सोनिया गांधी का राहुल – प्रियंका और काँग्रेस समेत जारी निजी भ्रष्टाचार


इन दिनों ललित मोदी को बारंबार भगौडा व अपराधी कह कर विदेश में ही रहते घूमते ‘इलाज कराते’ इन गांधियों के गुल्ले और नौकर इस पोस्ट के उदाहरणों का ही जवाब दे सकने की ताब पैदा तो करें।

1.)   यंग इंडिया नामक निजी कंपनी के 76 परसेंट शेयरधारी सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत बाकी 24% शेयरधारी सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज की संयुक्त स्वामित्व की निजी कंपनी यंग इंडिया ने हेराल्ड की 1600 करोड़ की परिसंपत्तियां महज 50 लाख में हासिल कीं, और इन महान भ्रष्टाचारियों के संयुक्त स्वामित्व की निजी कंपनी ‘यंग इंडिया’ को 90 करोड़ का तथाकथित कर्ज देने वाली “काँग्रेस कॉरपोरेशन प्राईवेट लिमिटेड़” रूपी कर्जदाता, लाभ प्राप्त कर्ता “काँग्रेस बैंक पार्टी” इन गांधियों और काँग्रेस के धन, शेयर व लाभ के खुल्लमखुल्ला, संयुक्त कांग्रेसी आलाकमानी भ्रष्टाचार पर जनता को जवाब दे ,,,

{वैसे भाजपाई राजनैतिक बकैत कांग्रेसियों से यंग इंडिया शेयर्स और नेशनल हेराल्ड भ्रष्टता पर कभी कोई सवाल नहीं पूछेंगे ना भाजपा इसकी कभी जाँच ही करवायेगी, यह गारंटीशुदा बात है।}

तो मामला कुछ यूँ है कि –

“नेशनल हेराल्‍ड अखबार की शुरुआत 9 सितंबर, वर्ष 1938 में लखनऊ से हुई थी। अखबार के मास्‍ट हेड पर लिखा गया था कि ‘स्‍वतंत्रता खतरे में है, सभी के साथ इसकी रक्षा करनी है।’ अंग्रेजी में इसका मतलब है कि Freedom is in Peril, Defend it with All Your Might. जब इस अखबार की शुरुआत हुई तो इसके पहले संपादक पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु हुए। जवाहर लाल नेहरु को जब देश का प्रधानमंत्री बनाया गया तो उन्‍होंने संपादक के पद से इस्‍तीफा दे दिया और उसके बाद के राम राव को नेशनल हेराल्‍ड का संपादक बनाया गया। अगस्‍त 1942 के बाद जब ब्रिटिशों ने इंडिया प्रेस पर हमला किया तो उस दौरान हेराल्‍ड अखबार को भी बंद करना पड़ा। हेराल्‍ड को वर्ष 1942 से लेकर 1945 तक पूरी तरह से बंद कर दिया गया। वर्ष 1945 के अंतिम महीनों में एक बार फिर से नेशनल हेराल्‍ड की शुरुआत की गई। दूसरी पारी से थी उम्मीद नेशनल हेराल्‍ड की दूसरी शुरुआत में कांग्रेस के फिरोज गांधी ने वर्ष 1946 में अखबार की बागडोर प्रबंध निदेशक के रूप में संभाली। इस समय मानिकोंडा चलापति राव को संपादक का पदभार दिया गया।

image

अभी तक हेराल्‍ड के दो संस्‍करण लखनऊ और दिल्‍ली से निकलने लगे थे। नेशनल हेराल्‍ड को हिंदी में नवजीवन और उर्दू भाषा में कौमी आवाज के नाम से भी निकाला जाता था। यह कहना कतई अतिश्‍योक्ति नहीं होगा कि नेशनल हेराल्‍ड पूरी तरह से कांग्रेसी अखबार था। भारत के आजाद होने के बाद भी एक बार फिर से अखबार को बंद करने की नौबत आ गई थी। वर्ष 1977 में जब लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी की हार हुई थी तो भी इस अखबार को दो सालों के लिए बंद कर दिया गया था।। यहां से हेराल्‍ड का काला इतिहास शुरु हो गया था।

★इंदिरा के बाद डूब गई नैय्या –
इंदिरा गांधी की हार के बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने नेशनल हेराल्‍ड की बागडोर संभाली लेकिन तब तक माहौल बिल्‍कुल बदल चुका था। वर्ष 1998 में लखनऊ संस्‍करण को बंद कर दिया गया और सिर्फ दिल्‍ली संस्‍करण ही बाजार में आता रहा।

जिल्लेइल़ाही प्रबुद्ध मित्रों को बता दें कि 1 अप्रैल, वर्ष 2008 को नेशनल हेराल्‍ड के बोर्ड सदस्‍यों ने इस बात की घोषणा कर दी कि अब हेराल्‍ड के दिल्‍ली संस्‍करण को भी बंद किया जा रहा है। बताया जाता है कि प्रिंट तकनीकी और कंप्‍यूटर तकनीकी में सुधार न होने के कारण इसे बंद किया गया। नेशनल हेराल्‍ड को जब बंद किया गया तो उस समय उसके एडिटर इन चीफ टीवी वेंकेटाचल्‍लम थे।

क्या है हेरॉल्ड घोटाला …??

