इस्लाम का फिरकापरस्त आतंकवाद ☞ आतंकी इस्लाम का नाश अल्लाह करेगा


मित्रों,विश्व में जितने भी धर्म स्थापक हुए हैं ,सभी ने अपने मत के बढ़ने की कामना की है लेकिन मुहम्मद साहब ही एकमात्र व्यक्ति थे जिसने इस्लाम के विभाजन हो जाने टुकडे हो जाने और सिमट जाने की तथाकथित भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी यह भी अकाट्य सत्य है,यह बात सभी प्रमाणिक हदीसों में मौजूद है !!

यदि कोई मुसलसल बे’ईमानवाला या कोई सेक्यूलर ‘हिंदू मोमिन’ प्रमाणित इस्लामिक हदीसों को झूठ कहता है तो उसे मुहम्मद साहब को भी झूठ और झूठा साबित करना पड़ेगा (Blasphemy / ईशनिंदा को ले कर कट्टरपंथी इस्लामिक हिंसकता और बर्बरता को याद रख लेना बकैतों 😁) क्योंकि यह इस्लाम के भविष्य के बारे में है और यह सचाई सभी जानते हैं कि इस्लाम किसी आदर्श या नैतिकता के आधार पर ही नहीं बल्कि तलवार के जोर पर और आतंक, ब्लैकमेल सरीखे तरीकों से ही फैलाया गया है ,, ऐतिहासिक रूप से इस्लाम की बुनियाद और हर दिन तक खून से भरा है और असहिष्णु कट्टरता, बर्बरता का ही पर्याय है साथ ही सिर्फ साम्राज्यवादी व्याभिचार का पर्याय भी है साथ ही बहुत कमजोर भी है !!

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                  प्रतीकात्मक तस्वीरें हैं 

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और हाँ यह बात हम वर्तमान में भारत, पाकिस्तान , अफगानिस्तान, अबख़ाजिया , दक्षिणी असेतिया , उज्बेकिस्तान , ताजिकिस्तान , इराक , चैचेन्या , इंगूशेतिया , बोस्निया , ईथोपिया ,सूडान, सोमालिया , स्पेन , अल्जीरीया , लीबीया , बंगलादेश , इंडोनेशिया , इरान , ईराक, ट्यूनिशिया,  फ्रांस, मिस्र सहित हालिया सीरीया , नाईजीरियामलेशिया , बंगलादेश सहित इंडोनेशिया ,सऊदी अरब, तुर्की आदि मुस्लिम देशों की वास्तविक स्थितियों की आंख में झांक कर पता लगा सकते हैं कि “शांति का पैगाम देते शांतिदूतों का मजहब” किस तरह का पैगाम ही दे रहा है और कौन किसके खिलाफ ‘जिहाद’ ही कर रहा है या शांति का पैगाम दे रहे हैं ..??

जिल्लेइल़ाही उवाच्  –
यह सब कायम है मात्र नाम की ‘अनंत शांति हेतु’ पर वास्तविकता में मरघट – कब्रिस्तान सी शांति हेतु …क्योंकि मुरदे कुछ नहीं बोलते वो शांत ही होते हैं,उन्हे सिवाय दो गज जमीन कुछ नहीं चाहिये,,, सनद रहे।

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“अब्दुल रहमान अल कसीर ने कहा कि इमाम जफ़र ने बताया ,अल्लाह ने रसूल को तो रहमत के लिए भेजा था लेकिन मेंहदी को लोगों से प्रतिशोध लेने के लिए भेजेगा”
    :  عن عبد الرحمن القصير عن أبي جعفر عليه السلام

        إن الله بعث محمدا رحمة وبعث القائم نقمة    قال
(Baqir Al-Majlisi, Bihar Al-Anwar, Vol. 52,  p. 314-315)  (Muhammad ibn Hasan al-Saffar, Bashairu al-Darajat, p. 83)

“मेंहदी अरबों का विरोधी होगा अरब में कत्ले आम के अलावा कोई काम नहीं होगा, सभी अरब मारे जायेंगे”
      ما بقي بيننا وبين العرب إلا الذبح

