाऐं‬ …

Dr. Sudhir Vyas Posted from WordPress for Android

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One Comment Add yours

  1. Sunny says:

    जाहिल भी शर्मा जाए इनकी जाहिलियत से.
    #शर्म है पर धर्म है.

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