वर्ष 2008 में नेशनल हेराल्‍ड को बंद करने के बाद उसका मालिकाना हक एसोसिएटड जर्नल्‍स को दे दिया गया था। हेराल्‍ड को चलाने वाली कंपनी एसोसिएट जर्नल्स ने कांग्रेस पार्टी से बिना ब्याज के 90 करोड़ का कर्ज लिया। कांग्रेस ने कर्ज तो दिया और उसकी वजह बताई कि कर्मचारियों को बेरोजगार होने से बचाना। यहां सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर कर्ज देने के बाद भी अखबार क्‍यों नहीं शुरु हुआ। इसके बाद 26 अप्रैल 2012 कोनेशनल हेराल्‍ड का मालिकाना हक यंग इंडिया को दे दिया गया,सनद रहे कि यंग इंडिया कंपनी में 76 प्रतिशत शेयर सोनिया और राहुल गांधी के हैं। यंग इंडिया ने हेराल्ड की 1600 करोड़ की परिसंपत्तियां महज 50 लाख में हासिल कीं।

अब भाजपा के नेता सुब्रमण्‍यम स्‍वामी का आरोप है कि गांधी परिवार ने हेराल्‍ड की संपत्तियों का अवैध ढंग से उपयोग किया है। जिसके बाद सुब्रमण्‍यम स्‍वामी इस विवाद को लेकर 2012 में कोर्ट पहुंच गए।
स्‍वामी ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने कांग्रेस के धन को निजी प्रापर्टी में लगाकर अपने हित के लिए इस्‍तेमाल किया गया है. उनका आरोप है कि हेराल्‍ड हाउस के नाम से जो 1600 करोड़ रुपये की संपत्ति है, उसका इस्‍तेमाल निजी फायदे के लिए किया जा रहा है. यह संपत्ति एसोसिएट जर्नल्‍स लिमिटेड की है.”

‪#‎जिल्लेइल़ाही_उवाच्‬ 
यंग इंडिया कंपनी में 76 परसेंट शेयर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के हैं. बाकी शेयर सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के पास हैं. यंग इंडिया ने हेराल्ड की 1600 करोड़ की परिसंपत्तियां महज 50 लाख में अवैध व गैरकानूनी रूप से कागजी हेरफेर की धोखाधड़ी करके हासिल कीं थी, 26 जून 2014 को निचली अदालत ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा, महासचिव ऑस्कर फर्नाडीस, सुमन दुबे व एक अन्य को समन जारी किया था। पेश मामले में आरोप है कि सोनिया गांधी व अन्य ने षड्यंत्र रचा है जिसमें इन सबने मिलकर यंग इंडिया के नाम से एक कंपनी बनाई गई थी। उसने नेशनल हेराल्ड की पब्लिशर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण कर लिया। इसके बाद एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को पचास लाख रुपये देकर यंग इंडिया लिमिटेड ने 90.25 करोड़ रुपये वसूलने का अधिकार ले लिया, अभी 13 अगस्त तक पेशी पर रोक लगी हुई है जो अत्यंत आश्चर्यजनक रोक है।

2.)  शिमला के नजदीक स्थित छराबड़ा कस्बे में बनाये जा रहे प्रियंका गांधी वाड्रा के बंगले का निर्माण कोई और नहीं, बल्कि सैनी समाज के बाशिंदे नीरज सैनी देख रहे हैं। नीरज न केवल इस बंगले के निर्माण हेतु लगाई जा रही सभी चीजों की गुणवत्ता एवं इसके सही प्लेसमैंट को सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि तमाम जरूरतों को पूरा करते हुए यह बंगला निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत बनकर तैयार हो जाये, इस पर भी पूरा ध्यान रख रहे हैं। नीरज सैनी के मुताबिक प्रियंका वाड्रा का यह बंगला साढ़े तीन बीघा में बन रहा है। चूंकि प्रियंका को सेब बहुत ज्यादा पसंद है इसलिए इस बंगले के साथ-साथ सेब का एक छोटा बगीचा भी बनाया जा रहा है, जिसमें अलग-अलग किस्म के सेब के पौधे लगाये जायेंगे। इसके अलावा कई और स्थानीय फलों व फूलों के पौधे इस बगीचे के माहौल को खुशबुदार व तरोताजा बनाये रखेंगे। प्रियंका वाड्रा का यह बंगला राष्ट्रपति निवास रिट्रीट और वाइल्ड फ्लॉवर हॉल के बीच बनाया जा रहा है।

