उईग़ुर और पूर्वी तुर्किस्तान ☞ मुसलमान संहारक मंगोल साम्राज्य का वर्तमानचीन उग्र आतंकी कबीला (भाग 3)


image

पूर्वी चीन में चिंग राजवंश के एक महल पर चिह्न की तस्वीर, जिसमें (बाएँ-से-दाएँ) मंगोल, उइग़ुर, चीनी, तिब्बती और मान्छु में लिखा हुआ है – इसमें उइग़ुर लिखाई ‘रोशन अवतरादा क़ी दारवाज़ा’ कह रही है, यानि ‘रोशन सुन्दर दरवाज़ा’ – हिंदी और उइग़ुर भाषा में , बोली में उच्चारण तक में बहुत से समान शब्द मिलते हैं!

उइग़ुर जाति, चीन,पूर्वी और मध्य एशिया में बसने वाले तुर्की जाति की एक जनजाति है, वर्तमान में उइग़ुर लोग अधिकतर चीनी जनवादी गणराज्य द्वारा नियंत्रित श़िंजियांग उइग़ुर स्वायत्त प्रदेश नाम के राज्य में बसते हैं, शिंजियांग जनवादी गणराज्य चीन का एक स्वायत्तशासी क्षेत्र है, ये एक रेगिस्तानी और शुष्क इलाक़ा है इसलिए इस की आबादी बहुत कम है।

चीन के शिंजियांग की सरहदें दक्षिण में तिब्बत और भारत, दक्षिण-पूर्व में चिंग हई और गांसू, पूर्व में मंगोलिया, उत्तर में रूस और पश्चिम में क़जाखस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से मिलती हैं, भारत का अक्साई चिन का इलाका भी, जिस पर चीन का क़ब्ज़ा है, प्रशासनिक रूप से शिंजियांग में शामिल है, उईग़ुरों की बहुलता वाले शिंजियांग प्रांत की राजधानी उरुमची नाम का शहर है, जबकि इसका सबसे बड़ा नगर काश्गर है।

उईग़ुरों में से लगभग 80% प्रतिशत इस क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिम में स्थित तारिम घाटी में रहते हैं, उइग़ुर लोग उइग़ुर भाषा बोलते हैं जो तुर्की भाषा परिवार की एक बोली है। ऐतिहासिक रूप से 14वीं सदी में इन्हें हूनान प्रांत के एक विद्रोह को दबाने के लिए मिंग राजा द्वारा बुलाया गया था। कुछ सैनिक वहीं बस गए थे जिन्हें शासक ने जिआन की उपाधि दी थी। आज भी कुछ उइग़ुर हुनान प्रांत में रहते हैं। उग़ुर लोगों को इस नाम से विश्वयुद्धों के बीच किसी समय से बुलाना शुरु किया गया। इससे पहले इनको तुर्की, मुस्लिम या सारत कहते थे। और उस समय उइग़ुर शब्द का प्रयोग किसी प्राचीन साम्राज्य के लिए किया जाता था, जो उस समय (19 वीं सदी तक) ख़त्म हो चुका था।

1921 में हुए ताशकंद सम्मेलन में इन्हें उइग़ुर सम्बोधन प्रदान किया गया- जो उसी क्षेत्र के पुराने उईग़ुर ख़ागानत (सन् 745 – 840) के नाम से लिया गया था। अन्य पश्चिमी पर्यटकों ने उस समय तक तुर्की शब्द का ही इस्तेमाल किया, प्राचीन तुर्किस्तानी इलाके के इतिहास अनुसार आधुनिक समय में तुर्कमेनिस्तान, उज़बेकिस्तान, कज़ाख़स्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान और चीन का शिनजियांग प्रांत तुर्किस्तान इलाके में आते हैं, इनके अतिरिक्त उत्तरी ईरान और अफ़्ग़ानिस्तान के कुछ भाग, रूस के साइबेरिया क्षेत्र का छोटा सा भाग और मंगोलिया का सुदूर पश्चिमी भाग भी शामिल हैं।

image

image

उपर तस्वीरों में उईग़ुर समुदाय के लोग

ध्यान दें कि ताजिकिस्तान को छोड़कर इन सभी क्षेत्रों में तुर्की भाषाएँ सबसे अधिक बोली जाती हैं ,ताजिकिस्तान में बोली जाने वाली ताजिक भाषा एक ईरानी भाषा है, लेकिन ताजिकिस्तान को फिर भी तुर्किस्तान का भाग माना जाता है।

