राष्ट्रहित मुर्दाबाद , वोट की राजनीति जिन्दाबाद – लचर शत्रु संपत्ति अधिनियम ☞ अब भारत विभाजन से जुड़े गद्दारों ,समर्थकों व परिवारों की संपत्तियां मुक्त ना हों ☞ शत्रु संपत्ति अधिनियम का लचीलापन देशद्रोह है।


image

शत्रु सम्पत्ति अधिनियम 1968 एवं सरकारी स्थान (अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम 1971 के अनुसार शत्रु सम्पत्ति पाकिस्तान गए लोगों के भारतीय वारिसों को भी नहीं मिल सकती पर जैसा कि आज तक भारत में देखा गया है “हर कानून में सुराख होता है।” तो इसी सुराख का लाभ अब भारत में मुसलमान रूपी मुसलोईड्स उठा रहे हैं।

एक साजिश के तहत बंटवारे के समय पाकिस्तान गए मुसलोईड्स के तथाकथित वारिस भारत आ रहे हैं यहां कुछ साल रहने के बाद अपने आपको भारतीय नागरिक बताकर अपने तथाकथित गद्दार व देशद्रोही पुरखों की सम्पत्ति हासिल करने के लिए अदालत पहुंच रहे हैं यही पाकिस्तान गए मुसलोईड्स के भारत में रह रहे मुसलोईड नाते- रिश्तेदार भी कर रहे है ,, मुसलोईड्स और उनके परिवारों की हम पाकिस्तानी भी बनें और हिंदुस्तान पर भी कब्ज़ा बनायें रखें की नीति पर अंकुश लगाया जाये …!!

भारत सरकार मुसलोईड्स और वोटबैंक के लालच में इस प्रवृति के आगे नत मस्तक ना हो ..!!

भारत विभाजन से जुड़े गद्दारों समर्थकों की संपत्तियां मुक्त ना हों बल्कि संबंधित परिवारों की मौजूदा संपत्ति तक जब्त कर ली जाये अन्यथा भारत विशुद्धतम गैर मुस्लिमों हेतु ही राष्ट्र घोषित कर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, वक्फ बोर्ड तथा मुस्लिम लीग समेत 27 मुसलोईड राजनैतिक दलों का पंजीकरण व मान्यताएँ समाप्त कर खत्म किये जाये और सरकार से सब्सिडी , हज सब्सिडी व हर तरह के ऋण लेने समेत मुसलोईड के वोट देने के अधिकार समाप्त किये जायें,,
शत्रु सम्पत्ति (संशोधन और विधिमान्यकरण) विधेयक, 2010 को और सख्त बना कर पारित करे वर्तमान “हिंदू राष्ट्रवादियों” की भारत सरकार और साबित करे की वह पाकिस्तानियों और उनके भारत में रह रहे नाते रिश्तेदारों की कतई नहीं है……!

बडे बडे राजनैतिक क्रांतियों के दलीय पदाधिकारी सोशल मीडियाई माध्यम पर मौजूद हैं….हर पल हर जगह में “जागो जागो” की गुहार लगाते हिंदू धार्मिकता व देशभक्ति के चौकीदार भी हैं,,, लेकिन मुद्दों पर बात करने वाले बस कुछ लोग ही हैं जिन्हे मैं जानता हूँ ‌भारत भर में ..!!

हमारे प्रिय भारत में पाकिस्तान व पाकिस्तानियों, मुसलोईड्स / शांतिदूतों को हडकाने वाले अनगिनत भारतीय फेसबुकियों में से मैं भी एक हूँ, लेकिन कितने देश भक्त भारत के “शत्रु संपत्ति कानून” के बारे में जानते हैं…??

एक बहुत अच्छा सशक्त ‘शत्रु संपति कानून’ बनाने के बाद आज की राजनीति और न्यायालयी कुतर्कों के , राजनैतिक पक्षपात के ही वशीभूत हो कर यदि देशहित विरोधी कार्य सालों से करते जायें तो जनता व देशभक्ति , राष्ट्रवाद समेत राष्ट्रवादी अनजाने रह कर चुप क्यों हैं…??

