मुसलमान संहारक मंगोल साम्राज्य ☞ चंगेज ख़ान से हलाकू ख़ान तक (भाग 1)


मंगोल साम्राज्य 13 वीं और 14 वीं शताब्दियों के दौरान एक विशाल साम्राज्य था, मध्य एशिया से शुरू यह राज्य अंततः पूर्व में यूरोप से लेकर पश्चिम में जापान सागर तक और उत्तर में साईबेरियाई स्तेपी क्षेत्रों से लेकर दक्षिण में भारत उपमहाद्वीप के इलाके तक फैल गया था! आमतौर पर इसे दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा कबीलाई साम्राज्य माना जाना जाता है, अपने समय पर यह साम्राज्य 9700 किमी इलाके तक फैला था और 33,000,000 वर्ग किमी के क्षेत्र को कवर करता था, इस समय पृथ्वी के कुल भू क्षेत्रफल का 22% हिस्सा इसके कब्ज़े में था और इसकी आबादी 100 करोड़ थी, शुरूआत में मंगोल शासक बौद्ध थे, लेकिन बाद मे तुर्कों के सम्पर्क में आकर उन्होंने इस्लाम को अपना लिया था!

★ मंगोलों के प्रमुख ख़ान या शासक –

 1206–1227  चिंगिंज खान या चंगेज ख़ान

1229–1241  ओगताई ख़ान (चंगेज का बडा बेटा)

1246–1248    गुयुक ख़ान  

1251–1259     मोंगके ख़ान  

1260–1294     कुबलई ख़ान
(कुबलई ख़ान संयुक्त युआन राजवंश का पहला शासक और कजाख मंगोलों का पहला सम्राट था)

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चंगेज़ ख़ान / चिंगिंज ख़ान –

तिमूजिन उर्फ चंगेज ख़ान एक कबीलाई मंगोल ख़ान (शासक) था जिसने मंगोल एकीकरण से लेेकर मंगोलों के वैश्विक साम्राज्य के विस्तार में एक अहम भूमिका निभाई थी, वह अपनी संगठन शक्ति, बर्बरता तथा साम्राज्य विस्तार के लिए प्रसिद्ध हुआ है, इससे पहले किसी भी खानाबदोश कबीलाई जाति के व्यक्ति ने इतनी विजय यात्रा नहीं की!

चंगेज़ खान का जन्म 1162 ई. के आसपास आधुनिक मंगोलिया के उत्तरी भाग में ओनोन नदी के मैदानी इलाके में हुआ था, उसका वास्तविक या प्रारंभिक नाम तेमुजिन (या तेमूचिन) था, उसके पिता का नाम येसूजेई था जो कियात कबीले का मुखिया था।

येसूजेई ने तेमुचिन तथा उसकी माँ का अपहरण कर लिया था, लेकिन कुछ दिनों के बाद ही येसूजेई की हत्या कर दी गई। उसके बाद तेमूजिन की माँ ने बालक तेमूजिन तथा उसके सौतले भाईयों बहनों का लालन पालन बहुत कठिनाई से किया। इसके बाद उसकी पत्नी बोरते का भी विवाह के बाद ही अपहरण कर लिया था,तब अपनी पत्नी को छुडाने के लिए उसे लड़ाईयां लड़नी पड़ीं थी, इन विकट परिस्थितियों में भी वो दोस्त बनाने में सक्षम रहा।

नवयुवक बोघूरचू उसका प्रथम मित्र था और वो आजीवन उसका विश्वस्त मित्र बना रहा, उसका सगा भाई जमूका भी उसका एक विश्वसनीय साथी था। तेमुजिन ने अपने पिता के वृद्ध सगे भाई तुगरिल उर्फ़ ओंग खान के साथ पुराने रिश्तों की पुनर्स्थापना की ताकि मंगोल कबीलों का एकीकरण कर के विशाल साम्राज्य की स्थापना हो सके और मंगोल कबीले आपस में लड कर अपनी शक्ति व संसाधन समाप्त ना करते जायें।