image

राबर्ट वाड्रा की सम्पत्ति को लेकर उठे ताजा विवादों के बीच शिमला के छराबड़ा में स्थित प्रियंका गांधी वाड्रा का निर्माणाधीन भवन भी गांधी और वाड्रा परिवार के लिए नयी मुसीबतें खड़ी कर सकता है। ग्रीष्मकालीन राष्ट्रपति निवास के निकट वीवीआईपी क्षेत्र में स्थित इस निर्माणाधीन भवन की पृष्ठभूमि को लेकर कई सवाल खड़े किए जा सकते हैं जिनका जवाब देने में गांधी वाड्रा परिवारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।सूत्रों का कहना है कि इस जमीन की कीमत 47 लाख रुपए के करीब बताई गई है जबकि वास्तविकता में इसकी कीमत इससे कई गुणा ज्यादा है। इतना ही नहीं जिस स्थान पर प्रियंका वाड्रा का मकान बन रहा है उस स्थान पर राष्ट्रपति भवन द्वारा भवन निर्माण की अनुमति भी नहीं दी जाती है। इस क्षेत्र में इसलिए भी जमीनें नहीं बिकी क्योंकि ग्रीष्मकालीन राष्ट्रपति निवास होने के कारण यहां सुरक्षा की दृष्टि से राष्ट्रपति निवास द्वारा किसी को भी भवन निर्माण की अनुमति नहीं दी जाती। इस क्षेत्र को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र के तौर पर अधिसूचित किया गया है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर रोष है कि प्रियंका वाड्रा को तो गृह मंत्रालय और राष्ट्रपति भवन द्वारा इस क्षेत्र में भवन निर्माण की अनुमति दे दी गई लेकिन आज तक अन्य जिन लोगों ने भी इसके लिए आवेदन किया उनके आवेदनों को अस्वीकार कर दिया गया। करीब पांच साल पूर्व वीरभद्र सरकार के समय में खरीदी गयी इस सम्पत्ति के मामले में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की नेता विद्या स्टोक्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। जिस समय यह जमीन खरीदी गई थी उस समय विद्या स्टोक्स राज्य की ऊर्जा मंत्री थीं। इस जमीन के कई हिस्सेदार थे। सभी हिस्सेदारों की सहमति बनाने के बाद यह जमीन प्रियंका वाड्रा को बेची गई थी। राजस्व अधिकारियों का कहना है कि प्रियंका से पहले भी कई लोगों ने इस जमीन को खरीदने का प्रयास किया था लेकिन मालिकाना हक अलग-अलग होने के कारण इसका सौदा कभी सिरे नहीं चढ़ पाया था। जमीन के मालिकों को इकांर करने के बाद प्रियंका वाड्रा को हिमाचल में जमीन खरीदने की इजाजत दिलाने में भी पूर्व कांग्रेस सरकार ने अहम रोल अदा किया।

हिमाचल में गैर-हिमाचलियों को जमीन खरीदने की इजाजत लेने के मामले में जहां गैर-हिमाचलियों को कई तरह के पापड़ बेलने पड़ते हैं वहीं इस हाई प्रोफाइल मामले में तत्कालीन राजस्व मंत्री सत महाजन ने न केवल एक-दो दिनों के भीतर ही सारा काम करवाया बल्कि इसे प्रियंका गांधी तक भी पहुंचाया। प्रियंका वाड्रा ने इस घर के निर्माण में व्यक्तिगत रूप से रुचि ली है। वह अपने बच्चों और मां सोनिया गांधी के साथ निर्माण कार्य को देखने के लिए कई बार शिमला आईं। पहाड़ी शैली में बनाये जा रहे इस घर को लेकर उस समय एक नया विवाद खड़ा हो गया जब 50-60 लाख रुपए खर्च किए जाने के बाद इसे एक बार फिर तोड़ कर गिरा दिया गया। बताया जाता है कि आधारभूत ढांचे के कमजोर होने के कारण घर को गिराया गया। इसके बाद एक बार फिर सरकार से अनुमति लेकर आसपास की और जमीन को खरीदा गया और घर का निर्माण नए सिरे से दोबारा शुरू किया गया। यह अनुमति राज्य की मौजूदा भाजपा सरकार द्वारा दी गई। खरीदी गई अतिरिक्त जमीन के बारे में यह कहकर सरकारी अनुमति हासिल की गई कि इमारत के साथ-साथ यहां बागवानी और फूल उगाने का काम भी किया जाएगा। आमतौर पर घर बनाने के लिए क्योंकि सरकार थोड़ी जमीन खरीदने की ही इजाजत देती है इसलिए बागवानी और फूल उगाने की दलील दी गई। वास्तव में यहां न तो बागवानी की जा रही है और न ही फूल उगाए जा रहे हैं!