बस जानबूझकर अनजाने ,अज्ञानी बन कर हम अपनी जिम्मेदारी पूरी करने और राष्ट्रवासी, राष्ट्रवादी बनने को प्रदर्शित कब तक करते रहेंगे… कब तक डाली टहनी छांटोगे, मूल जडों पर प्रहार कब करोगे राष्ट्रवादियों ..?

अब न्यायालयों और प्रशासन के तहत लंबे समय से शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 विवादों के घेरे में है| विवाद का एक कारण सर्वोच्च न्यायालय का राजा महमूदाबाद की संपत्ति पर दिया गया एक निर्णय है जिसमें सरकार को कहा गया है कि वह अधिगृहित संपत्ति राजा के वंशजों को लौटा दे इस फैसले के बाद बाद देश के शत्रु संपत्तियों पर दावेदारों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हो गई है, नवाब महमूदाबाद वो व्यक्ति रहे हैं जिन्होने 40 के दशक में मुस्लिम लीग को तब के समय में 400 करोड रूपये दे कर दंगों व पाकिस्तान निर्माण की स्थाई नींव रखी थी।

27 मार्च 2012 गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उतर में बताया कि दिनांक 05 मई, 2011 की स्थिति के अनुसार, भारत के लिए शत्रु सम्पत्ति के अभिरक्षक (सीईपी) के पास 1175 अचल सम्पत्तियां निहित हैं। इसके अतिरिक्त शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक (संशोधन एवं विधिमान्यकरण) अध्यादेश, 2010 के प्रख्यापन के पश्चात सीईपी में 936 अचल संपत्तियों को पुनः निहित किया गया है। विगत हाल में अचल शत्रु संपत्ति के संबंध में कोई मूल्यांकन नहीं हुआ है। भारत के लिए शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक (सीईपी) में निहित अचल संपत्तियों के संरक्षण और प्रबंधन संबंधी दिशानिर्देश समय-समय पर जारी किए गए हैं और उनमें शत्रु संपत्ति के प्रबंधन एवं संरक्षण के संबंधन में शत्रु संपत्ति के उप अभिरक्षक, सहायक अभिरक्षक तथा सीईपी द्वारा प्राधिकृत जिला स्तरीय अधिकारियों सहित विभिन्न अघिकारियों के कार्यों एवं दायित्वों का निर्धारण किया गया है। फरवरी, 2010 में राज्य सरकारों/ संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को, अन्य बातों के साथ-साथ यह सलाह दी गई थी कि शत्रु संपत्ति के रूप में घोषित संपत्तियों के संबंध में किसी प्रकार की रजिस्ट्री/ उसका दाखिल खारिज नहीं किया जाएगा, शत्रु संपत्ति के संबंध में किसी भी अन्तरण प्रलेख और/ अथवा स्वामित्व का अंतरण अथवा किसी ब्याज के सृजन अथवा उसके प्रभारों को पंजीकरण नहीं किया जाएगा और भारत के लिए शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक का नाम शत्रु संपत्ति संबंधी सभी राजस्व/संपत्ति रिकार्डों में दर्ज किया जाएगा।