जमूका हँलांकि प्रारंभ में उसका मित्र था, बाद में वो शत्रु बन गया।,1180  तथा 1190 के दशकों में वो ओंग ख़ान का मित्र रहा और उसने इस मित्रता का लाभ जमूका जैसे प्रतिद्वंदियों को हराने के लिए किया, जमूका को हराने के बाद उसमें बहुत आत्मविश्वास आ गया और वो अन्य कबीलों के खिलाफ़ युद्ध के लिए निकल पड़ा। इनमें उसके पिता के हत्यारे शक्तिशाली तातार कबीलाई सरदार काईरात और खुद ओंग खान शामिल थे।
ओंग ख़ान के विरूद्ध उसने 1203 में युद्ध छेड़ा। 1206 ई. में तेमुजिन, जमूका और नेमन लोगों को निर्णायक रूप से परास्त करने के बाद साईबेरिया स्तेपी क्षेत्र का सबसे प्रभावशाली व्य़क्ति बन गया था।
उसके इस प्रभुत्व को देखते हुए मंगोल कबीलों के सरदारों की एक सभा (कुरिलताई) में उसे शासकीय मान्यता मिली और उसे चंगेज़ ख़ान (समुद्री खान) या राजाओं का राजा की उपाधि देने के साथ महानायक घोषित किया गया।

कुरिलताई से मान्यता मिलने तक चंगेज ख़ान मंगोलों की एक सुसंगठित सेना तैयार कर चुका था, उसकी पहली इच्छा चीन पर विजय प्राप्त करने की थी, चीन उस समय तीन भागों में विभक्त था – उत्तर पश्चिमी प्रांत में तिब्बती मूल के सी-लिया लोग, जरचेन समुदाय का चिन राजवंश जो उस समय आधुनिक  बीजींग के उत्तर वाले क्षेत्र में शासन कर रहे थे तथा शुंग राजवंश जिसके अंतर्गत दक्षिणी चीन आता था।
1209 ई. में सी लिया राज्य परास्त कर दिया गया , 1213  में चीन की महान दीवार का अतिक्रमण हो गया और 1215 में पीकिंग (बीजींग) नगर को लूट लिया गया।
चिन राजवंश के खिलाफ़ 1234 तक लड़ाईयाँ चली पर अपने सैन्य अभियान की प्रगति भर को देख कर अपनी बीमारी के कारण चंगेज़ खान चीन युद्ध को अपने पुत्रों और अपने अनुचरों की देखरेख में छोड़ कर 1227 ई. वापस मातृभूमि मंगोलिया लौट गया था!

किंतु हम संक्षेप में उसकी प्रारंभिक विजयों और मंगोल एकीकरण को जानने की कोशिश करेंगे – सन 1218 में करा खिता की पराजय के बाद मंगोल साम्राज्य अमू दरिया, तुरान और ख्वारज़्म राज्यों तक विस्तृत हो गया।

1219 – 1221 के बीच कई बड़े राज्यों ओटरार, बुखारा , समरकंद ,बल्ख, गुरगंज , मर्व , निशापुर और हेरात राज्यों ने मंगोल सेना के सामने समर्पण कर दिया,  जिन नगरों ने प्रतिशोध किया उनका विध्वंस कर दिया गया,, इस दौरान मंगोलों ने बेपनाह बर्बरता का परिचय दिया और लाखों की संख्या में लोगों की हत्याऐं की और लूटपाट की।

चंगेज खान ने तत्कालीन गजनी और पेशावर (अफगानी इलाके) पर अधिकार कर लिया तथा ख्वारिज्म वंश के शासक अलाउद्दीन मुहम्मद को तुर्क ईरानी प्रभुत्व के क्षेत्र कैस्पियन सागर की ओर खदेड़ दिया जहाँ 1220 में उसकी मृत्यु हो गई।
उसका उत्तराधिकारी जलालुद्दीन मंगवर्नी हुआ जो मंगोलों के आक्रमण से भयभीत होकर गजनी चला गया। चंगेज़ खान ने उसका पीछा किया और सिंधु के तट पर उसको हरा दिया, जलालुद्दीन सिंधु नदी को पार कर भारत आ गया जहाँ उसने दिल्ली के तुर्क सुल्तान अल्ततमिश से सहायता की फरियाद रखी। अल्ततमिश ने शक्तिशाली चंगेज़ ख़ान की बर्बरता के डर से उसको सहायता देने से इंकार कर दिया।

इस समय चंगेज खान ने सिंधु नदी को पार कर उत्तरी भारत और आसाम के रास्ते मंगोलिया वापस लौटने की सोची पर असह्य गर्मी, प्राकृतिक आवास की कठिनाईयों तथा उसके ओझा, तांत्रिकों द्वारा मिले अशुभ संकेतों के कारण वो जलालुद्दीन मंगवर्नी के विरुद्ध एक सैनिक टुकड़ी छोड़ कर वापस आ गया। इस तरह मुख्य भारत में उसके न आने से तत्कालीन भारत एक संभावित लूटपाट और वीभत्स हत्यारे उत्पात से बच सका!

