अल्लाह को मानते गैरूल्लाह के दर पर मन्नती मुसलमान या मुशिरक मोमिन ..?


अगर इस्लाम में दरगाह बनाना जाईज होता या उसकी कोई अहमियत होती तो अम्बिया अलैहि. की दरगाहें बनती जबकि कुछ को छोडकर बाकी सब अम्बिया की कब्रों का पता तक नहीं है,,

कब्रिस्तान में नमाज पढ़ना या तिलावते कुरआन करना या कब्र को मकामे कुबूलियत समझना या साहिबे कब्र के वास्ते या वसीले से दुआ करना या खुद उसी को अपनी हाजात (जरूरियात) पेश करना या कब्रों पर मेले, उर्स और कव्वाली वगैरह का एहतेमाम करना इन सब कामो का अहादीसे रसूल सल्ल. और अमले सहाबा रजि. में कोई नामो निशान तक नहीं मिलता .
(उमर फारुक सईदी हाशिया-अबू दावूद जिल्द 3 सफा:583)

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‪#‎Note‬ – हन्फ़ी उलेमा के फतवे (उलेमा ए अहनाफ)

1.) मजारात पर चादर चढाना मना है और औलिया अल्लाह की अरवाह (रूहों) से यह अकीदा रखना कि हम जब मुसीबत में फंस कर इन्हें आवाज देते है और उनसे मांगते है तो यह हमारी फरियाद को हर जगह सुनते है और हमारी मदद के लिए आते है. यह अकीदा इस्लामी नहीं बल्कि मुशरिकाना/गुनाहगार अकीदा है.
(फतवा मेहमुदया जिल्द:1, सफा:206)

2.) कब्र को बोसा देना या मजार के दर और दीवार को चूमना हराम है.
(फतवा मेहमुदया जिल्द:10, सफा:61)

3.) मजारात पर जो मोमबत्ती (चिराग), खुशबु और रूपये चढ़ाया जाता है, यह सब हराम और बातिल है.
(फतवा मेहमुदया जिल्द:1, सफा:125)

4.) गैरुल्लाह की नजर (मन्नत) मुर्दार के हुक्म मे है, उसका खाना जाईज नहीं है.
(फतवा मेहमुदया जिल्द:17, सफा:294)

5.) कुछ लोग कब्रों पर चढावा चढाते है वो इसलिए कि साहिबे कब्र राजी हो जाए और उनको अपना हाजतरवा (हाजत को पूरी करनेवाला) समझते है. यह अकीदा शिर्क है और चढावा खाना भी जाईज नहीं है.
(अगलात अल अवाम सफा:23)

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‪#‎Important‬

6.) इस तरह मन्नत मानना की, “ऐ बुजुर्ग, मेरा फला काम हो जायेगा तो आपके नाम पर बकरा जिबह करूँगा” शिर्क है.
(फतवा रहीमया: जिल्द 6, सफा 69)

7.) अम्बिया और औलिया की कब्रों का तवाफ़ करना हराम है
(फतवा रहीमया जिल्द 10, सफा:144)

8.) कब्र का तवाफ़ करना हराम है, अगर मुस्तहब जान कर करे तो काफ़िर होगा
(फतवा रशीदया, सफा:143)

9.) खाने या मिठाई पर फातिहा पढना बिदअत और गुमराही है.
(फतवा रशीदया, सफा:154)

10.) बअज लोग कब्रों पर चढावा चढाते है, यह बिलकुल हराम है और इस चढावे का खाना भी सही नहीं है
(बहिश्ती जैवर जिल्द 6, सफा:52)

अल्लाहताला के लिए तौहीद से खिलवाड़ न करो ऐ बे’ईमान वालों, इसलिए कि अल्लाहताला का इर्शाद है –
“अगर नबी भी शिर्क करते तो उनके सारे आमाल जाया और बर्बाद हो जाए”
( सुरह अनआम:88, सुरह जुमर:65)

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आखिर में ‪#‎जिल्लेइल़ाही_उवाच्‬ –

नऊजोबिल्ला, ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह , हम बहुसंख्यक हिंदुओं के ही मूलतः कानूनी देश में हमारे हक के हर मामले या हर धार्मिक, जीवन पद्धति से जुड़ी बात पर कितना झूठ बोल बोल कर हमेशा इस्लाम, मुसलमान खतरे में का ही रोना रोते रहेंगे ये खैरात पसंद बे’ईमानवाले मोमिन यहाँ इंडिया दैट इज भारत में…??

‪#‎जिज्ञासाऐं‬ …

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Dr. Sudhir Vyas Posted from WordPress for Android

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  1. डॉ. साहब अच्‍छी जानकारी के लिये धन्‍यवाद।

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