वर्ष 2008-09, 2009-10, 2010-11 तथा 2011-12 (फरवरी, 2012 तक) के दौरान भारत के लिए शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक द्वारा शत्रु संपत्ति से प्राप्त कुल राजस्व जिसमें शेयरों पर लाभांश और सरकारी प्रतिभूतियों में किए गए निवेश पर ब्याज और कोषागार बिल शामिल हैं, क्रमशः 2645.41 लाख रुपए, 2623.89 लाख रुपए, 3277.80 लाख रुपए और 4179.33 लाख रुपए है। जिला प्राधिकारियों को प्रत्येक अचल संपत्ति से मिली आय का 1/12 वां अंश शत्रु संपत्ति के प्रबंधन एवं रख-रखाव के संबंध में होने वाले व्ययों के प्रजोजनार्थ अपने पास रखने का हक है। शत्रु संपत्ति के प्रबंधन एवं रख-रखाव के संबंध में जिला प्राधिकारियों द्वारा किए गए व्ययों का ब्यौरा भारत के लिए शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक के कार्यालय में नहीं रखा जाता है।
शत्रु संपत्ति अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय में 250 और मुम्बई उच्चन्यायालय में 500 के करीब मुकदमे लंबित,, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुसलमान भारत के विभिन्न राज्यों में आकर बस जाते हैं। कुछ दिन यहां रहने के बाद सत्तालोलुप राजनेताओं और दलालों के सहयोग से ये लोग राशन कार्ड बनवा लेते हैं, मतदाता सूची में नाम जुड़वा लेते हैं। फिर कहते हैं कि वे तो सन् 1947 से पहले से यहीं रह रहे हैं।

दरअसल पाकिस्तान गए लोगों की सम्पत्ति को प्राप्त करने के लिए पहले से ही उनके कथित परिजनों द्वारा प्रयास किया जा रहा है,क्योंकि 1968 में लागू शत्रु संपत्ति अधिनियम में कुछ खामी थी। उत्तरप्रदेश में यह प्रयास बड़े स्तर पर किए जा रहे हैं। 2005 तक ही न्यायालय में 600 मामलों की सुनवाई हो चुकीहै और न्यायालय ने उन्हें वांछित शत्रु संपत्ति पर कब्जा देने के निर्देश दिए हैं। शत्रु संपत्ति हथियाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में 250और मुम्बई उच्च न्यायालय में 500 के करीब मुकदमे लंबित हैं। मैं यहां कथित परिजन का प्रयोग कर रहा हूं,उसके पीछे कारण हैं। समय-समय पर इस बात की पुष्टि हो रही है कि बड़ी संख्या में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुसलमान भारत के विभिन्न राज्यों में आकर बस जाते हैं। कुछ दिन यहां रहने के बाद सत्ता लोलुप राजनेताओं और दलालों के सहयोग से ये लोग राशन कार्ड बनवा लेते हैं, मतदाता सूची में नाम जुड़वा लेते हैं। फिर कहते हैं कि वे तो सन् 1947 से पहले से यहीं रह रहे हैं।

एक जानकारी के अनुसार इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 2005 तक ऐसे 600 मामलों की सुनवाई हो चुकी है और इन मे मुसलमानों के पक्ष में निर्णय हुए हैं। अब प्रायः हर दिन एसे मामले न्यायालय पहुंच रहे हैं। इस तरह के मुकदमे सर्वोच्च न्यायालय में 250 के आसपास और मुम्बई उच्च न्यायालय में करीब 500 मामला लम्बित हैं कई मामलों में तो न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि मुस्लमानों को उनके पुरखों की सम्पत्ति लौटाई जाए। एक ऐसा ही मामला है महमूदाबाद (उ. प्र) के पूर्व राजा अली खान के बेटे अमीर मोहम्मद खान का। उल्लेखनीय है कि अली खान मुस्लिम लीग को आर्थिक सहायता देने वालों में सबसे आगे था। उस समय उसने मुस्लिम लीग को 400 करोड़ रूपए (आज की कीमत में 80,000 करोड़ रु.) दिए थे।

इसके बाद अमीर मोहम्मद खान को कई भवन लौटाए भी गए। ऐसी स्थिति देख कर अनेक मुस्लिमों ने अपने पुरखों की सम्पत्ति पर दावा ठोंकना शुरू किया। इन्हीं सबसे बचने के लिए केन्द्रीय गृहमंत्री ने शत्रु सम्पत्ति अधिनियम 1968 और सरकारी स्थान अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली अधिनियम- 1971 में संशोधन हेतु शत्रु सम्पत्ति (संशोधन और विधिमान्यकरण विधेयक 2010) तैयार किया और उसे लोकसभा में प्रस्तुत किया।