(Baqir Al-Majlisi, Bihar Al-Anwar, Vol. 52, p. 349)  and  (Al-Numani, Al-Ghaiba, p. 155)
(الغيبة للنعماني ص155,  بحار الأنوار 52/349)

“मेंहदी का नाम ‘मुन्तजिर’ इस लिए है की वह रुक कर लोगों में घूमेगा और खोज खोज कर अरबों का क़त्ल करवा देगा”
      منهم أحد  اتق العرب فإن لهم خبر سوء أما إنه لم يخرج مع القائم

  (Baqir Al-Majlisi, Bihar al-Anwar, Vol. 52, p. 318)

“अरबों को डरना चाहिए कि अल कायम यानि मेंहदी की यह चेतावनी सभी अरबों के लिए है चाहे वह सुन्नी हों या शिया”
”    ويخشى العرب لأنه سيكون هناك أنباء سيئة للغاية بالنسبة لهم، وهو أن أيا من بينهم سيخرج مع القائم   ”

(Baqir Al-Majlisi, Bihar Al-Anwar, Vol. 52,  p. 333) and (Al-Numani, Al-Ghaiba, p. 254, 52/333) (بحار الأنوار  , الغيبة للنعماني ص254)

“मेंहदी के आने पर जो लोग अली की विलायत से इंकार करेंगे उनको इस्लाम विरोधी मानकर ‘यहूदी और ईसाई की तरह जिम्मी घोषित कर दिया जायेगा’ और टैक्स वसूला जायेगा”
فإذا قام قائم عرضوا كل ناصب عليه فإن أقر بالإسلام وهي الولاية وإلا ضربت عنقه أو أقر بالجزية فأداها كما يؤدي أهل الذمة
(Baqir Al-Majlisi’s Bihar Al-Anwar, Vol. 52, page 373 and  Furat ibn Ibrahim’s Tafseer , page 100)
( 52/357   بحار الأنوار  ,   تفسير فرات ص 100)

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★  “बाकिर मजलिसी ने कहा ,जो सुन्नी मेंहदी की शिक्षा नहीं अपनाएगा तो मेंहदी पहले तो सुन्नी उलेमा को क़त्ल करगा फिर सभी सुन्नियों के सिर कटवा देगा”
      يناكحوننا ويوارثوننا الى ان يظهر المهدي حيث يبدا بقتل علماء اهل السنة ثم عوامهم

(Baqir Al-Majlisi’s Haq Al-Yaqeen-Al-Kulaini’s Al-Rawdah min al-Kafi, Vol. 8, page 160)

★  “अबू उबैदा अल हज्जा से इमाम अबू अब्दुल्लाह ने कहा मेंहदी जब उठ खड़े होंगे तो दाउद और सुलेमान की शरीयत लागू कर देंगे और किसी और शरीयत को प्रमाण नहीं मानेंगे”
           …  جعفر عليه السلام: عن أبي عبيد الحذَاء قال
         قال يا أبا عبيدة إذا قام قائم آل محمد عليه السلام حكم بحكم داود وسليمان ولا يُسأل بيننة

(Al-Kulayni, Usul Al-Kafi, Vol. 1, p. 397 ,  Al-Mufeed Al-Tusi, Al-Irshad, p. 413, and Alam Al-Wara, p. 433  ) 

★  “जब मेंहदी ‘यस्रिब’ यानि मदीना जायेंगे तो वहां ‘अल हुजरा अल नबीविया’ के जिस कमरे में रसूल के साथ आयशा, अबूबकर और उमर की लाश दफ़न है उन्हें खुदवा कर निकलवा देगा और रसूल को अल बाकी में दफ़न करा देगा और बाकी को लकड़ी के क्रूस पर लटका देगा”
                     وأجيء إلى يثرب فأهدم الحجرة وأخرج من بها وهما طريان فآمر بهما تجها البقيع وأمر بخشبتين يصلبان عليهما
       
(Al-Majlisi, Bihar al-Anwar, Vol. 53, p. 104 -10) ( بحار الأنوار ج 53/104-105 )