क्रूर योद्धा चंगेज खान की बात करें, तो उसने अपने जीवन भर की लड़ाइयों में लाखों लोगों को मौत के घाट उतार दिया। उसकी निर्दयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि वो जिधर से निकलता, वहां थोड़ा सा भी विरोध होने पर आस-पास के इलाकों को भी खून से लथपथ कर देता था। उसकी इसी निर्दयता के कारण पश्चिम एशिया तक के राजाओं ने उसके सामने हार मान ली। तेमुजिन की अधीनता स्वीकार करने के बाद तमाम कबीलों के राजाओं ने उसे चंगेज खान (समुद्रों के राजा) की उपाधि दी। चंगेज खान ने ही प्रसिद्ध मंगोल साम्राज्य की नींव डाली। जिसका पूरी दुनिया के 22 फीसदी इलाके पर कब्जा था।

चंगेज खान की बर्बरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने ईरान की तीन चौथाई आबादी का समूल खात्मा कर दिया था। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि चंगेज के हमले के समय जितनी आबादी पूरे ईरान की थी, उतनी आबादी वापस होने में 750 सालों का लंबा समय लगा। ऐसे में ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि चंगेज खान कितना क्रूर और निर्दयी था। एक अनुमान के मुताबिक उसने 4 करोड़ लोगों को मौत के घाट उतार दिया। अपने जीवन का अधिकांश भाग युद्ध में व्यतीत करने के बाद सन् 1227 ई. में चंगेज ख़ान की मृत्यु हो गई।

चंगेज ख़ान के जीवन वृतांत पर रूस में 2007 में एक फिल्म का निर्माण हुआ था जो चंगेज खान के तिमूजिन से चंगेज ख़ान बनने तक की कहानी बहुत प्रमाणिक इतिहास वर्णन सहित कहती है, जिसका लिंक नीचे दे रहा हूँ।

https://m.youtube.com/watch?v=U9Ni0szmrJU

★  चंगेज ख़ान का उत्तराधिकारी ओगताई ख़ान –

ओगताई ख़ान मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज ख़ान और उसकी मुख्य पत्नी बोरते का तीसरा पुत्र था और पूरे साम्राज्य का दूसरा ख़ागान (सर्वोच्च ख़ान) था, उसने अपने पिता के ईरान , चीन और मध्य एशियाई क्षेत्रों को मंगोल साम्राज्य के अधीन करने के अभियान में बहुत हिस्सा लिया, उसे एक क़ाबिल और साहसी सेनापति और शासक माना जाता है, कहा जाता है कि ओगताई अपने पिता का सब से प्रिय बेटा था,, उसमें किसी भी बहस में लोगों का मत जीत लेने की क्षमता थी, बड़े कद-बुत और शक्तिशाली व्यक्तित्व वाला ओगताई हँसमुख और बुद्धिमान भी माना जाता था..!!

★★  तोलुइ ख़ान

एकीकृत मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज ख़ान और उसकी मुख्य पत्नी बोरते का चौथा और सबसे छोटा पुत्र था।
अपने पिता की वसीयत में उसे मंगोलिया व स्तेपी का क्षेत्र मिला, जो मंगोलों की मातृभूमि थी, चंगेज़ ख़ान की मृत्यु के बाद जब ओगताई ख़ान को अगला सर्वोच्च ख़ान चुनने में थोड़ा विलम्ब हुआ तो उसी काल में तोलुइ ने एक निपुण प्रशासक की भूमिका निभाई।
उस से पहले चीन और ईरान पर क़ब्ज़ा करने के चंगेज़ ख़ान के अभियान में उसने एक कुशल सिपहसलार होने का भी प्रमाण दिया हालांकि तोलुइ ख़ान ने कभी भी सर्वोच्च ख़ान बनने का दावा नहीं किया, उसी के ही दो पुत्रों में से एक हलाकू ख़ान / हलागु ख़ान ने आगे चलकर ईरान के इलख़ानी / इख़्वानी साम्राज्य और दूसरे खुबिलाई ख़ान / कुबलई ख़ान ने चीन के युआन राजवंश की स्थापना की थी ।
उसकी पत्नी सोरगोगतानी बेकी को मंगोल इतिहास की सबसे होशियार और सक्षम स्त्री कहा जाता है।