विभाजन के समय अली खान पाकिस्तान गया और वहीं उसकी मृत्यु हो गई। उसके साथ में उसका बेटा अमीर मोहम्मद खान भी पाकिस्तान गया था। किन्तु कुछ वर्ष के बाद वह पाकिस्तान से इंग्लैण्ड और फिर भारत आ गया। इस बीच 1965 में भारत सरकार ने राजा महमूदाबाद की सम्पत्ति (सीताफर, लखनऊ, देहरादून, बहराइच, नैनीताल स्थित भवन और 400 हेक्टेयर जमीन जायदाद ) को शत्रु सम्पत्ति घोषित कर अपने कब्जे में कर लिया। भारत आने के बाद अमीर मोहम्मद खान ने अपनी पैतृक सम्पत्ति प्राप्त करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सर्वोच्च न्यायालय में अमीर मोहम्मद खान की तरफ से वकालत की वर्तमान केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने। माना जा रहा है कि इस कारण सर्वोच्च न्यायालय में भारत सरकार ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। परिणाम स्वरूप सर्वोच्च न्यायालय ने 2005 में अमीर मोहम्मद खान के पक्ष में निर्णय दिया।

सन् 2010 अकटूबर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में शत्रु सम्पत्ति कानून-1968 में संशोधनों को मंजूरी दे दी गई। अब शीतकालीन सत्र के दौरान संसद से इसे मंजूरी दिलाई जाएगी। संशोधनों के अनुसार शत्रु सम्पत्ति केवल उसके मालिक को या उसके वैधानिक उत्तराधिकारी को दी जा सकती है। मूल कानून के मुताबिक इस तरह की सभी सम्पत्तियों के संरक्षक के रूप में सरकार को यह अधिकार है कि वह किसी को भी इन सम्पत्तियों को किराए पर दे सकती है।
यदि संसद ने इन संशोधनों को मंजूरी दे दी तो इससे इस तरह की संम्पत्तियों को उत्तराधिकारी के रूप में संभालने वाले भारतीय मुसलमानों के लिए उन संपत्तियों पर मालिकाना हक पाना आसान हो जाएगा। लेकिन उन्हें यह साबित करना होगा कि वे इस तरह की सम्पत्तियों के वैधानिक उत्तराधिकारी हैं, और वे जन्म से भारतीय नागरिक हैं। गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने मानसून सत्र में इन संशोधनों को संसद में पेश करने की कोशिश की थी। लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए, क्योंकि कुछ मंत्रियों व विभिन्न पार्टियों के सांसदों ने संशोधन को पेश न करने का बार-बार आग्रह किया। ये सांसद और मंत्री यह सोचते थे कि मुस्लिम वारिसों के हितों की रक्षा नहीं की जा रही है। 
शत्रु सम्पत्ति का संरक्षण गृह मंत्रालय के अधीन आता है और इस तरह की सम्पत्तियों की देखभाल करने और उसके उपयोग का गृह मंत्रालय को अधिकार है। इस तरह की सम्पत्तियों में या तो सरकारी कार्यालय हैं या तो किराएदारों द्वारा इनका इस्तेमाल किया जा रहा है।
इन संशोधनों की बात ऐसे समय में आई हैं, जब विभिन्न अदालतों द्वारा दिए गए फैसलों ने शत्रु सम्पत्ति पर सरकार के अधिकारों को समाप्त कर दिया है। लेकिन नए संशोधनों के जरिए सरकार ने साफ कर दिया है कि “कोई भी अदालत संरक्षक से सम्पत्ति लेने का आदेश नहीं दे सकती या सरकार को यह निर्देश नहीं दे सकती कि वह इस तरह की किसी सम्पत्ति को छोड़ दे।”

कांग्रेस और अन्य दलों के मुस्लिम सांसदों के दबाव में झुकते हुए केंद्र सरकार ने शत्रु संपत्ति कानून 1968 में बदलावों को मंजूरी दे दी।