“मेंहदी अबू बकर और उमर बिन खत्ताब की कबरें खुदवा देगा और उनको जिन्दा करके सबके सामने कोड़े लगवाएगा और बाद में क्रूस पर लटका देगा”
“ونبش قبر أبي بكر الصديق وعمر بن الخطاب أن يتعرض للنبش، وأنهم ليصلب ويجلد أمام الحشود. سيتم احياء كل منهما في الحصول على الأحكام الصادرة بحقهم.  ”
Ni’matullah Al-Jazairi, Al-Anwar Al-Numaniyah, Vol.2, p. 85 and Baqir Al-Majlisi, Haq al-Yaqeen, Vol. 2, p. 242

“जब मेंहदी उठ खड़े होंगे तो वह मक्का के मस्जिदुल हराम यानि “काबा” को ध्वस्त कर देंगे”
                  …  إذا قام المهدي هدم المسجد الحرام

       (Al-Mufid, Al-Irshad. p. 411 and At-Tusi, Kitab al Ghaybah, p. 282) (  الغيبة للطوسي ص28 ,  الإرشاد للمفيد ص411 )

अब तो सभी मुल्ले , मौलवियों , इमामों और मुसलसल बे’ईमानवालों को चुनौती है कि जब उनका अल्लाह ही इस्लाम का सत्यानाश करने इच्छा रखता है तो तुम बेगैरत लोग हम गैर इस्लामिक लोगों पर यह आरोप क्यों लगाते हो कि हमारे कारण तुम्हारा कमजोर दीन इस्लाम खतरे में है..??

और तो और  जो अल्लाह रसूल कि कबर खुदवाने और काबा को ध्वस्त करने वाला है फिर मुसलमान उसकी इबादत क्यों करे ?

इसका यही कारण हो सकता है या तो अल्लाह काबा में रह कर ऊब गया है और किसी नए बड़े मकान में रहना चाहता हो ..??

कुछ भी गलत सलत कहने वाले बे’ईमानवाले याद रखना कि “यह हदीसें मुहम्मद साहब के वंशजों द्वारा कही गयी हैं”  और जो भी इनको झूठ बताये या जिल्लेइल़ाही पर ही गलतबयानी का आरोप लगावे तो समझो सभी हदीसें और कुरान भी झूठ है मुसलमानों को अगर अपने ही आत्मग्लानि वाले अपराधों के बोझ तले दबी दुश्मनी किसी से निकालनी हो तो कृपया अपने ही अल्लाह से दुश्मनी निकालने की हिम्मतें करें क्योंकि इस्लाम के ही मुताबिक  “अल्लाह इस्लाम का नाश कर देगा”

सनद रहे,  जो लोग खुद को सबसे बड़ा सेक्यूलर और “हिंदू मोमिन” साबित करने के लिए मुसलमानों द्वारा किये जा रहे धर्म परिवर्तन के षड्यंत्र  (जैसा हाल में ही सैय्यद अहमद बुखारी ने अपने पिल्ले शाबान के लिये किया है,)  पर अपनी आंखें बंद कर लेते हैं और जब मुसलमान छल और बल , लफ्फाज़ी का प्रयोग करके किसी हिन्दू या गैर मुस्लिम को मुसलमान / मुसलोईड  बना लेते है तो इसे “धर्म की आजादी या धर्म मानने की आजादी” का धोखेबाज नाम दे कर सही बताते हैं, कुरान की मूल शिक्षा के नाम पर यानि ‘सूरा – बकरा 2:256’ का सहारा लेकर,, लेकिन यदि कोई व्यक्ति किसी कारण मुसलमान बन जाने पर फिर से अपना पुराना धर्म अपना लेता हैं तो मुसलमान उसे क़त्ल कर देते है या वाजिबुल कत्ल का नाम देते हैं।

इसी तरह जब मुसलमान दुसरे धर्म की निंदा करते हैं , तो सेकुलरों के मुंह पर ताले लग जाते है लेकिन यदि कोई गलती से भी इस्लाम / कुरान या मुहम्मद के बारे में कुछ सही व्याख्या से कहता हैं तो भी जानबूझकर बे’ईमानवाले हंगामा बरपा कर देते हैं क्योंकि छठी शताब्दी के अरब से लेकर आज के सभी मुसलोईड्स सिर्फ दोगली नीति अपनाते हैं इनकी कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है , ये खुल्लमखुल्ला स्लीपर सेल्स आतंकवादी हैं जिन पर अब हिंदू साम्राज्यवाद और कानून का सच्चा राज कायम करना जरूरी हो चला है।

हिंदी हिंदू हिंदुस्तान,  यही हमारी सच्ची पहचान
वन्दे मातरम्

★★    इस लेख की प्रमाणिकता को साबित करने हेतु लिंक नीचे शेयर कर रहा हूँ सो प्रबुद्ध पाठकगण गौर करें,  और जहाँ तक सँभव हो लेख को भी जरूर पढें !