★★★   कुबलई ख़ान या ‘खुबिलाई ख़ान’  –

 एकीकृत मंगोल साम्राज्य का पाँचवा ख़ागान (सबसे बड़ा शासक) था, उसने 1260 से 1294 तक शासन किया था, वह पूर्वी एशिया में युआन वंश का संस्थापक था, उसका राज्य प्रशांत महासागर से लेकर यूराल / उराल पर्वतों तक और साईबेरियाई मैदानों से वर्तमान अफगानिस्तान तक फैला हुआ था जो विश्व के रहने योग्य क्षेत्रफल का 20 से 22 प्रतिशत है, कुबलई ख़ान मंगोल साम्राज्य से संस्थापक चंगेज ख़ान का पोता और उसके सबसे छोटे बेटे तोलुई ख़ान का बेटा था उसकी माता सोरगोगतानी बेक़ी (तोलुइ ख़ान की पत्नी) ने उसे और उसके भाइयों को बहुत निपुणता से पाला और परवारिक परिस्थितियों पर ऐसा नियंत्रण रखा कि कुबलई मंगोल साम्राज्य के एक बड़े भू-भाग का शासक बन सका,, कुबलई का जीवन बचपन से राजसी और विद्या आदि से परिपूर्ण था, जब 1227 ई. में चंगेज खान ने पश्चिमी श्या (Xia) शासन को खत्म कर दिया और पश्चिमी श्या (Xia) शासन के साथ लड़ाई के दौरान चंगेज खान की बीमारी की वजह से ल्यूफान पर्वत पर मृत्यु हो गई तब उस के बाद उस के उत्तराधिकारी के रूप में चंगेज ख़ान का बड़ा बेटा “ओगताई ख़ान” राजगद्दी पर बैठा, जिस ने सुंग से मिलकर ‘किन राज्य’ पर हमला किया और 1234 के शुरू में “किन साम्राज्य” के शासन को खत्म कर दिया, ‘किन राज्य’ पर कब्जा करने के बाद मंगोल फौजों ने अपनी पूरी शक्ति से सुंग पर हमला किया, ओगताई ख़ान का छोटा भाई तोलुई ख़ान भी विद्यावान, और कुशल प्रशासक था अत: पूरे परिवार में अगले खागान के रूप में जन्मजात प्रशासक के रूप में प्रसिद्ध कुबलाई ख़ान ने ओगताई के बाद 1260 ई. में स्वयंभू रूप से, और बगैर विरोध खुद को महान खान घोषित किया और हान परंपरा का अनुसरण करते हुए 1271 ई. में अपने शासन को “मंगोल” के स्थान पर “युआन राजवंशीय साम्राज्य” का नाम दे दिया गया, कुबलाई खान इतिहास में युआन राजवंश के “प्रथम सम्राट शिचू” के नाम से ज्यादा प्रसिद्ध है।

1276 ई. में युआन सेना ने सुंग राजवंश की राजधानी लिनआन पर हमला करके कब्जा कर लिया और सुंग सम्राट व उस की विधवा मां को बन्दी बनाकर उत्तर ले आया गया, दक्षिण सुंग राज्य के प्रधानमंत्री वंन थ्येनश्यांग तथा उच्च अफसरों चांग शिच्ये और लू श्यूफू ने पहले चाओ श्या और फिर चाओ पिंग को राजगद्दी पर बिठाया, तथा युआन सेनाओं का प्रतिरोध जारी रखा लेकिन मंगोलों की जबरदस्त ताकत के सामने उन्हें अन्त में हार खानी पड़ी।