इसी साल 2 जुलाई को केंद्र सरकार ने अध्यादेश के जरिए ऐसी सभी संपत्तियों को पूरी तरह केंद्र सरकार के अधीन कर दिया था। यहां तक कि इस बारे में उच्चतम न्यायालय के फैसलों को भी अप्रासंगिक बना दिया गया था। संसद के मानसून सत्र में इस अध्यादेश को संसद में पारित करवाने से ठीक पहले सभी पार्टियों के मुस्लिम सांसदों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर इसका विरोध किया। हालांकि गृह मंत्री पी. चिदंबरम इन संशोधनों को न बदलने के लिए अडिग थे, लेकिन आखिरकार प्रधानमंत्री के आदेश पर उन्हें ये संशोधन मानने को तैयार होना पड़ा है।
चिदंबरम ने कहा, संसद के समक्ष जो नए संशोधन पेश किए गए उन्हें नए विधेयक में शामिल कर लिया गया है। विधेयक की सामग्री में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कैबिनेट में इन संशोधनों के पारित हो जाने के बाद राजा महमूदाबाद ने यह तो माना कि कानून बन जाने के बाद उन्हें उनकी संपत्ति वापस मिल जाएगी, लेकिन यह भी जोड़ा कि अब भी केंद्र सरकार और खासकर गृहमंत्री चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करने की मंशा नहीं दिखाई है |

खास बात –
विभाजन के समय जो मुस्लिम पाकिस्तान गए थे, उनकी सम्पत्ति को शत्रु सम्पत्ति घोषित कर सरकार ने उसे अपने कब्जे में रखा है। 
“नेशनल इन्स्टीट्यूट आफ फाइनान्सियल मैजेजमेन्ट” के एक अध्ययन के अनुसार पूरे देश में 2186 शत्रु सम्पत्तियां हैं।
सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में 1468,
पश्चिम बंगाल में 351,
दिल्ली में 66,
गुजरात में 63,
बिहार में 40,
गोवा में 35,
महाराष्ट्र में 25,
केरल में 24,
आंध्र प्रदेश में 21 और अन्य राज्यों में 93 शत्रु सम्पत्तियां है।

मुम्बई के मालाबार हिल्स स्थित 2.5 एकड़ में फैले ‘जिन्ना हाउस’ को भी मशहूर उद्योगपति नुस्ली वाडिया की मां और जिन्ना की बेटी दीना वाडिया को वापस करना पड़ सकता है। 91 वर्षीया दीना वाडिया काफी समय से इस पर दावा कर रही हैं। मामला न्यायालय में है। 23 अगस्त को मुम्बई उच्च न्यायालय ने दीना वाडिया की अन्तिम याचिका भी स्वीकार कर ली है, जिस पर 23 सितम्बर 2011 को सुनवाई हुई पर कोई नतीजा अब तक नहीं निकला।
भारत विभाजन से जुड़े गद्दारों की संपत्तियां मुक्त ना हों

शत्रु सम्पत्ति (संशोधन और विधिमान्यकरण) विधेयक, 2010 पारित कर,भारत सरकार सावित करे की वह पाकिस्तानियों और उनके भारत में रह रहे नाते रिश्तेदारों की कतई नहीं है……! 

2010 के लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान, अगस्त माह के प्रथम सप्ताह में उपस्थित किए गए प्रस्ताव शत्रु सम्पत्ति (संशोधन और विधिमान्यकरण) अध्यादेश, 2010 (2010 का सं. 4) को सरकार पारित नही करवाना चाहती . क्यों कि मुस्लिम सांसदों ने अति संपन्न पाकिस्तान भागे मुस्लिमों के हितों के लिए भारी दवाव बनाया है . सरकार बिना कुछ समझे ही यह ना समझी का कदम उठाने जा रही है . पूर्व में इस तरह की संपत्तियों के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कानूनी खामियों के कारण, इन संपत्तियों का निस्तारण पाकिस्तान भागे मुस्लिमों के भारत में रह रहे वंशज या अन्य दावेदारों के पक्ष में कर दिए थे . सरकार ने इन संपत्तियों को पुनः कब्जे में लेने के लिए उपरोक्त सन्दर्भ ऐसा अध्यादेश निकला हुआ है, . यदि यह विधेयक पारित नहीं किया गया तो ,इस आध्यादेश का प्रभाव स्वतः ही समाप्त हो जाएगा. हजारों करोड़ की वह सम्पत्ती जो देश विभाजन के समय पाकिस्तान चले गये शत्रु लोगों की सरकार के पास जप्त है वह उनके तथाकथित वंशजों या अन्य दावेदारों को बिना कारण मिल जायेगी !

