India & Secularism या सेक्यूलर भारत..??


“ये देश किसी काम का नहीं है, इस देश के लिये शहीद होना बेकार है, यहां की गवर्नमेंट को किसी की कोई चिंता नहीं है।”
दिसंबर 2014 के प्रथम सप्ताह में माओवादी हिंसा में शहीद वीर जवान की वीरांगना के उदगार हैं यह !!

वैसे सही ही कहा है, इस वर्तमान भारत देश के लिये शहीद होना बेकार ही है, हां सेक्यूलर या मानवाधिकार वादी बन कर मेवा खाया जा सकता है, तो आओ मित्रों, आज सेक्यूलर और सेक्यूलरिज्म को थोडा अकाट्य दस्तावेजी रूप से उधेडते हैं –

‪#‎जिल्लेइल़ाही_उवाच्‬

“A human cannot become an atheist merely by wishing it…so who is Secular in our India,,,?”

अभी हमारे भारत देश में सेक्यूलरिज्म की कम से कम 6 परिभाषाएं लागू हैं, यद्यपि कोई वास्तविक नहीं,बस विभिन्न लोग इच्छानुसार इनका उपयोग करते हैं।

★ एक परिभाषा 1973 में न्यायाधीश एच. आर. खन्ना ने दी कि “राज्य मजहब के आधार पर किसी नागरिक के विरुद्ध पक्षपात नहीं करेगा”।

★ कुछ समय बाद दूसरी परिभाषा कांग्रेस पार्टी ने दी, “सर्व-धर्म, सम-भाव”।

★ तीसरी परिभाषा भाजपा की, “न्याय सबको, पक्षपात किसी के साथ नहीं”।

★ चौथी परिभाषा फिर भाजपाई है – ” सबका साथ सबका विकास”

★ पांचवी परिभाषा भी भाजपाई है – “एक हाथ कुरान एक हाथ कंप्यूटर”

★★छठी परिभाषा एक अत्यधिक महत्वपूर्ण टिप्पणी है, और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व-मुख्य न्यायाधीश एम. एन. वेंकटचलैया की होने के कारण इस का महत्व है।
इस के अनुसार — “सेक्यूलरिज्म का अर्थ बहुसंख्यक समुदाय के ‘विरुद्ध होना’ नहीं हो सकता!”

यह टिप्पणी प्रकारांतर स्वीकारती है कि व्यवहार में इस का यही अर्थ हो गया है , यहाँ याद करें कि स्वयं संविधान निर्माता डॉ. अंबेड़कर ने भारतीय संविधान को सेक्यूलर नहीं माना था क्योंकि “यह विभिन्न समुदायों के बीच भेद-भाव करती है”।

उपर्युक्त परिभाषाओं में सबसे विचित्र बात यही है कि इन में से किसी को वैधानिक रूप नहीं दिया गया। कांग्रेस ने 1976 में इमरजेंसी के दौरान 42वाँ संशोधन करके, संविधान की प्रस्तावना में ‘सेक्यूलर’ शब्द जबरन जोड़ दिया किंतु बिना कोई अर्थ दिए,, जबरन इस रूप में, वो भी तब ,जब लगभग पूरा विपक्ष (सिवाय कम्युनिस्टों और वामपंथी के) जेल में डाला हुआ था और प्रेस पर अंकुश था।

बाद आई जनता सरकार ने 1978 में 45वें संशोधन द्वारा कांग्रेस वाली परिभाषा को ही वैधानिक रूप देने की कोशिश की , लोक सभा में यह पारित भी हो गया। पर राज्य सभा में कांगेस ने ही इसे पारित नहीं होने दिया!

यह इस का पक्का प्रमाण था कि संविधान की प्रस्तावना में ‘सेक्यूलर’ शब्द गर्हित उद्देश्य से जोड़ा गया था,, इसीलिए उसे जान-बूझ कर अपरिभाषित रखा गया ताकि जब जैसे चाहे, दुरुपयोग किया जाए।

यह अन्याय सुप्रीम कोर्ट ने भी दूर नहीं किया। उलटे 1992 में ‘एस. आर. बोम्मई बनाम भारत सरकार’ वाले निर्णय में इसने लिख डाला कि सेक्यूलरिज्म लचीला शब्द है, जिस का अपरिभाषित रहना ही ठीक है जबकि ऐसा कहना कानून और संविधान की मूल धारणा के ही विरुद्ध है,, कानून का अर्थ ही निश्चित रूप से लागू होने वाला आदेश होता है पर जो स्पष्ट ही नहीं, वह मनमानी के सिवा और लागू कैसे होता?

पिछले 42-43 साल से तथा विशेषकर वर्तमान समय में इस चहुंओर फैली समग्र मानवतावादी और सेक्यूलर विचारधारा ने ही भारतदेश सहित “हिंदू मानव मात्र” को वो नुकसान पहुँचाना शुरू कर दिया है जो कट्टर सांप्रदायिक जेहादी अथवा देशद्रोही आतंकवादी भी नहीं पहुंचा सकते,,, मानो या ना मानो पर सच यही है कि आज का नित नई व्याख्याओं वाला निरंकुश व द्रोही सेक्यूलर मानवतावाद ही हिंदू मानव मात्र तथा राष्ट्र तक का प्राथमिक शत्रु है क्योंकि वह निरंकुशता के साथ स्वतंत्र उच्छंख्रलता (Sovereignty) का ही पक्षधर है…. हालिया उदाहरण ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जेहादी आंदोलन को पुकारते पत्र संदेश से ले लें जिसके परिणाम दो दिन बाद जुम्मे की नमाज के बाद सामने आने शुरू होंगें पर सरकारें, न्याय व्यवस्था मुंह में रेत भर कर चुप बैठी हैं। 

इसी कारण आज के समय में हमारे भारतदेश और वैश्विक वातावरण को देखते हुऐ व्यक्तिगत रूप से मेरा तो बहुत ही स्पष्टता से मानना है कि –

“Humanitarianism is the expression of stupidity and cowardice” अर्थात् –
मानवतावाद मूर्खता और कायरता की अभिव्यक्ति मात्र ही है !!

जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम् !! !!
जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम् !! !!

वन्दे मातरम्

Dr. Sudhir Vyas Posted from WordPress for Android

Advertisements

3 Comments Add yours

  1. bulletamit says:

    इससे ही कुछ मिलता जुलता मैं भी लिख चूका हु — समय मिले तो पड़ लीजियेगा
    http://bulletamit.blogspot.in/2014/12/blog-post_11.html

    Like

  2. Sunny says:

    Jilleilahi hum sab ki peeda hum sabko pta hai, ab kya kare, marham lagaaye ya kuchh aur kare..upaay sujhaaye? ye samvidhan ka jholjhal shayad hi kisi ko smjh aaya hoga

    Like

    1. सशस्त्र हिंसक क्रांति … दूसरा इलाज ही नहीं

      Like

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s