उइग़ुर लोगों का एक अलगाववादी समूह जो पूर्वी तुर्किस्तान स्वाधीनता आँदोलन नामक आतंकवादी दल चलाता है और जिसकी प्रमुख अमेरिका निवासी अरबपति उईग़ुर महिला “राबिया कद़ीर” है, मानता है कि यह क्षेत्र, जिसे वे पूर्वी तुर्किस्तान कहते हैं, चीन का वैध अंश नहीं है बल्कि 1949 में चीन द्वारा आक्रमण करके कब्जाया गया था और अभी तक चीन उस पर अनधिकृत रूप से काबिज है, अलगाववादी आँदोलन कुछ तुर्क मुस्लिम संगठनों द्वारा चलाया जा रहा है, जिनमें पूर्वी तुर्किस्तान स्वाधीनता आँदोलन नाम का दल प्रमुख है।

पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट नामक दूसरे दल को सऊदी अरब तथा पाकिस्तान का छद्म संरक्षण व समर्थन प्राप्त है पूर्व में ,नब्बे के दशक में कश्मीरी आतंकवाद में अफगानी, उज्बेक, चेचेनों के साथ उईग़ुर आतंकी भी शामिल रहे हैं , और इन्हे भी पाकिस्तानी मदरसों में ही, पाकिस्तानियों द्वारा आजादी के नाम पर इस्लामिक आतंकवादिता की ट्रेनिंग दी जाती है।

उइग़ुर ख़ागानत जिसे तोक़ुज़ ओग़ुज़ देश (Toquz Oghuz Country) भी कहा जाता था, एक तुर्क मंगोल ख़ागानत (साम्राज्य) था जो 744 ईस्वी से 844 ईस्वी (यानि लगभग एक शताब्दी) तक चला ,यह मूलतः ओरख़ोन उईग़ुर क़बीले के सरदारों के अधीन एक क़बीलों का परिसंघ था।

सन् 742 ईस्वी में उईग़ुर , क़ारल़ूक और बसमिल क़बीले गोएकतुर्क ख़ागानत के विरुद्ध बग़ावत में उठे,, 744 ई. में बसमिलों ने गोएकतुर्क राजधानी ओतुगेन और राजा ओज़मिश ख़ान पर क़ब्ज़ा कर लिया। लेकिन उसी साल उइग़ुरों और क़ारलूक़ों ने आपसी सांठगांठ कर ली और मिलकर बसमिलों पर हमला कर दिया। बसमिलों के राजा का सिर क़लम कर दिया गया और पूरे क़बीले के लोगों को ग़ुलाम बनाकर या तो अन्य क़बीलों में बाँट दिया गया या चीनियों को बेच दिया गया।

उइग़ुर सरदार अब इस नई ख़ागानत का ख़ागान बना और क़ारलूक़ उसके अधीन राज्यपाल बना लेकिन एक साल के अन्दर-अन्दर उइग़ुरों और क़ारलूक़ों में झड़पें शुरू हो गई और क़ारलूक़ों को मजबूरन अपनी ज़मीनें छोड़कर पश्चिम की ओर जाना पड़ा , समय के साथ-साथ चीन के तंग राजवंश को अपने क्षेत्र के अन्दर हो रहे विद्रोहों को कुचलने के लिए और दक्षिण से आक्रमण कर रही एक तिब्बती फौज से बचने के लिए सन् 755 में उइग़ुरों की मदद मांगनी पड़ी। इस समझौते में एक चीनी राजकुमारी विवाह में उइग़ुरों को और एक उइग़ुर राजकुमारी विवाह में चीनियों को दी गई। चीन ने सन् 757 में उइग़ुरों को नजराने के तौर पर बीस हजार उच्च स्तरीय रेशम के थान दिए, जो उस ज़माने में भारी क़ीमत रखते थे।

सन् 758 में उइग़ुरों के ख़ागान, बयनचुर ख़ान, ने उत्तर में बसे किरगिज़ों के ख़िलाफ़ अभियान में उनके बहुत से व्यापारिक क़स्बे ध्वस्त किये और उनके ख़ान को मार दिया लेकिन उन्हें अपने अधीन न कर पाया,ई. सन् 759 में एक समारोह में अत्याधिक शराब पीने से बयनचुर ख़ान की मौत हो गई और उसका बेटा तेन्गरी बोगु ख़ागान बना। वह चीन की विद्रोह कुचलने में मदद करता रहा और 762 में उइग़ुरों की सहायता से चीनी सफल हो गए। उइग़ुर-चीनी मित्रता संधि हुई। एक अभियान के दौरान तेन्ग्री बोगु ईरान से आये कुछ “मानी धर्म” के पुजारियों से मिला और उसने मानी धर्म अपनाकर उसे पूरी उइग़ुर ख़ागानत का राजकीय धर्म बना दिया।