इस हेतु सरकार ने निम्न संसोधन विधेयक रख हुआ है :- 
02.07.2010 को प्रख्यापित शत्रु सम्पत्ति (संशोधन और विधिमान्यकरण) अध्यादेश, 2010 (2010 का सं. 4) को प्रतिस्थापित करना। शत्रु सम्पत्ति अधिनियम, 1968 और सरकारी स्थान (अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 में संशोधन करना।
भारत विभाजन से जुड़े गद्दारों की बहुत सी संपत्तियां सरकार के पास जप्त हैं बहुत सों को बटवारे के समय उसके बदले रकम दे दी गई थी. उनमें पाकिस्तान बनाने की जिद्द करने बाले देश के शत्रु जिन्ना भी हैं . उनका मुम्बई में बहुत बड़ा और सबसे मंहगे इलाके में जिन्ना हॉउस है उसकी वर्तमान कीमत हजारों करोड़ में है , उनकी बेटी भारत में ही रहती है उनका बेटा प्रसिद्ध उद्योगपती नुस्लीवाडिया हैं और उसे प्राप्त करना चाहते है . इन्होनें जिन्ना को राष्ट्र भक्त साबित करने के लिए कथित तौर पर किताब भी लिखवाई थी…

हजारों करोड़ की इन जायदातों को पुनः हांसिल करने के लिए , अमीर जमींदार – नबाव मुसलमानों के लिए कांग्रेस के कुछ मुस्लिम नेता यथा सलमान खुर्शीद , अहमद पटेल , गुलाम नवी आजाद आदी नेता सक्रीय हैं व ये इस विधेयक को वापस करवाना कहते हैं , इसके लिए सीधा सा तरीका है की सरकार पास ही नही करवाए तो सत्रावसान के साथ ही यह समाप्त हो जाएगा . मुस्लिम वोट के नाम पर देश के ह्रदय – स्थल पर यह चोट देश से शुद्ध गद्दरी होगी…!
राजा महमूदाबाद की करोड़ों की सम्पत्ति का विवाद :—
देश की आजादी के दौरान ही महमूदाबाद के राजा अमीर मोहम्मद भारत छोड़ कर पाकिस्तान चले गये थे। उनकी सम्पत्ति को 1965 में सरकार ने शत्रु सम्पत्ति घोषित कर दी थी।इसमें राजा की सीतापुर, लखीमपुर, लखनऊ व देहरादून में स्थित आलीशान भवन के अलावा महमूदाबाद तहसील क्षेत्र में ही 367 हेक्टेयर जमीन शामिल थी।इसके बाद कोर्ट में मुकदमा चलता रहा। सन् 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि राजा की जो सम्पत्ति शत्रु सम्पत्ति घोषित की गई है, उसे राजा के पुत्र मोहम्मद अमीर मोहम्मद को सौंप दी जाये। तत्कालीन डीएम आमोद कुमार ने सम्पत्ति सौंपने में लापरवाही बरती, लिहाजा डीएम समेत 24 अफसरों को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नोटिस का सामना करना पड़ा सभी को कोर्ट में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना पड़ा। बाद में सम्पत्तियां मोहम्मद खान को सौंप दी गयी। मोहम्मद खान ने सभी सम्पत्तियों पर कब्जा कर लिया था, लेकिन राज्य सरकार ने कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी, कोर्ट में मामला विचाराधीन है।उधर, केंद्र सरकार ने शत्रु सम्पत्ति पर कब्जा बरकरार रखने के सन्दर्भ में एक अध्यादेश जारी कर दिया।
इसी अध्यादेश के तहत अभिरक्षक शत्रु सम्पत्ति कार्यालय ने दो अगस्त को डीएम को निर्देश जारी किया। डीएम ने मंगलवार को मोहम्मद खान को नोटिस जारी कर दी, जिसमें अभिरक्षक शत्रु सम्पत्ति के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि आप को पूर्व में हस्तगत कराई गई सभी शत्रु सम्पत्तियां संबंधित एसडीएम को तत्काल हस्तगत करा दें। डीएम ने शाम को जिला मुख्यालय स्थित तत्कालीन डीएम, सीएमओ व एसपी बंगला पर स्वयं जाकर कब्जा कर लिया। खतौनी में अमल दरामद भी करा दी गई। यहां तैनात मोहम्मद खान के कर्मचारी चले गये। उधर, प्रेम नगर के लोगों में खुशी का ठिकाना नहीं था, उनके मकान दांव पर लगे थे, जो अब बेफिक्र हो गये। महमूदाबाद एसडीएम ने बताया कि 367 हेक्टेयर जमीन व अन्य कई भवन की अमलदरामद शत्रु सम्पत्ति के खाते में कर दी गई है। डीएम ने भी देर शाम बताया कि मोहम्मद खान को पूर्व में सौंपी गयी सभी शत्रु सम्पत्तियों को कब्जे में कर लिया गया है।
यह एक उदाहरण है जिससे सावित होता है की हम पाकिस्तान भी जाएँ और हिंदुस्तान पर भी कब्ज़ा रखें …!!