युआन राजवंश द्वारा चीन के एकीकरण से थांग राजवंश के अन्तिम काल से चली आई फूट समाप्त हो गई इस ने एक बहुजातीय एकीकृत देश के रूप में चीन के विकास को बढावा दिया,, युआन राजवंश की शासन व्यवस्था के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार के तीन मुख्य अंग थे-
केन्द्रीय मंत्रालय, जो सारे देश के प्रशासन के लिए जिम्मेदार था,
प्रिवी कोंसिल, जो सारे देश के फौजी मामलों का संचालन करती थी
और परिनिरीक्षण मंत्रालय, जो सरकारी अफसरों के आचरण व काम की निगरानी करता था,
केन्द्र के नीचे “शिंग शंग”(प्रान्त) थे।

चीन में स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों के रूप में प्रान्तों की स्थापना युआन काल से शुरू हुई और यह व्यवस्था आज तक चली आ रही है, युआन राजवंश के जमाने से ही तिब्बत औपचारिक रूप से केन्द्रीय सरकार के अधीन चीन की एक प्रशासनिक इकाई बन गया, फंगहू द्वीप पर एक निरीक्षक कार्यालय भी कायम किया गया, जो फंगहू द्वीपसमूह और थाएवान द्वीप के प्रशासनिक मामलों का संचालन करता था। आज का शिनचियांग प्रदेश और हेइलुंग नदी के दक्षिण व उत्तर के इलाके युआन राज्य के अंग थे, युअान राजवंश ने दक्षिणी चीन सागर द्वीपों में भी अपना शासन कायम किया, युआन राजवंश के शासनकाल में विभिन्न जातियों के बीच सम्पर्क वृद्धि से देश के आर्थिक व सांस्कृतिक विकास को तथा मातृभूमि के एकीकरण को बढावा मिला।

युआन राजवंश की राजधानी तातू (वर्तमान पेइचिंग) तत्कालीन चीन के आर्थिक व सांस्कृतिक आदान प्रदान का केन्द्र था,इटली – वेनिस के यात्री मार्को पोलो ने, जो कभी युआन राजदरबार का एक अफसर भी रह चुका था, अपने यात्रा वृत्तान्त में लिखा है –
“युआन राजवंश की राजधानी तातू के निवासी खुशहाल थे,बाजार तरह तरह के माल से भरे रहते थे। केवल सिल्क/ऱेशम ही एक हजार गाड़ियों में भरकर रोज वहां पहुंचाया जाता था! विदेशों से आया हुआ विभिन्न प्रकार का कीमती माल भी बाजार में खूब मिलता था। दुनिया में शायद ही कोई दूसरा शहर ऐसा हो जो तातू का मुकाबला कर सके।”

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कुबलई खान आज के कजाखस्तान देश के कजाखों (कजाख कबीलाई मंगोलों) का भी पहला सम्राट और भारतीय इतिहास में अपनी बर्बरता के लिये मशहूर “तैमूर लंग / तिमूर लान / तिमूर ख़ान”  का सगा दादा भी था!

इतिश्री  भाग – 1    

अगले भाग में अरब व अन्य इस्लामिक देशों में मुसलमानों के संहार सहित मंगोल विजयों का वर्णन करूँगा,, अगला भाग मंगोल साम्राज्य के ईरानी शासक हलाकु ख़ान और कॉकेशियाई शासक नोगाई ख़ान समेत मुस्लिम संहारी इलख़ानी साम्राज्य के रूप में पढें, जो इस भाग के तुरंत बाद प्रकाशित कर दिया है !  जरूर पढें..

क्रमश:

Dr. Sudhir Vyas Posted from WordPress for Android

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13 Comments Add yours

  1. पूर्ण सत्य #जिल्लेइलाही

    Liked by 1 person

  2. Great Job Dr. Sudhir. Well done…. Kudos….

    Liked by 1 person

  3. Very well written…both the parts. Perhaps your interventional skills are more needed here than in OT

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    1. 😁 मैं ओटी वाला नहीं, मेडिसिन वाला झोलाछाप हूँ।

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  4. COUNTLESS THANKS FOR AN EYE OPENER THESIS…

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  5. तगड़ी मेहनत धन्यवाद डॉ साहब .

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  6. bhartiyapaksha says:

    शानदार आलेख। कुछ संदर्भ मैंने भी एकत्र किए हैं इस पर। चिंगिज खॉ और अन्य मंगोल सम्राटों पर 4-5 पुस्तकें भी पढ़ी हैं। हिंदी में ऐसा आलेख पहली बार पढ़ने को मिला। मैं भी इस पर कुछ लिखने की सोच रहा था। आपने कर दिखाया है। आपको बधाई।

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