इस धर्म-परिवर्तन से राजदरबार में सोगदाईयों का प्रभाव बढ़ गया, 779 ई. में चीन में तंग राजवंश का एक नया सम्राट गद्दी पर बैठा। तेन्गरी बोगु के सोग़दाई सलाहकारों ने उसे इस शासन-परिवर्तन का फ़ायदा उठाकर चीन पर आक्रमण करने के लिए उकसाया। कहा जाता है कि चीन के राजदूत ने फिर तेन्गरी बोगु के चाचा तुन बग़ा तरख़ान को विद्रोह के लिए भड़काया उसने तेन्गरी बोगु को मार डाला और उसके परिवारजन और सोग़दाई सलाहकारों समेत 2000 लोगों को मौत के घात उतार दिया। तुन बग़ा तरख़ान नया ख़ागान बना उसने फिर से उत्तर के किरगिज़ों पर हमले कर के उन्हें अधीनता स्वीकारने पर मजबूर कर दिया।

तुन बग़ा तरख़ान की मृत्यु 789 ई. में हुई और उसके बाद उईग़ुर ख़ागानत कमज़ोर पड़ने लगी। उनपर तिब्बती और क़ारलूक़ दबाव डालने लगे और कुछ क्षेत्र हथिया लिया, दो-तीन ख़ागान आये इन्होने साम्राज्य ख़त्म होने से बचाया,, उईग़ुर ख़ागानत के अंतिम शक्तिशाली ख़ागान का नाम तो पता नहीं लेकिन उसका राजसी नाम ‘कुन तेंग्रिदे उलुग बुल्मीश अल्प कुचलुग बिलगे’ था, जिसका मतलब ‘सूर्य स्वर्ग में पैदा हुआ महान, विजयी, शक्तिशाली और विवेकशील’ था। उसने सन् 821 में हुए तिब्बती हमले को खदेड़ दिया और सोगद़ा तक के व्यापार मार्ग सुव्यवस्थित किये,फिर सन् 824 में उसकी मृत्यु हुई और अस्थिरता का दौर आया, 839 में उस समय के ख़ागान को आत्महत्या तक करने पर मजबूर किया गया और कुरेबीर नामक एक मंत्री ने गद्दी पर क़ब्ज़ा कर लिया,करेला उपर से नीम चढ़ा के रूप में इस राजसी मुसीबत के बाद प्राकृतिक आपदा के रूप में एक सूखा आया, बीमारियाँ फैलीं और उस साल हुई भयंकर सर्दी में बहुत से मवेशी मारे गए जिन पर उईग़ुर अर्थव्यवस्था टिकी हुई थी, उत्तर से किरगिज़ों (एक अन्य मंगोलियाई तुर्क / अल्ताई भाषा परिवार की किर्गीज बोली बोलने वाला कबीला) ने जबरदस्त हमला कर दिया और उईग़ुर राजधानी जला डाली, उईग़ुर ख़ागानत ध्वस्त हो गई और उईग़ुर लोग मध्य एशिया में तितर बितर हो गए।

उईग़ुर ख़ागानत को बाद के मुस्लिम इतिहासकार तुर्की भाषा में ‘तोक़ुज़ ओग़ुज़’ का नाम देते थे, जिसका मतलब ‘नौ क़बीले’ है, चीनी स्रोत भी ‘जिउ शिंग’ (jiu xing) बुलाते थे जिसका मतलब ‘नौ (पारिवारिक) नाम’ है।

हो सकता है यह तिएले के मूल नौ क़बीलों की तरफ़ इशारा हो, लेकिन यह भी संभव है कि ‘तोक़ुज़ ओग़ुज़’ सिर्फ़ तिएले या उईग़ुर ही नहीं बल्कि सभी तुर्कों के लिए एक नाम रहा हो..??