सपनों के महल को पसंद नही आने पर पांचवी बार पूरी तरह जमींदोज करवा दिया ,अब तक प्रियंका वाड्रा ने अपने सपनों के महल पर दो सौ करोड रूपये 2013 तक ही खर्च कर चुकी है लेकिन उनको पांच बार जमींदोज करवा दिया , एक बार तो उनको बाथरूम छोटा लगा तो उन्होंने डायनामाइट से पूरा बन चूका बंगला उडवा दिया ,, प्रियंका गाँधी वाड्रा के इस तरह बने बनाये बंगले को पांच पांच बार तोड़े जाने पर हिमाचल सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई है, मुख्यमंत्री धूमल ने कहा की एकतरफ भारत के 20% लोग छत के लिये तरस रहे है और वही दूसरी तरफ प्रियंका वाड्रा खुलेआम “सफेद धन” की बर्बादी कर रही है .. “जितना सीमेंट प्रियंका गाँधी ने बर्बाद किया उतने में 200 सामान्य घर बन सकते थे!” 
मित्रों, प्रियंका गाँधी वाड्रा के इस सपने के बंगले के लिए हिमाचल की पूर्व कांग्रेस सरकार ने सारे नियम कानून , सारे पर्यावरण कानूनों की धज्जियाँ उड़ा कर चार चार पहाडियों को पूरे तीन महीनों तक डायनामाइट के ब्लास्ट से उडाकर जमीन दिया था , इस बंगले के लिए तत्कालीन कांग्रेसी हिमाचल सरकार ने रातोंरात अपने पांच कानूनों को बदल दिया था .. और इतना ही नही बिना विधानसभा की मंजूरी से हिमाचल पर्यावरण एक्ट को बदल दिया था, सबसे सटीक बात तो यह है कि नियम कानून “मानने वाली” और भ्रष्टाचार का ‘हमेशा विरोध करने वाली’ मैडम सोनिया गाँधी खुद दो दो बार अपनी बिटिया प्रियंका वाड्रा के सपनों के बंगले का औचक निरीक्षण करने जा चुकी है वो भी स्टेट गेस्ट बन कर..!!

यहाँ बस यही बात समझ के बिलकुल बाहर है कि तथाकथित रूप से हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा सारे नियम कानून मानने व मनवा कर एवं “नियमों / प्रावधानों के ही तहत” नितांत सफेद धन से बनते प्रियंका – रॉबर्ट वाड्रा के इस बंगले से संबंधित व जमीन, निर्माण से संबंधित कागजात और फाईलें ,यूपीऐनीत काँग्रेस सरकार द्वारा ही “दिये” RTI Act 2005 के तहत सार्वजनिक करने मेॆ हिमाचल प्रदेश सरकार और शिमला प्रशासन को हरी नीली दस्तें क्यों लगी हुई हैं..?? 

माननीय प्रधानमंत्री जी – गृहमंत्री – वित्तमंत्री – कानून मंत्री जी ,
देश की जनता तो वास्तविकता में देश में ही घूम घूम कर चुनौती देते काले धन पर, हो चुके घोटालों में पकडे जाते कीडे मकोडों और छोडे जाते कोबरा, अजगरों और अनाकोंडाओं पर जवाब मांग रही है,,, काँग्रेस और गांधी परिवार को छत्रछाया देते हुऐ “बी टीम” की ही तरह दिखता हुआ कार्य बंद करें और सच समेत वास्तविक अपराधी सामने ला कर कार्यवाही करके दिखाये, व्यवहारिकता में इस तरह आडवाणी और मनमोहन सिंह जी का नया मिक्सर चरित्र तो और झेला नहीं जा सकेगा क्योंकि दोनो ही भ्रष्टाचारी रक्तबीज काँग्रेस के ही प्रेमी रहे है..!!

कृपया कार्य करने में अपेक्षित गति लायें, अपराधी पकड कर कार्यवाही हेतु VVIP कल्चर की Untouchability को समाप्त करके दिखायें और स्तरीयता कायम करें , काँग्रेस व भ्रष्टाचार विरूद्ध काम कर सकेंगें, है इच्छाशक्ति …??

अब काँग्रेस, कांग्रेसी दलाल, गुल्ले और रंडीरोना करती कांग्रेसियत जवाब दे इस पर और सोनिया राहुल लोकसभा और काँग्रेस सदस्यता से अविलंब इस्तीफा दे।

Dr. Sudhir Vyas Posted from WordPress for Android

Advertisements

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s