Shia’s Imam Mahdi vs. Sunni’s Al Mahdi

Both Sunni Muslims and Shia are awaiting a person whose is referred to as Al-Mahdi (Shia call him Imam Mahdi because they are expecting him to be their 12th Imam).  However, both the identity and characteristics of the Mahdi of the Sunnis are significantly different from the identity and characteristics of Shia’s Imam Mahdi.

http://www.discoveringislam.org/shia_mahdi.htm

अब अंत में मेरा विचार
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#Attention बहुत गौर से पढना व्याख्यात्मक भविष्यवाणी

इस्लाम के दोनो प्रमुखतम मूल फिरकों यानि शियअत और सुन्नत दोनो में अलग अलग रूप से एक ही ‘अवतार’ के आने की भविष्यवाणी सरीखी की गई है, शियअत में Imam Mahdi यानि इमाम माहदी कहा गया है तो सुन्नत में Al Mahdi अल माहदी कहा गया है!

वैसे हम सब लोग जानते हैं कि हर भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में लगभग हर 100 किमी के बाद मूल भाषा और मूल शब्द भी उच्चारण के साथ अपभ्रंश में हो जाता है, थोडा फेरबदल हो जाता है,, जैसे हिंदी का “ककडी” जयपुर से जोधपुर आते आते ‘काकडी’ हो जाता है , उज्बेकिस्तान का “तांदीर और समसा” भारत आते आते ‘तंदूर और समोसा’ बन जाता है तो वहीं भारत का ‘द्वार’ रूस पहुंचते पहुंचते ‘द्वेर’ बन जाता है, उसी प्रकार अरब के “महाबत, लेकेन, शाईतान, बिलकोल, असाली, खाबर तथा घारीब” जैसे शब्द हिंदुस्तान पहुंचते पहुंचते क्रमश: “मौहब्बत, लेकिन, शैतान, बिलकुल, असली, खबर तथा गरीब” बन जाते हैं।

हाँ तो मित्रों अब आतें हैं मूल बात पर तो मैं कह रहा था कि “इस्लाम के दोनो प्रमुखतम मूल फिरकों यानि शियअत और सुन्नत दोनो में अलग अलग रूप से एक ही ‘अवतार’ के आने की भविष्यवाणी सरीखी की गई है, शियअत में Imam Mahdi यानि इमाम मेहदी कहा गया है तो सुन्नत में Al Mahdi यानि अल माहदी कहा गया है, ये माहदी वही अवतार पुरूष होंगे जो कायम इस्लाम का नाश करके दाऊद की उम्मत और अली की विलायत कायम करेंगे, ये मैं नहीं कहता इस्लाम कह रहा है, मेरे उपरोक्त लेख में “मैनें यह सुस्पष्ट किया है और कोई शिया – सुन्नी इसे झुठला तो नहीं सकता”

और अब अंत में एक विचार कि तथाकथित Imam Mahdi इमाम माहदी या Al Mahdi अल माहदी भी भारत पहुंचते पहुंचते भाषाई अपभ्रंश यानि Linguistic corruption के फलस्वरूप “पीएम मोदी” तो नहीं हो गया..??
#जिज्ञासाऐं

Dr. Sudhir Vyas Posted from WordPress for Android

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3 Comments Add yours

  1. गज़ब व्यास जी ..अपने इन मुस्लोइड्स की सारी हवा निकाल दी ..अब ये अपने सो कॉल्ड मज़हब को अपने अल्लाह से ही बचा लें पहले, हमसे तो बाद में निपट लेना ..

    Liked by 1 person

    1. जिल्लेइल़ाही पर गैबी ताकतें और जिन्नाती जलाल जो है 😁😉

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