उईग़ुर भाषा , जिसे उइग़ुरी में उइग़ुर तिलि  या उइग़ुरचे  कहा जाता है, चीन के शिनजियांग प्रांत की एक प्रमुख भाषा है, जिसे उईग़ुर जाति / समुदाय के लोग अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं, उईग़ुर लोग उनकी भाषा और उनकी प्राचीन लिपि पूरे मध्य एशिया में और कुछ हद तक भारत के उत्तरी भाग में भी, बहुत प्रभावशाली रहे हैं,उईग़ुर भाषा तुर्की भाषा परिवार की सदस्य मानी जाती है, यह भाषा-परिवार स्वयं “अल्ताई भाषा परिवार” की एक प्रमुख शाखा माना जाता है,, आधुनिक काल में उइग़ुर तीन लिपियों में लिखी जाती है अरबी , रोमन और सीरीलिक,, कभी-कभी इसको पिनयिन तरीक़े से भी लिखा जाता है, चीन में अरबी लिपि आधिकारीक है। 

image

क्षेत्र तारिम द्रोणी या तारिम बेसिन मध्य एशिया में स्थित एक विशाल बंद जलसंग्रहण इलाका है जिसका क्षेत्रफल 906,500 वर्ग किमी है (यानि सम्पूर्ण भारत का लगभग एक-चौथाई क्षेत्रफल) ,वर्तमान राजनैतिक व्यवस्था में तारिम द्रोणी चीनी जनवादी गणराज्य द्वारा नियंत्रित श़िंजियांग उइग़ुर स्वशासित प्रदेश नाम के चीनी राज्य में स्थित है, तारिम द्रोणी की उत्तरी सीमा तियानश्यान पर्वत श्रंखला है और दक्षिणी सीमा कुनलुन पर्वत श्रंखला है , कुनलुन पर्वत श्रंखला तारिम द्रोणी के इलाक़े को दक्षिण में स्थित तिब्बत के पठार से विभाजित करती है।
द्रोणी या जलसंग्रहण उस भौगोलिक क्षेत्र को कहते हैं जहाँ वर्षा अथवा पिघलती बर्फ़ का पानी नदियों, नहरों और नालों से बह कर एक ही स्थान पर एकत्रित हो जाता है भारत में यमुना का जलसंग्रहण वह क्षेत्र है जहाँ यमुना नदी में विलय हो जाने वाले सारे नदी नाले फैले हुए है और जिसके अंत से केवल यमुना नदी ही निकास करती है।

तारिम द्रोणी का उत्तर भारत और पाकिस्तान के साथ गहरा ऐतिहासिक और आनुवंशिकी (यानि जेनेटिक से) सम्बन्ध है, यहाँ पर पाई गई लगभग सारी प्राचीन लिखाई खरोष्ठी लिपि में है, बोले जाने वाली प्राचीन भाषाएँ तुषारी भाषाएँ थीं जो भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से हिन्द-आर्य भाषाओं की बहनें मानी जाती हैं और जितने भी प्राचीन शव मिले हैं उनमें हर पुरुष का आनुवंशिकी पितृवंश समूह आर¹ए¹ए है जो उत्तर भारत के 30-50% पुरुषों में भी पाया जाता है, लेकिन पूर्वी एशिया की चीनी, जापानी और कोरियाई आबादियों में और पश्चिमी एशिया की अरब आबादियों में पूरी तरह से अनुपस्थित है / इनमें नहीं पाया जाता है।

सबसे खासबात बारहों महीने जीरे, धनिया,हरी व लाल तीखी मिर्च व हरी सब्जियों की अनिवार्य उपस्थिति वाला उईग़ुर भोजन बहुत मसालेदार और स्वादिष्ट होता है,  जिसमें खासकर मुझे ‘लघ़मान/ Lamian’ “पिलाफ यानि पुलाव” और  कावाप्लार यानि कबाब तथा ‘मानत्ती’ बहुत पसंद है , विशेषकर लघ़मान ….   😁 😁 😁

image

image

image

image

उपरोक्त सभी तस्वीरें विभिन्न तरह के “लघ़मान / Lamian” नामक भोजन की हैं।

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आशा करता हूँ,  संक्षिप्त व रूचिकर जानकारियों की यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी … यदि हाँ, तो कृपया जिल्लेइल़ाही को अवगत जरूर करायें। 

Dr. Sudhir Vyas Posted from WordPress for Android

Advertisements

2 Comments Add yours

  1. बहुत ही अच्छी जानकारी है

    Like

  2. Pingback: Anonymous

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s