भारत सरकार इस प्रवृति के आगे नत मस्तक हो !
पद्म पुरस्कार विवाद के बाद एक बार फिर बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान और केंद्र सरकार आमने सामने है। एक्टर मध्य प्रदेश के भोपाल में अपनी संपत्ति को लेकर कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। पटौदी के नवाब अपनी संपत्ति को बचाने के लिए सरकार के साथ कानून लड़ाई लड़ रहे हैं।सैफ की ये पुश्तैनी संपत्ति उन्हें अपनी दादी साजिदा सुलतान से विरासत में मिली है लेकिन अब ये केंद्रीय गृह मंत्रलाय की जांच के दायरे में आ गई है। सरकार एनिमी प्रोपर्टी एक्ट (शत्रु संपत्ति अधिनियम) 1968 के तहत इसकी जांच करेगी।मामले की जांच कर रही ओसीईपी (शत्रु संपत्ति अभिरक्षक के कार्यालय) के मुताबिक ये संपत्ति असल में साजिदा की नहीं बल्कि उनकी बहन आबिदा सुलतान की थी, जो पाकिस्तान चली गई थी और इस तरह ये संपत्ति साजिदा के पास आ गई। अब आबिदा के एक परिजन ने कोर्ट में इसे चुनौती दी है। अब पूरे मध्य प्रदेश में उनकी हजारों करोड़ की संपत्ति (कॉटेज, पैलेस और जमीन सहित) को शत्रु संपत्ति माना जाएगा और आबिदा सुल्तान को उत्तराधिकारी घोषित किए जाने को आधार मानकर ये कार्रवाई शुरू की गई है।सुनने में आया है कि सैफ इस कानूनी विवाद को सुलझाने की कोशिश में लगे हैं और उनसे कहा गया है कि वो आखिरी नवाब और केंद्र सरकार के बीच हुए विलय समझौते की कॉपी पेश करें ,  हालांकि सैफ और उनकी मां शर्मीला टैगोर ने मामले में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है…!!

भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्ला खां के परिवार की 2600 एकड़ जमीन शत्रु संपत्ति कार्यालय ने जांच के दायरे में ले ली है। शत्रु संपत्ति कार्यालय ने नवाब हमीदुल्ला की बड़ी बेटी गौहर ताज आबिदा सुल्तान को उत्तराधिकारी घोषित किए जाने को आधार मानकर यह कार्रवाई शुरू की है। शत्रु संपत्ति कार्यालय केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करता है। शत्रु संपत्ति कानून के तहत शत्रु देश (जैसे पाकिस्तान) में रहने वाले व्यक्ति की संपत्ति को नियंत्रण में लेकर इसकी देखरेख व बेचने का हक सरकार ले लेती है। बॉलीवुड स्टार सैफ अली खान को भी नोटिस जारी कर पूछा गया है कि नवाब परिवार की भोपाल में कहां कितनी प्रॉपर्टी है? सैफ नवाब हमीदुल्ला खां के पड़पोते हैं।

भोपाल में नवाब खानदान की पूरी प्रॉपर्टी हमीदुल्ला के नाम थी। 1962 में नवाब की मृत्यु के बाद उनकी मंझली बेटी साजिदा सुल्तान को उत्तराधिकारी बनाया गया। नवाब की बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान वर्ष 1950 में पाकिस्तान चली गईं थी। ऐसे में, पाकिस्तान में रहने वाली उनकी बड़ी बेटी आबिदा को उत्तराधिकारी बताते हुए शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 के तहत कार्रवाई की जा रही है।

भोपाल जिला प्रशासन ने नवाब के परिवार की राजधानी में स्थित पूरी संपत्ति का ब्योरा भी तैयार कर लिया है। अब शत्रु संपत्ति कार्यालय यह पता करने की तैयारी कर रहा है कि इस प्रॉपर्टी की मौजूदा स्थिति क्या है और इसका मालिकाना हक किसके पास है? प्रशासन के इन कदमों से भोपाल में नवाब परिवार से जुड़ी और खरीदी गई पूरी प्रॉपर्टी जांच के दायरे में आ गई है। अगले कुछ हफ्तों में शत्रु संपत्ति कार्यालय प्रॉपर्टी की मौजूदा स्थिति का सर्वे भी शुरू करेगा। इसके लिए रिटायर्ड तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षकों व पटवारियों की सेवाएं ली जा रही हैं। संभवत: अगले महीने से यह काम शुरू हो जाएगा।

‘शत्रु संपत्ति मानकर जांच करना सही नहीं’ 
नवाब हमीदुल्ला की बेटी राबिया के वकील एनसी दास ने नवाब की प्रॉपर्टी को शत्रु संपत्ति मानने पर एतराज जताया है। वहीं, भोपाल नगर निगम के पूर्व आयुक्त देवीसरन के मुताबिक, “नवाब की बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान वर्ष 1950 में पाकिस्तान चली गई थीं। आबिदा को पाकिस्तानी नागरिक मानते हुए नवाब की संपत्ति को शत्रु संपत्ति बताने की कोशिश ठीक नहीं है। वैसे भी, वर्तमान में नवाब की संपत्ति पर क्रिकेटर मंसूर अली खां पटौदी की बेगम शर्मिला टैगोर और उनकी संतान काबिज हैं। वे हिंदुस्तान के ही निवासी हैं। ऐसे में इस प्रक्रिया का कोई औचित्य नहीं है।”

जिल्लेइल़ाही उवाच्  –

राष्ट्रहित मुर्दाबाद वोट की राजनीति जिन्दाबाद !!

भारत विभाजन से जुड़े गद्दारों ,समर्थकों व परिवारों की संपत्तियां मुक्त ना हों !

मुसलोईड्स और उनके परिवारों की यह दोगली नीति कि “हम पाकिस्तानी भी बनें और हिंदुस्तान पर भी कब्ज़ा बनायें रखें” पर अंकुश लगाया जाये …!!

वैसे मुझे लगता है कि वास्तविकता में अभी भी भारत सरकार में, न्यायालयों व न्यायधीशों समेत आम लोगों में दोस्त, दुश्मन का साधारण व कानून सम्मत अर्थ समझने की भी ना अक्ल है ना ही तमीज़….!!

अट्टहास करते हुऐ कहूँगा –
हाहाहाहाहा!
कालिदासों से लबालब भरे देश, डूब मरो! हाहाहाहाहा

Dr. Sudhir Vyas Posted from WordPress for Android

Advertisements

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s